अमेरिका-चीन ट्रेड वाॅर से भारतीय किसानों को हो सकता है फायदा

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   8 Oct 2018 2:01 PM GMT

अमेरिका-चीन ट्रेड वाॅर से भारतीय किसानों को हो सकता है फायदा

लखनऊ। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वाॅर का फायदा भारतीय किसानों को मिलता दिख रहा है। ट्रंप ने चीन जाने वाली चीजों पर ज्यादा कर लगा दिया है, इसमें सोयाबीन भी शामिल है। ऐसे में सोयाबीन की डिमांड जहां चीन के बाजारों में बढ़गी तो वहीं भारत ने चीन से सफेद सरसों पर लगी पाबंदी को हटाने की मांग की है। अगर ऐसा होता है तो ये भारतीय किसानों के लिए राहतभरी खबर होगी।

चीन-अमेरिका के बीच छिड़ा ट्रेड वाॅर बढ़ता ही जा रहा है। इसका फायदा कहीं न कहीं भारतीय किसानों को भी होगा। चीन के बाजारों में भारतीय सोयाबीन की मांग बढ़ने के कयास लगाये जा रहे हैं। भारतीय बाजार में इस खबर का सार्थक असर दिख रहा। सोयाबीन की कीमत बढ़ती जा रही है। ऐसे में सोयाबीन के इस सीजन में किसानों को अच्छा दाम मिल सकता है तो वहीं ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि चीन अब भारत से सोयामील भी खरीदेगा। दूसरी ओर अच्छा मौका देखकर भारत ने चीन से सफेद सरसों पर लगे प्रतिबंध को भी हटाने की मांग की है।

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वहीं रविवार को सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा "चीन और अमेरिका के बीच जारी व्यापार युद्ध के मद्देनजर भारत जैसी कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के सामने बहुत बड़ा अवसर है। लिहाजा हमारी सरकार सोया खली और अन्य कृषि आधारित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की निरंतर कोशिश कर रही हैं।"

फोटो sopa.org से साभार

सोया खली वह उत्पाद है, जो प्रसंस्करण इकाइयों में सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचा रह जाता है। यह उत्पाद प्रोटीन का बड़ा स्त्रोत है। इससे सोया आटा और सोया बड़ी जैसे खाद्य उत्पादों के साथ पशु आहार तथा मुर्गियों का दाना भी तैयार किया जाता है। शेखावत ने एक सवाल पर आरोप लगाया कि कांग्रेस की अगुवाई वाली पूर्ववर्ती सरकारों ने तिलहन उत्पादक किसानों और प्रसंस्करण उद्योग के साथ "विश्वासघात" किया जिससे खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता बढ़ती चली गयी।

पिछले दिनों बीजिंग के भारतीय दूतावास में आहार विनिर्माताओं के साथ हुई एक बैठक में भारत ने चीन से सफेद सरसों के आहार पर भी लगाया गया सालों पुराना प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया है। अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच भारत कुछ खास कृषि वस्तुओं की बिक्री बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इस बैठक का आयोजन चीन स्थित भारतीय दूतावास में किया गया था। इस बैठक में हिस्सा लेने वाले सोया खाद्य के एक परचेजिंग मैनेजर और एक भारतीय अधिकारी के हवाले से रॉयटर्स ने यह खबर की है।

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रायटर्स इन दोनों से बातचीत के आधार पर लिखता है कि इस बैठक का उद्देश्य चीन को सफेद सरसों के आहार की खरीद बहाली के लिए तैयार करना था ही साथ में के अन्य प्रमुख कृषि उत्पादों में चीन की दिलचस्पी बढ़ाना भी लॉबी का उद्देश्य है। चीन ने 2011 में गुणवत्ता संबंधी कारणों से भारत से सफेद सरसों लेना बंद कर दिया था। उससे पहले चीन भारत के सफेद सरसों का सबसे बड़ा खरीदार था। 2011 में चीन ने 16.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भारतीय तिलहन आयात किया था।

