वन माफियाओं पर लगेगी रासुका : वन मंत्री

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लखनऊ। प्रदेश में वन माफिया सक्रिय है, जंगलों में पेड़ों का कटान किया जा रहा है। रोकने पर वन माफिया जंगलों में आग लगा देते है। अफसर इस पर लगाम लगाने के लिए वन माफिया के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई करें। सरकार वन माफिया को रोकने के लिए विशेष बल के गठन की कवायद कर रही है। यह बात रविवार को विवांता ताज में जैव विविधता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव ने कही। 

उत्तर प्रदेश जैव विविधता बोर्ड और फिक्की की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने आगे कहा कि वन माफिया बेखौफ हो वनों को नुकसान पहुंचा रहे है।बेशकीमती लकड़ी और वन सम्पदा को क्षति पहुंचाने के साथ ही जंगलों में आग रहे है। उन्होंने उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग का जिक्र करते हुए कहा कि आग अभी पूरी तरह से बुझी नहीं है। गोरखपुर में भी वन माफिया सक्रिय थे, डीएम से कह कर कार्रवाई कराई गई।

उन्होंने कहा कि हमने कई बार वन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। प्रदेश के जन्तु उद्यान राज्यमंत्री एसपी यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार वन्य जीव संरक्षण पर काम कर रही है। पक्षी विहार बनाए जा रहे है, हरी पट्टियां विकसित की जा रही है। 

तालाबों की खुदाई कराई जा रही है। प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण व अध्यक्ष उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड संजीव संरन ने प्रदेश की जलवायु और भौगोलिक विविधता के परिणाम स्वरूप प्रदेश में पाई जाने वाली पक्षियों, तितलियों, मछलियों की प्रजातियों सहित प्रदेश की जैव विविधता का उल्लेख किया।

1995 से नदी-नालों की नहीं हुई सफाई

जन्तु उद्यान राज्यमंत्री एसपी यादव ने कहा कि प्रदेश में जल के प्राकृतिक स्त्रोत सूख रहे हैं। वन सम्पदा पर प्राकृतिक असर पड़ रहा है। वर्ष 1995 से वनों में नाली और नालों की सफाई नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा रखी है। हमारे लोगों ने इस विषय पर ठीक से अपना पक्ष नहीं रखा। उन्होंने आगे कहा कि वन क्षेत्रों में बोरिंग कराई जा रही है, पर ये प्राकृतिक स्त्रोत नहीं है। चेकडेम बनवा रहे हैं पर पानी की उलब्धता नहीं है। 

प्रदेश के पशुचिकित्सकों पर नहीं भरोसा

वन मंत्री ने प्रदेश के पशुचिकित्सकों की काबिलियत पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पशुचिकित्सकों को उन्हें भरोसा नहीं है। हाल में लॉयन सफाई में एक शेर की मौत का हवाला देते हुए कहा कि शेर को बचाने के लिए लंदन से चिकित्सक बुलाना पड़ा था, तब जाकर शेर की बीमारी पता चली।  

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