परिषदीय स्कूलों में आधी-अधूरी किताबों से पढ़ाई कर रहे छात्र

Khadim Abbas RizviKhadim Abbas Rizvi   6 Sep 2017 5:49 PM GMT

परिषदीय स्कूलों में आधी-अधूरी किताबों से पढ़ाई कर रहे छात्रफोटो विनय गुप्ता।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

जौनपुर। परिषदीय स्कूल की शिक्षा-व्यवस्था में सुधार करने का बड़े-बड़े दावे जिला स्तर से लेकर शासन तक किए जाते हैं, लेकिन यह सुधार कभी भी जमीनी स्तर पर नहीं होता है। इसकी एक बानगी आज हम आपको बताते हैं। परिषदीय स्कूलों की हालत यह है कि यहां पढ़ने वाले छात्रों को यूनिफॉर्म तो मुहैया करा दिया गया लेकिन उन्हें सबसे जरूरी चीज किताब नहीं मिली है। अब ऐसे में छात्र कैसे पढ़ेंगे और कैसे बढ़ेंगे। वहीं इससे यह साफ है कि परिषदीय स्कूल की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जो दावे किए जाते हैं। वह हवा-हवाई ही हैं।

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जिले में 2416 प्राथमिक विद्यालय में करी
ब 4 लाख 14 हजार 575 छात्र पंजीकृत हैं। इसी तरह जूनिनयर हाईस्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या एक लाख 26 हजार 740 है। इन छात्रों को पढ़ाने के लिए
जितने शिक्षकों की तैनाती की गई है। सरकार उनके वेतन पर 40 करोड़ रुपए खर्च करती है। जबकि छात्रों के यूनिफॉर्म पर भी काफी रुपए खर्च किए जाते हैं। इन सबके बावजूद यदि छात्रों को शिक्षा-दीक्षा न मिल पाए तो सवाल उठना ला
जमी है। सरकारी स्कूल का शिक्षण सत्र एक अप्रैल से शुरू हुआ था। इस लिहाज से आधा सत्र बीतने को है, लेकिन हैरत की तो यह बात है कि छात्रों को अभी तक किताबें ही नहीं मिल पाई हैं।

एजेंसी से किताबों की आपूर्ति देर से हुई है। इस वजह से किताबों का वितरण समय से नहीं हो सका। तेजी के साथ किताबें वितरित की जा रही हैं। जल्द ही सभी विद्यालयों में किताबें वितरित कर दी जाएंगी।
डॉ. सत्येंद्र सिंह, बीएसए

आपको बताते चलें कि जिले में कक्षा एक से पांच तक के छात्रों को किताब बांटने के लिए कि 1330307 किताबों की डिमांड की गई थी। यह किताबें जिला प्रशासन को उपलब्ध हो चुकी हैं, लेकिन जिला प्रशासन छात्रों के बस्ते तक किताबें पहुंचाने में नाकामयाब रहा है। इसी तरह कक्षा छ से लेकर आठ तक के छात्रों के लिए 1546696 किताबों की डिमांड के मुताबिक किताबें आ गईं लेकिन महज 835821 बच्चों तक ही किताब पहुंच सकी है। ऐसे में 28 लाख 46 हजार किताबों में से 13 लाख 39 हजार किताबें अभी बट नहीं सकी हैं। ऐसे में किस तरह से परिषदीय स्कूलों में शिक्षा—दीक्षा का कार्य हो रहा होगा यह बात समझना मुशिकल नहीं है। जबकि जिम्मेदार हैं कि उन्हें यह बात समझ में ही नहीं आ रही है।

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मछलीशहर ब्लॉक के करियांव गाँव निवासी विपुल सिंह (40वर्ष) ने बताया,“ बच्चों को यूनिफॉर्म तो उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन उन्हें किताबें नहीं मिली हैं। इससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। गुरुजी कहते हैं कि जल्द ही किताब मिल जाएगी। बच्चे पुरानी किताब से जैसे—तैसे पढ़ रहे हैं।”

धर्मापुर के पटखौली निवासी राजेंद्र (38वर्ष) का कहना है,“ पिछले वर्ष भी किताबें आधा सत्र बीत जाने के बाद ही मिली थी। इस वर्ष भी हाल कुछ ऐसा ही है। सरकार बदल गई लेकिन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है।”

एक नजर में

2416 प्राथमिक विद्यालय जिले में हैं।

878 है जूनियर हाईस्कूल की संख्या।

4 लाख 14 हजार 578 छात्र हैं प्राथमिक विद्यालय में

1 लाख 26 हजार 740 छात्र हैं जूनियर हाईस्कूलों में

1330307 किताबें जिला प्रशासन को मिली बांटने को

835821 किताबों का ही
अब तक किया जा सका वितरण

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