सिर्फ पेट्रोल पंप ही नहीं, रिफाइनरी से लेकर टैंकर तक में होता बड़ा खेल

सिर्फ पेट्रोल पंप ही नहीं, रिफाइनरी से लेकर टैंकर तक में होता बड़ा खेलएसटीएफ की टीम घटतौली की जांच तो कर रही है लेकिन इनसे कौन निपटेगा।

अभिषेक पाण्डेय

लखनऊ। एक तरफ एसटीएफ टीम घटतौली की शिकायत मिलने पर प्रदेश भर के पेट्रोल पम्पों पर छापेमारी कर रही है तो वहीं दूसरी ओर उसके और ऑयल कंपनी के नाक के नीचे ही अवैध तेल का काला कारोबार तेल टैंकर संचालक कर रहे हैं। यह पूरा गोरखधंधा राजधानी लखनऊ के अमौसी क्षेत्र में बने विभिन्न ऑयल कंपनी के रिफायनरियों में चल रहा है, जिसका कुल कारोबार करोड़ों में है। इस अवैध कारोबार के हिस्सेदार क्षेत्र में फैले ढाबा संचालक समेत टैंकर माफिया हैं। करीब प्रत्येक टैंकर से रोजाना 20 से 40 लीटर पेट्रोल और डीजल-पेट्रोल पम्प पहुंचने से पहले ही रास्ते में ही टैंकर ड्राइवर एक गैलन में निकाल कर बाजार में कम कीमत में बेच देते हैं।

अमौसी के ऑयल रिफायनरी क्षेत्र में पहुंचते ही सड़कों के दोनों ओर इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के टैंकर खड़े दिख जायेंगे, लेकिन तेल से भरे टैंकर का रास्ते में रोकने का टैंकर ड्राइवरों ने नायब तरीका निकाला है, जिसका तोड़ ऑयल कंपनी के अधिकारियों के पास भी नहीं है। वहीं नाम न छापने की शर्त पर ऑयल कंपनी के एक कर्मचारियों ने बताया कि, रिफायनरी कंपनी के गेट से कुछ दूरी पर ही टीनशेड नुमा बीघों में फैला कारखाना बना है, जिसे टैंकर रिपेयरिंग सेंटर का नाम देकर टैंकों से गैलन में 20 से 40 लीटर पेट्रोल और डीजल निकालने का खेल चलता है, जिसे क्षेत्र में सक्रिय तेल माफिया बाजार में सस्ते दामों में बेच देते हैं।

रोजाना करीब सैकड़ों टैंकर राजधानी समेत पूर्वांचल के लिए रवाना होती है, जिसमें से तेल बीच में ही निकाल कर बेच दिया जाता है। वहीं इस पूरे मामले में ऑयल कंपनी के किसी भी अधिकारी ने बात करने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि ऐसा कोई भी मामला उनके संज्ञान में नहीं है और न ही इस तरह कोई भी टैंकर चालक चोरी कर सकता है।

टैंकर से भी चोरी का जा रही है।

अड्डा पर मिल जायेगा चोरी का तेल

टैंकर ड्राइवर चोरी का तेल क्षेत्र में बने ढाबा पर बेच देते हैं, जिसे बाद में ढाबा संचालक सरोजनीनगर और बंथरा क्षेत्र में छोटी-छोटी दुकानों पर बेच देते हैं। इसके बाद यह पेट्रोल और डीजल नादरगंज क्षेत्र में बने इंडस्ट्रीयल एरिया के कारखाना मालिक खरीद लेते हैं। चोरी का तेल बिकने वाली दुकान को क्षेत्र के लोग अड्डा नाम से जानते है, लेकिन इस पूरी चोरी के खेल में टैंकर मालिक पेट्रोल आम जनता को चुना लगा रहे हैं।

इन गांवों में होता है तेल का खेल

सरोजनीनगर क्षेत्र के गांव हिंदूखेड़ा, गंगानगर, पिपरसंड समेत कई और अन्य गांव में तेल की चोरी की कहानी खुलेआम जग जाहिर है, जिसे रोक पाना बहुत कठीन है। इस गांव के लोगों का कहना है कि, क्षेत्र में फैले ज्यादातर छोटी दुकानों में पेट्रोल और डीजल बाजार से कम कीमत पर मिल जाता है।

