पशुओं को अब वर्ष में दो बार ही लगेंगे टीके, सरकार को भी होगा करोड़ों की बचत

Diti BajpaiDiti Bajpai   17 April 2019 11:14 AM GMT

पशुओं को अब वर्ष में दो बार ही लगेंगे टीके, सरकार को भी होगा करोड़ों की बचत

लखनऊ। पशुओं को खुरपका- मुंहपका (एफएमडी) और गलाघोटू (एचएस) की बीमारी से बचाने के लिए पहले साल में चार बार टीका लागाया जाता था, लेकिन अब दो बार ही टीकाकरण कराया जाएगा। इससे पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा साथ ही सरकार को भी करोड़ों का फायदा होगा।

केंद्रीय राज्य कृषि मंत्री कृष्णा राज ने इस टीके को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप मे हरियाणा राज्य में प्रयोग करने की अनुमति दी है। पशुपालन विभाग, हरियाणा में उपनिदेशक सुखदेव राठी ने फोन पर गाँव कनेक्शन को बताया, "टीकाकरण अभियान में पहले एफएमडी का टीका उसके एक महीने बाद एचएफ का टीका लगता था लेकिन इस दोनों को एक में ही किया गया है। आधे टीके लगाए भी जा चुके है मई तक पूरे राज्य में इसको लगा दिया जाएगा। इससे पशुपालकों को लाभ हो रहा है और मेनपावर भी कम हुई है।"

अपनी बात को जारी रखते हुए राठी ने आगे बताया, "भारत सरकार द्वारा यह प्रोजेक्ट पशुपालन विभाग को मिला है और सिर्फ हरियाणा राज्य है जहां इस टीके का प्रयोग किया जा रहा है। मई के बाद सिंतबर में इस टीके को पशुओं को लगाया जाएगा।"


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हरियाणा राज्य के पशुपालन विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक पूरे राज्य में 90 लाख पशुओं की संख्या है। इस टीके से होने फायदे के बारे में हरियाणा राज्य के पंचकुला जिले के पशुचिकित्सा संद्य के अध्यक्ष डॉ चिरतन काडियन ने बताया, "पहले पशुओं को एफएमडी का टीका लगता है जिससे उनमे बुखार और कमजोरी आती है और दूध उत्पादन घट जाता है उसके एक महीने बाद एफएमडी का टीका लगता है तो भी उत्पादन में कमी आती है ऐसे में इस टीके से पशु मालिकों को लाभ मिलेगा।"

चिरतन के मुताबिक टीका लगने से पशुओं में औसत 15 किलो प्रतिदिन के हिसाब से साल में चार बार में 60 किलो दूध का नुकसान होता है। इससे 30 किलो दूध किसान का बच सकेगा।

खुरपका-मुंहपका एक संक्रामक रोग है जो विषाणु द्वारा फैलता है। इसमें पशु के मुंह और पैंरों में घाव हो जाते हैं, जिससे पशुओं को काफी दिक्कत होती है और पशु दूध देना भी बंद कर देता है। इस बीमारी से पशुओं की मौत भी हो जाती है। यह बहुत तेजी से फैलने वाला रोग है अगर इस बीमारी को समय पर न रोका जाए तो बड़ी संख्या में पशु प्रभावित होते हैं। इसी तरह गलाघोटू बीमारी है इस रोग से ग्रसित पशुओं के गले में सूजन में आ जाती है और पशु को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। इस बीमारी से भी पशुओं की मौत हो जाती है।

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इन दोनों बीमारियों से पशुओं को बचाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा पूरे देश में वर्ष में चार बार टीकाकरण किया जाता है। इस संयुक्त टीके से अब साल में दो बार टीका लगाया जाएगा। जिससे काफी लाभ होगा। पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रयोग हो रहे इस टीके का प्रयोग अगर सफल रहा तो पूरे देश में खुरपका-मुंहपका और गलाघोटू बीमारी का एक ही टीका लगाया जाएगा।

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक सुखदेव बताते हैं, "टीके में जो सीरिंज और निडिल का इस्तेमाल होता है वह भी आधा होगा, जिससे सरकार को काफी फायदा होगा। वर्ष में चार बार होने इस टीकाकरण अभियान में सरकार करोड़ो रुपए का खर्च करती है और विभाग के कर्मचारी पूरे वर्ष इस टीकाकरण अभियान में व्यस्त रहते है। दो बार टीके से इन सभी से लाभ मिलेगा।


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