अब गन्ने की खोई से चमकेंगे कपड़े

अब गन्ने की खोई से चमकेंगे कपड़ेजल्द ही लोग गन्ने की खोई से बने डिटर्जेंट का प्रयोग कर सकेंगे।

राजीव शुक्ला, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कानपुर। अभी तक कपड़े धोने के लिए रासायनिक डिटर्जेंट का प्रयोग होता है, लेकिन जल्द ही लोग गन्ने की खोई से बने डिटर्जेंट का प्रयोग कर सकेंगे।

कानपुर स्थित राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में गन्ने के अपशिष्ट (खोई) से डिटर्जेंट बनाने की तकनीक इजाद की गयी है। शोध के अंतिम चरण में काम किया जा रहा है। शोध कार्य पूर्ण होते ही यह पेटेंट भी करा लिया जाएगा। इस बारे में एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा में फूड एंड एडल्ट्रेशन में बीटेक कर रही अनुष्का अग्रवाल इस पर शोध कर रही हैं।

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अनुष्का बताती हैं, “मुझे नवबंर, 2016 में नेशनल शुगर संस्थान में प्रोजेक्ट वर्क के दौरान वहां के निदेशक नरेन्द्र मोहन ने खोई से डिटर्जेंट बनाने का काम दिया था। पांच महीने तक इस पर काम करने के बाद ये शोध पूरा होने वाला है। ये डिटर्जेंट दूसरों के मुकाबले बिल्कुल अलग होगा।”

अनुष्का आगे बताती हैं, “चार सौ ग्राम डिटर्जेंट तैयार होने में एक किलो महीन खोई लगती है और लगभग चार से पांच घंटे का समय लगता है। प्रक्रिया शुरू करने से पहले चीनी मिल से निकले गन्ने की खोई को दो से तीन दिन खूब सुखाया जाता है और पूरी तरह से सूख जाने के बाद उसे पीसकर महीन दाने में तब्दील किया जाता है।’अनुष्का ने बताया कि “दूसरे डिटर्जेंट के मुकाबले इसके इस्तेमाल से काफी अच्छा रहेगा।”

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