सेंसर चिप से होती है टैंकर की मॉनिटरिंग

ऑयल कंपनी टैंकर ड्राइवरों पर नजर रखने के लिए ज्यादातर टैंकरों में एक डीटीएच चिप लगा रखा है, जिससे टैंकर ड्राइवरों की पल-पल की खबर कंपनी के पास रहती। जबकि ऑयल अधिकारी डाल-डाल तो टैंकर ड्राइवर उनकी आंखों में धुल झोंकने के लिए पात-पात चलते हैं। हालांकि इस पूरी चोरी में किन-किन लोगों की संलिप्तता है, यह जांच का विषय है। वहीं इस चिप से टैंकर की स्पीड तक पर नजर रखी जाती है, क्योंकि 50 से ऊपर स्पीड से चलने पर टैंकर में एक एयर प्रेशर बनता है, जिससे आग लगने का खतरा भी हो सकता है।

सादा पानी है कोड

क्षेत्र में फैले कई ढाबा संचालक तेल कोड वर्ड में बेचते हैं, जिसे उन्होंने अधिकारियों की नजरों से बचने के लिए सादा पानी कोड वर्ड दिया है। इस कोड वर्ड को केवल क्षेत्र के ग्रामीण जानते हैं या तेल माफिया। चोरी किये हुये पेट्रोल को करीब 61 से 62 रुपए प्रति लीटर में बेचा जाता है और डीजल करीब 50 रुपए प्रति लीटर में बेचा जाता है, जो बाजार मूल्य से कम पर पड़ता है।

तेल चोरी के कई साधनों का प्रयोग किया जा रहा है।

पुलिस की नाक के नीचे हो रहा पूरा खेल

इस पूरे काले खेल में साफ जाहिर होता है कि इसमें स्थानीय पुलिस की मिलीभगत नहीं होती, क्योंकि ऑयल कंपनी के कुछ दूरी पर ही नादरगंज चौकी है, जहां से यह टैंकर ड्राइवर होकर गुजरते हैं और चौकी से कुछ दूरी पर ही ड्राइवर तेल टैंकर से तेल निकासी का काम करते हैं। जबकि पुलिस इस पूरे खेल को शायद देखने के बावजूद भी अपनी आंखें बंद कर पूरे खेल को अनदेखा कर देती है। वहीं क्षेत्र में चौधरी ढाबा वाले ने बताया कि, इस पूरे चोरी में संबंधित थाने को भी महीना जाता है। हालांकि यह ढाबा केवल नाम का ही है, बाकी यहां पूरे टैंकरों से तेल चोरी का कार्य किया जाता है।

पूरे प्रकरण की जांच कराई जायेगी और अगर इसमें किसी भी पुलिस कर्मी की मिलीभगत पाई गई तो उस पर सख्त कार्रवाई की जायेगी।
डीआईजी, प्रवीण कुमार

टंकी चाबी का खेल

ऑयल रिफायनरी से टैंकर निकलने पर पूरा तेल माप कर टैंकर के चैंबर को ताला लगा दिया जाता है, जिसकी चाबी या तो ऑयल कंपनी के अधिकारी के पास या तो पेट्रोल पम्प मालिक के पास होता है। फिर भी इसका भी तोड़ निकाल डाला है टैंकर ड्राइवरों ने। सूत्रों की माने तो चैंबर की दूसरी चाभी क्षेत्र में महज सौ से दौ सौ रुपए में बन जाते हैं।

अगर ऐसा हो रहा तो यह एक दण्डनीय अपराध है। प्रकरण की जांच एसपी क्रांइम से करवाकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।
दीपक कुमार, एसएसपी, लखनऊ

केमिकल के कारण पकड़ में नहीं आती चोरी

टैंकर की गाड़ी चाहे 12000 लीटर की हो या 20000 हजार लीटर की, फिर भी पेट्रोल पम्प पर यह टैंकर पहुंचने पर तेल का माप करने पर उतना ही तेल निकलता है। इस पूरी चोरी को छुपाने के लिए टैंकर ड्राइवर एक कैमिकल का इस्तेमाल करते है, जिसे टैंकर में भरे में तेल में हाई प्रेशर बन जाता है, जो पेट्रोल पम्प मैनेजर द्धारा मापने पर उतना ही तेल होता है, जितना पम्प मालिक डिमांड करता है।

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