यूपी में महिला तस्करी का जाल

यूपी में महिला तस्करी का जालgaonconnection

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार सामने आ रहे तस्करी के मामलों की संख्या में एक और इज़ाफा हो गया। भुवनेश्वर से दिल्ली ले जाई जा रही दस लड़कियों को कानपुर रेलवे स्टेशन से छुड़ाया गया। इन लड़कियों के साथ दो तस्करों को भी पकड़ा गया है।

पुलिस तस्करी के मामले के तहत इस घटनाक्रम की जांच कर रही है। कानपुर पुलिस द्वारा शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर यह जानकारी दी गई।

कानपुर में जीआरपी प्रभारी नंदजी यादव ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि शुक्रवार रात उड़ीसा सप्तक्रांति एक्सप्रेस से कुछ लड़कियों को दिल्ली से ले जाया जा रहा है। रात करीब साढ़े नौ बजे संपर्क क्रांति एक्सप्रेस सेंट्रल स्टेशन पहुंची तो उसके जनरल कोच में 10 लड़कियां दो युवकों के साथ मिलीं। इनसे जब पूछताछ की गई तो वे सवालों के जवाब नहीं दे पाईं। 

इन दस लड़कियों में से छह बालिग और चार नाबालिग हैं। सभी लड़कियों को इनके घर का पता पूछकर इन्हें चाइल्ड लाइन के अधिकारियों के हवाले कर दिया गया, जबकि दोनों युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

कानपुर चाइल्ड लाइन निदेशक विनय कुमार ओझा ने बताया, “दस लड़कियों में छह लड़कियां बालिग थीं। इनके पास आधार कार्ड और सही जगह जाने का टिकट पाया गया तो इन्हें छोड़ दिया गया है। शेष चार लड़कियों के परिजनों के बारे में जानकारी की जा रही है।”

उत्तर प्रदेश में तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अभी 19 मार्च को ही वृंदावन में एक लड़की को बेचने के मामले का खुलासा पुलिस ने किया था। झारखंड की इस लड़की को अगवा करके वृंदावन के पांच लोगों से चालीस हजार रुपए में सौदा किया गया था।

इससे पहले भी कानपुर चाइल्डलाइन ने नवंबर 2015 में असम की पांच लड़कियों को पकड़ा था। विनय बताते हैं कि लड़कियों के साथ दो तस्कर भी पकड़े गए थे।

प्रदेश में सबसे अधिक तस्करी के मामले इंडो-नेपाल बार्डर से सामने आते हैं। बहराइच में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए संचालित संस्था देहात के संस्थापक जितेंद्र द्विवेदी बताते हैं, “यहां से बच्चों को तस्करी करके नेपाल भेजा जाता है। 25 नवंबर 2015 को नेपालगंज में पांच भारतीय बच्चों को पकड़ा गया।”

देश भर में होने वाले अपराध को दर्ज करने वाली संस्था एनसीआरबी की 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में मानव तस्करी की घटनाओं में 38.7 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। 

तस्कर ऐसे बनाते हैं बच्चों काे शिकार 

लखनऊ। प्रदेश में मानव तस्करी की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। इन बच्चों को तस्कर कैसे अपने चंगुल में फंसाते हैं, इसके बार में देहात संस्था के संस्थापक जितेंद्र बताते हैं, “स्थानीय स्तर पर तस्करों का गिरोह लोगों को नियुक्त करके प्रति बच्चे पैसा देता है। ये लोग परिजनों को झांसा देते हैं कि नेपाल की प्लेसमेंट एजेंसियों में इन बच्चों को पहले ट्रेनिंग और फिर नौकरी दी जाएगी। शुरुआत के दो तीन माह तक तो इन बच्चों की परिजनों से फोन पर बात होती है और ये लोग चार-पांच सौ रुपए परिजनों को देते हैं ताकि परिजनों को विश्वास रहे कि बच्चे ट्रेनिंग पर हैं।

कुछ माह बाद ही ये लोग परिजनों को बताते हैं कि आपके लड़के ने मालिक के यहां से 50 हजार चुरा लिए और भाग गया। नेपाल की पुलिस उसे ढूंढ रही है और आपने अगर पुलिस में शिकायत की तो आपको 50 हजार रुपए भरने होंगे। गरीब परिजन इस डर से शिकायत भी नहीं करते और बच्चा वहां तस्करी का शिकार हो जाता है।” देहात संस्था प्रदेश में मानव तस्करी को रोकने के लिए काम कर रही है।

बच्चों की तस्करी के लिए कोई कड़ा कानून नहीं

मानव तस्करी को रोकने के लिए केवल एक कानून इमोरल ट्रैफिकिंग एक्ट है। इस कानून के तहत देह व्यापार के उद्देश्य से ले जा रही लड़कियों को ले जाने वाले तस्करों पर कार्रवाई होती है। ये जानकारी देते हुए जितेंद्र बताते हैं कि वहीं अगर किसी बच्चे को तस्कर ले जा रहे हैं तो उसके लिए कानून नहीं है। श्रम विभाग के अधिकारी कहते हैं कि चाइल्डलाइन ने जिन बच्चों को पकड़ा है, ये कैसे सिद्ध हो पाएगा कि वे तस्करी करके लाए गए हैं, वो बेरोजगारी के कारण स्वेच्छा से भी काम करने आ सकते हैं।

प्रेम जाल में फंसा कर भी होती तस्करी

संस्था देहात के संस्थापक जितेंद्र द्विवेदी बताते हैं, “हाल ही में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें प्रेम प्रसंग में लड़की को फंसाकर तस्करों ने अपना शिकार बनाया है। तस्करों के गिरोह इसके लिए लड़कों को नियुक्त करते हैं और प्रति लड़की इसके लिए पैसा देते हैं। पुलिस भी ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं करती। पुलिस अगर तुरंत कार्रवाई करे तो इन लड़कियों को तस्करी से बचाया जा सकता है। चाइल्डलाइन ने इसके लिए इंडो-नेपाल चाइल्ड प्रोटेक्शन फोरम का गठन किया है जो बाल तस्करी, बाल श्रम और बाल विवाह पर अंकुश लगाएगा।

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