चीन में सोयाबीन का सबसे ज्यादा उपयोग पशु आहार बनाने में किया जाता है। अमेरिका ने पिछले साल चीन को कृषि उत्पादों में सबसे ज्यादा सोयाबीन ही एक्सपोर्ट किया था जो लगभग 12.7 अरब डॉलर था। ऐसे में अब जबकि दोनों देशों के बीच ट्रेड वार चल रहा था तो चीन सोयाबीन का विकल्प ढूंढ रहा है। चीन में सफेद सरसों को पशु आहार के रूप में पहले भी प्रयोग में लिया जाता रहा है।

जुलाई में चीन ने भारत सहित पांच एशियाई देशों के सोयाबीन, सोयामील और सफेद सरसों से शुल्क हटा दिया था। 2011 में चीन ने भारतीय उत्पाद की गुणवत्ता पर सवालियां निशान लगा दिए थे। उनका तर्क था कि भारत से आयी खेपों में मैकलाइट ग्रीन मिला हुआ है जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।

फोटो sopa.org से साभार

सोयाबीन का इस्तेमाल पशु आहार बनाने में किया जाता है। पिछले साल यह चीन को किया जाने वाला अमेरिका का सबसे बड़ा कृषि उत्पाद था जिसका मूल्य 12.7 अरब डॉलर था। चीन पशु आहार की सामग्री के सफेद सरसों जैसे वैकल्पिक स्रोत भी तलाश रहा है। सोया खाद्य के एक परचेजिंग मैनेजर ने कहा कि जुलाई में चीन ने भारत समेत पांच एशियाई देशों के सोयाबीन, सोया खाद्य और सफेद सरसों से शुल्क हटा दिया था। लेकिन चीन का घरेलू आहार उद्योग अब भी भारतीय उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर चिंतित है। मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत न होने की वजह से उन्होंने अपनी पहचान उजागर करने से इनकार कर दिया। दरअसल जांच में कुछ खेपों को मैलकाइट ग्रीन से दूषित पाए जाने के बाद चीन ने आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह एक रंग होता है जिसका इस्तेमाल भारत में अनाज की बोरियों पर छाप के लिए किया जाता है।

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वर्ष 2015-16 में भारत में 6820 किलो टन सफेद सरसों की पैदावार हुई थी। इसकी सबसे ज्यादा पैदावार राजस्थान में होती है। हरियाण, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और वेस्ट बंगाल में भी सफेद सरसों की अच्छी खासी पैदावार होती है। वहीं 2016-17 में भारत में 13 मिलियन टन सोयाबीन की पैदावार हुई थी। सोयाबीन पैदावार के मामले में मध्य प्रदेश अव्वल है, इसके बाद राजस्थान और महाराष्ट्र का नंबर आता है। हालांकि बारिश के कारण इस साल सोयाबीन की पैदावार घटने की आशंका जतायी जा रही है।

बढ़ सकता है सोयाबीन का एक्सपोर्ट

राजस्थान के एग्री एक्सपर्ट विजय सरदाना कहते हैं "इसमें कोई दो राय नहीं है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वार का फायदा भारतीय किसानों को होगा। इस खबर के आने के बाद कमोडिटी में सोयाबीन की कीमतें पांच फीसदी तक बढ़ गयी हैं। और आने वाले समय किसानों की आमदनी दोगुनी तक हो सकती है। अभी ये तो निश्चित नहीं है कि चीन हमसे कितना सोयामील खरीदेगे लेकिन देश का सोयाबीन एक्सपोर्ट बढ़ेगा। वहीं इंदौर में मौजूद सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन यानी सोपा के चेयरमैन देविश जैन ने कहते हैं "भारत 2 मिलियन टन सोया उत्पाद और लगभग इतना ही रेपसीड चीन को सप्लाय कर सकता है। ये भारतीय सोयाबीन किसानों के लिए बहुत लाभकारी होने वाला है।"


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