वैज्ञानिक तरीके से करें शिमला मिर्च की खेती

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लखनऊ। सब्जियों मे शिमला मिर्च की खेती का एक महत्वपूर्ण स्थान है। आकार और तीखापन मे यह मिर्च से भिन्न होता है। इसमे मुख्य रूप से विटामिन ‘ए’ तथा ‘सी’ की मात्रा अधिक होती है। इसलिए इसको सब्जी के रूप मे उपयोग किया जाता है।

यदि किसान इसकी खेती उन्नत व वैज्ञानिक तरीके से करे तो अधिक उत्पादन एवं आय प्राप्त कर सकता है शिमला मिर्च उचित अंकुरण क्षमता, रोगाणुओं से मुक्त स्वस्थ बीज को पैदा करने के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान रखना आवश्यक है।

उन्नत प्रजातियां:

शिमला मिर्च की उन्नत किस्में कैलिर्फोनिया वण्डर, येलो वण्डर, किंग आफ नार्थ, स्वीट बनाना, बुलनोज, अर्का मोहिनी, अर्का गौरव, रूबी किंग आदि तथा पैपरीका की के.टी.पी.एल.-19 प्रचलित है। 

जलवायु

पहाड़ी क्षेत्रों में इसे गर्मियों के मौसम में तथा मैदानी भागों में गर्मी और बरसात में उगाते हैं। इसके पौधो कम गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह विकसित होते हैं। फसल पकाते समय शुष्क जलवायु उपयुक्त रहती है। बीज के अंकुरण के लिए 16-29 डिग्री सेल्सियस, पौध की अच्छी बढ़त के लिए 21-27 डिग्री सेल्सियस व फलों के उचित विकास और परिपक्वता के लिए तापमान 320 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होना चाहिए। 

भूमि चयन

उत्तम बीज तैयार करने के लिए हर वर्ष भूमि को बदलना चाहिए, अगर ऐसा सम्भव न हो सके तो यह सुश्चित कर लेना चाहिए कि चयन की हुई भूमि में पहले सोलेनेसी वर्ग की सब्जी जैसे टमाटर, बैंगन या उसका बीज उत्पादन न किया गया हो। साथ ही साथ भूमि में खरपतवार कम हों और सिंचाई व पानी के निस्कासन की उचित व्यवस्था हो और आस-पास के क्षेत्र में कोई दूसरी किस्म की मिर्च का उत्पादन न किया जा रहा हो।

खेत का आकार

खेत जहां तक सम्भव हो सके वर्गाकार होना चाहिए क्योंकि यांत्रिक मिश्रण की सम्भावना खेत की बाहरी पंक्ति में ज्यादा होती है। अर्थात आयताकार खेत की अपेक्षा वर्गाकार खेत से शुद्धता एवं ज्यादा बीज प्राप्त होता है। खेत में पौधारोपण करने से पूर्व पौधों को 8-10 घंटे पहले पानी की पौधाशाला में आवृति कर देने से पौधों का कठोरीकरण होना जरूरी है। 

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