योगी सरकार का प्लान : यूपी के किसानों को घाटे से बचाने के लिए इकट्ठा किया जाएगा फंड

योगी सरकार का प्लान : यूपी के किसानों को घाटे से बचाने के लिए इकट्ठा किया जाएगा फंडबढ़ जाएगी यूपी के किसानों की आमदनी

लखनऊ । कीमतें कम होने पर किसान आलू-प्याज जैसी फसलों को सड़कों पर फेंकने को मजबूर होते हैं। अभी हाल ही में किसानों ने कन्नौज से इटावा और शनिवार को लखनऊ विधान सभा और मुख्यमंत्री आवास के सामने भी आलू फेंककर विरोध किया। ऐसी परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश के किसानों की एक फंड से मदद की जाएगी। साथ ही, व्यापारी निर्धारित मूल्य से कम दाम पर किसानों के उत्पाद गाँवों में नहीं खरीद सकेंगे।

किसानों की आय बढ़ाने और उनके हितों को सुरक्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे गाँव कनेक्शन से विशेष बातचीत में उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने बताया, "फसल के मूल्य में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए एक मूल्य स्थायित्व फंड बनाने का प्रस्ताव है, जिसके जरिए उपज का एक मूल्य तय होने के बाद अगर बाजार में कीमतें कम हैं तो किसानों को इसी फंड से मदद के साथ-साथ मंडी में सुविधाएं दी भी दी जाएंगी।"

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इस प्रस्ताव की रूपरेखा तैयार हो गई है और जल्द ही इसे कैबिनेट में रखा जाएगा। किसानों की मदद के लिए प्रस्तावित यह फंड कैसे काम करेगा इस बारे में कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया, "जिस वक्त फसल उत्पाद की कीमतें ज्यादा होंगी उस वक्त इसका एक अंश इस फंड में जमा होगा, और जब कीमतें कम होंगी तब इसी फंड से हम किसानों को कुछ राहत दे सकेंगे।'' वह आगे समझाते हैं, "मान लीजिए आलू का 6 रुपए प्रति किलो एक रीजनेबल फिक्स रेट तय किया जाता है, जब बाजार भाव इस सरकारी भाव से अधिक होगा तो एक अंश फंड में जाएगा, और भाव इस स्थायी दर से कम होगा तो इसी फंड से किसानों को मदद की जाएगी।" किसानों के ट्रांजैक्शन को मंडियों में दर्ज़ किया जाता है, विभाग के पास किसानों का विवरण होता है। इसके जरिए किसानों को मदद देने में आसानी होगी।

फसल के मूल्य में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए एक मूल्य स्थायित्व फंड बनाने का प्रस्ताव है, जिसके जरिए उपज का एक मूल्य तय होने के बाद अगर बाजार में कीमतें कम हैं तो किसानों को इसी फंड से मदद के साथ-साथ मंडी में सुविधाएं दी भी दी जाएंगी।
राज प्रताप सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त, उत्तर प्रदेश

आगरा में सड़क किनारे आलू फेकते किसान

देश में किसानों की उपज के मूल्य को लेकर आ रही दिक्कतों के बारे में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा, "दो प्रकार की कमियां हमारी प्रणाली में हैं, पहला- मांग और आपूर्ति का कोई चक्रीय निर्धारण नहीं है, मांग हमें पता है, लेकिन कितना उत्पादन करा लेते हैं इसकी जानकारी नहीं होती, दूसरा-मात्र उत्पादन भर से ही किसान की समस्या का समाधान नहीं होगा, उपज के मूल्य में स्थायित्व जरूरी है।"

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छोटे किसानों को बिचौलियों की मनमानी और मंडियों तक उत्पाद लाने के झंझटों और अनावश्यक खर्चों से निजात दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार यह निर्धारित करेगी कि अगर किसान अपने खेत पर भी फसल बेचता है तो उसे वैधानिकता प्रदान की जाएगी।" देखा गया है कि ये व्यापारी अब तक समर्थन मूल्य से कम दाम किसानों की उपज गाँवों में खरीदते थे, जो नहीं कर पाएंगे। एक निर्धारित मूल्य के नीचे किसानों की उपज नहीं खरीदी जा सकेगी। इसके लिए मंडी अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।" राज प्रताप सिंह ने बताया, "निजी क्षेत्र की मंडियों की स्थापना भी की जाएगी, ताकि किसान इसके लिए स्वतंत्र होगा कि वह होलसेल से कम की चीज कहीं भी बेच सकता है।"

उत्तर प्रदेश में किसानों के सामने आने वाली समस्याएं और संकट का हल सुझाने के लिए सरकार ने किसान आयोग का गठन किया है, जो एक थिंक टैंक (विचारकों का समूह) की तरह काम करेगा। "प्रदेश सरकार की जितनी भी योजनाएं हैं उनका अध्ययन करके आयोग देखेगा कि कहां सुधार किया जा सकता है, जिससे किसानों का भला हो। योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कत कहां आती है, पूरा प्रयास यही है कि किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी की जाए। उत्पादन को बढ़ाने के साथ ही लागत मूल्य को कम करना, स्टोरेज को बढ़ाना, वैल्यू चेन (उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक) में जो किसान का शेयर काफी कम है उसे कैसे बढ़ाया जाए," कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया।

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किसान

किसानों की 36,000 करोड़ की ऋणमाफी को महत्वपूर्ण बताते हुए राज प्रताप सिंह ने कहा, "किसान अपना कर्ज नहीं चुका पा रहा था, इस वजह से बैंक से उन्हीं किसानों को पैसा नहीं मिल पा रहा था, जो एक बहुत बड़ी बाधा थी। ऋणमाफी से उस चक्र को दोबारा शुरू किया है। 36,000 करोड़ की मदद से बैंकों के पास पूंजी शक्ति आई, जिससे वह किसानों को फिर से कर्ज दे पाए। लाभ दोनों तरीके से किसान को ही मिला।"

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