जलीय खरपतवार साल्विनिया मोलेस्टा से छुटकारा दिलाएगा छोटा सा कीट

तालाब में फैलने वाले जलीय पौधों यानी खरपतवार से लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है, इन्हीं में से साल्विनिया मोलेस्टा भी है, जिसे जितना तालाब से हटाया जाता है उतना ही बढ़ते जाते हैं। वैज्ञानिकों ने इससे भी निजात पाने का तरीका ढूंढ लिया है।

Divendra SinghDivendra Singh   22 Dec 2021 1:25 PM GMT

जलीय खरपतवार साल्विनिया मोलेस्टा से छुटकारा दिलाएगा छोटा सा कीटतालाब से इसे जितना ही निकालते हैं उतनी तेजी से ही यह बढ़ता है। सभी फोटो: विकीपीडिया कॉमन्स

कई साल पहले गाँव के तालाब में किसी ने इस पौधे को डाल दिया है, कुछ ही साल में इस पौधे ने पूरे तालाब पर कब्जा कर लिया। गाँव के लोगों ने कई बार इसे निकालने की कोशिश की लेकिन जितना इसे निकालते उतना ही यह बढ़ता जाता। लोगों को लगा कि साल्विनिया मोलेस्टा नाम के इस जलीय पौधे से छुटकारा नहीं मिलेगा।

मध्य प्रदेश के कटनी जिले के पड़ुआ गाँव में लगभग 53 एकड़ का तालाब है, जिस पर साल्विनिया मोलेस्टा (Salvinia molesta) ने कब्जा कर लिया था। गाँव के सरपंच राजेश पटेल बताते हैं, "हमारे गाँव में लगभग 53 एकड़ का तालाब है, जो हमारे बहुत काम आता है, जानवरों को पानी पिलाना हो या फिर दूसरे कई काम हमें तालाब से बहुत मदद मिलती है। कई साल पहले गाँव के ही किसी ने चाइनीज झालर (साल्विनिया मोलेस्टा) को पानी में डाल दिया कि यह जानवरों की दवाई के काम आती है।"


वो आगे कहते हैं, "शुरू में तो ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे पूरे तालाब में यह बढ़ गई, ये इतना ज्यादा बढ़ गई थी कि समझिए अगर एक लोटा पानी भी तालाब से निकालना है तो ये उसके साथ आ जाता था। बहुत बार सबने मिलकर इसे साफ भी किया, लेकिन जितना साफ करते उतना ही यह बढ़ती जाती।"

साल्विनिया मोलेस्टा, को आमतौर पर 'वाटर फर्न' के रूप में जाना जाता है, इसे लोग चाइनीज झालर भी कहते हैं। यह दक्षिण-पूर्वी ब्राजील मूल का एक आक्रामक और तेजी से बढ़ने वाला खरपतवार है। पिछले 60 वर्षों के दौरान, यह दुनिया भर में तेजी से फैल गया है और इसे दुनिया की 100 सबसे खराब प्रजातियों की सूची में शामिल किया गया है।

कटनी के इस गाँव में फैले साल्विनिया मोलेस्टा के बारे में मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित खरपतवार अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों को पता चला। खरपतवार अनुसंधान निदेशालय के प्रधान वैज्ञानिक डॉ सुशील कुमार बताते हैं, "यह मूल रूप से ब्राजील में पाया जाता है, पिछले कई दशक में यह भारत ही नहीं पूरी दुनिया में पहुंच गया है, यह बहुत तेजी से बढ़ने वाला पौधा है।"


वो आगे कहते हैं, "शुरू में यह दक्षिण भारत के केरल और दूसरे राज्यों में देखा गया था, लेकिन पिछले कुछ साल में यह ओडिशा, उत्तराखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में देखा गया है। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भी पता चला कि यह वहां तालाब में पूरी तरह से बढ़ गया है। लोगों ने बताया कि इसे जितना भी हटाते हैं, उतना बढ़ता जाता है।"

वैज्ञानिकों ने साल्विनिया मोलेस्टा को हटाने के लिए एक प्रभावी बायो एजेंट सिर्टोबैगस साल्विनी (Cyrtobagous salviniae) की मदद ली, यह भी मूल रूप से ब्राजील में पाया जाता है। कटनी के पड़ुआ गाँव में तालाबा में दिसंबर, 2019 सिर्टोबैगस सालिविनिया के 2,000 कीट छोड़े गए।

डॉ सुशील कुमार बताते हैं, "बहुत से ऐसे खरपतवार होते हैं, जिन्हें खत्म करना आसान नहीं होता है। क्योंकि साल्विनिया मोलेस्टा सबसे पहले केरल में देखा गया था तो वहां पर इसे हटाने के लिए इस बायो एजेंट की मदद ली गई थी। हम बैंगलूरू से कुछ कीट को ले आए और यहां पर इसे और बढ़ाया। फिर इसे हमने कटनी के तालाब में डाल दिया, कुछ महीनों में पूरा तालाब साफ हो गया।"


सिर्टोबैगस साल्विनी की खासियत बताते हुए डॉ कुमार कहते हैं, "इस कीट की खासियत यह होती है, यह सिर्फ साल्विनिया मोलेस्टा को खाकर ही जिंदा रहता है, यह भूखा मर जाएगा, लेकिन दूसरा कुछ नहीं खाएगा, कुछ कीट डाल देने पर धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती जाती है और कुछ ही महीनों में पूरा तालाब साफ कर देते हैं।"

बायो-एजेंट छोड़ने के बाद, यह तालाब में धीरे-धीरे बढ़ते हैं। कटनी के तालाब में शुरू के 6 महीने तक, हमले के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे कीट की आबादी बढ़ती गई। 11 महीनों में बायो-एजेंट बढ़कर 125 वयस्क प्रति वर्ग मीटर हो गई और खरपतवार में कमी आने लगी।

शुरू के आठ महीनों में 50 प्रतिशत तक खरपतवार नष्ट हो जाता है, बाकी 80 प्रतिशत 11 महीनों में और 18 महीनों में पूरी तरह से साल्विनिया मोलेस्टा का नामोनिशान मिट गया। मध्य भारत साल्विनिया मोलेस्टा का जैविक नियंत्रण का यह पहला सफल उदाहरण है।

डॉ सुशील कुमार बताते हैं, "इसके साथ ही बैतूल के सतपुड़ा झीन भी इसे देखा गया है, हम वहां भी इसे हटाने वाले हैं। इसलिए हम अलग-अलग राज्यों में भी लोगों से बात कर रहे हैं। वैसे तो एक कीट की कीमत आठ रुपए है, लेकिन संस्थाओं की मदद से हम इसका नियंत्रण कर रहे हैं। इसकी सबसे खास बात होती है, ये तेजी से बढ़ते भी रहते हैं।

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के सतपुड़ा झील में भी यह चाइनीज झालर यानी साल्विनिया मोलेस्टा तेजी से फैल गया है। बैतूल, हरदा, हरसूद क्षेत्र के सांसद दुर्गादास उइके ने लोकसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था।

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