यूपी में एक लाख हेक्टेयर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा, हर थाने में दर्ज हैं 50 भू-माफिया

Rishi MishraRishi Mishra   26 April 2017 8:17 PM GMT

यूपी  में एक लाख हेक्टेयर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा, हर थाने में दर्ज हैं 50 भू-माफियाअकेले राजधानी में ही करीब पांच हजार हेक्टेयर सरकारी जमीन पर भू-माफिया का कब्जा है

उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन को कब्जों से मुक्त कराने के लिए सरकार ने एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स के गठन को मंजूरी दे दी है। बीजेपी ने चुनाव से पहले भी भू-माफिया पर शिकंजा कसने का वादा किया था, लेकिन सरकार के ये राह इतनी आसान नहीं होगी। पुलिस की शिकायतों और राजस्व अभिलेखों के मुताबिक यूपी में करीब एक लाख हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है, जबकि हर थाने में करीब 50 भू-माफिया दर्ज हैं।

लखनऊ। पहला केस मथुरा के जवाहर बाग में उद्यान विभाग की 250 एकड़ जमीन पर तीन साल तक रामवृक्ष यादव ने अपनी मर्जी का एक शहर बसा लिया था। पुलिस और प्रशासन के सामने ये अवैध कब्जा जारी रहा। आखिरकार हाईकोर्ट के आदेश पर जब पुलिस जवाहरबाग को मुक्त करवाने गई तब पुलिस और कब्जेधारियों की मुठभेड़ में 23 लोगों की मौत हो गई।

केस-दो लखनऊ के आशियाना में सपा सरकार के मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति और बंगला बाजार में शारदा प्रताप शुक्ला ने सरकारी जमीन पर कब्जा करके निर्माण किया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शारदा प्रताप शुक्ल का अवैध निर्माण आंशिक तौर पर हटाया गया। गायत्री प्रसाद प्रजापति के गुर्गों ने तीन मंजिला इमारत का निर्माण करवा दिया। सपा सरकार जाने के बाद अब एलडीए ने इस इमारत को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है।

ये दो केस तो बस बानगी भर हैं। प्रदेश में लगभग एक लाख हेक्टेयर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा है। राजधानी लखनऊ से लेकर सहारनपुर तक और बलिया तक कोई ऐसा जिला बाकी नहीं है, जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा न हो। पूरे प्रदेश में करीब एक लाख हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जे हैं। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में ये तथ्य दर्ज हैं। अकेले राजधानी में ही करीब पांच हजार हेक्टेयर सरकारी जमीन पर भू-माफिया का कब्जा है। भू-माफिया की सूची प्रत्येक थाने में है मगर यही भू-माफिया राजनीति करते हैं। कई जगह समाज सुधारक भी हैं। मगर इन पर एक्शन नहीं होता है।

राजधानी लखनऊ के गोमती नगर विस्तार में एक भू-माफिया जिनका नाम गोमती नगर थाने में बतौर भू-माफिया दर्ज है। वह कभी खुद को किसान नेता में तब्दील कर लेते हैं फिर विधानसभा चुनाव से पहले सपा का टिकट मांगने लगे थे। जनेश्वर मिश्र पार्क से गोमती नगर विस्तार जाने वाले रास्ते पर इस भू-माफिया ने करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जा कर के निर्माण करवा लिए हैं।

राजधानी के सभी एसडीएम और थाना प्रभारियों को अवैध कब्जे हटाने का निर्देश दिया गया है। सरकारी भूमि वह गाँव की हो या शहर की कहीं भी अवैध कब्जे नहीं होंगे। सरकारी जमीन को हर हाल में खाली करवाया जाएगा जिसमें पुलिस के सहयोग के लिए एसएसपी को भी लिख दिया गया है।
गौरीशंकर प्रियदर्शी, जिलाधिकारी

इसी तरह से विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े गोमती नगर में दो अन्य भू-माफिया भी ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा करके प्लाटिंग कर चुके हैं। इन मामलों में पुलिस ने केवल मुकदमे भर ही दर्ज किए। भू-माफिया अब भी सफेदपोश के तौर समाज में सज्जन बने घूम रहे हैं। गाँव मख्दूमपुर के प्रधान देवेश यादव बताते हैं कि, ग्राम समाज की जमीन पर भू-माफिया ने जमकर कब्जा किया है। विस्तार में इस तरह से करोड़ों की जमीन पर कब्जा किया गया है मगर प्रशासन से लेकर पुलिस तक के अफसर केवल मुट्ठी ही गर्म कर रहे हैं। कोई कार्रवाई नहीं।

कौन सी होती है सरकारी जमीन

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद भी माना करते थे कि गाँवों में से सबसे अधिक शिकायतें जमीन पर अवैध कब्जों की हैं। इसमें निजी और सरकारी दोनों तरह की जमीन शामिल हैं। सरकारी जमीन गाँव में ग्राम समाज, पंचायतों की जमीन होती है जबकि शहरों में नजूल और नगर निगम, विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद की अर्जित भूमि होती है। कई जगह ये भूमि जब खाली होती है तब रसूखदार इसको स्थानीय पुलिस और प्रशासन से मिल कर कब्जे में ले लेते हैं। पिछले 15 साल में इस तरह से प्रदेश में करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर लिया, जिसका परिणाम है कि एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया है।

माफ नहीं किया जाएगा माफिया

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने बताया कि हम जवाहर बाग मथुरा में सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्जे और उसके बाद में 23 मौतें हम भूले नहीं हैं। इस कब्जे को खाली कराने को लेकर हुई हिंसा और उसमें पुलिस अफसरों की शहादत को अब तक नहीं भूले हैं इसलिए एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स के गठन की चुनाव पूर्व घोषणा को अब अमली जामा पहनाया गया है। एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स, मंडल, जिला और तहसील के तीन स्तर पर काम करेगी। पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से शिकायतों का निस्तारण किया जाएगा। दो महीनेभर में प्रदेश के भू-माफियाओं को चिन्हित कर लिया जाएगा। भू-माफिया को अब माफ नहीं किया जाएगा।

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