भारत में कम हुआ बाल फिल्मों का निर्माण

भारत में कम हुआ बाल फिल्मों का निर्माणgaonconnection

लखनऊ। पिछले दिनों नागेश कुकुनूर फिल्म आयी थी ‘धनक’, जिसमें दो भाई-बहन की कहानी को दिखाया गया था। इस फिल्म में बहन अपने भाई की आंखों की रोशनी के लिए उसे लेकर राजस्थान जाती है। फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया। हालांकि अब बॉलीवुड में बाल फिल्में कम हो गई हैं।वहीं हॉलीवुड में बच्चों की फिल्में बड़े भी खूब पसंद करते हैं।

फिल्म निर्माता नागेश कुकुनूर ने एक कार्यक्रम में कहा था, “भारत में जब हम बाल फिल्म बनाते हैं तो हम यह कहकर उसे गिरा देते हैं कि इसे केवल बच्चे ही देख सकते हैं। वहीं पश्चिमी देशों में वयस्क भी बाल फिल्मों का आनंद लेते हैं।”

इस साल हॉलीवुड में कुंगफू पांडा-3, जंगल बुक, एंग्री बर्ड्स, जैसी कई फिल्में आईं लेकिन बॉलीवुड में अब तक सिर्फ धनक ही है। आइए बात करते हैं कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में जो बच्चों के साथ बड़ों को भी पसंद भी आयी थी।

नन्हें जैसलमेर को भी बच्चों ने किया था पसंद

बच्चों की फिल्मों की फेहरिस्त काफी लंबी है। चेन कुली की मेन कुली, हनुमान, बाल गणेश, नन्हें जैसलमेर जैसी कई फिल्में हैं, जिन्हें बच्चों के साथ बड़ों ने भी खूब पसंद किया। सच तो ये है जिस तरह बच्चों की फिल्में नहीं आ रही हैं अब निर्माता और निर्देशक भी इनपर दांव नहीं लगाना चाहते हैं। भविष्य में बच्चों की फिल्मों का यह दौर जारी रहेगा या नहीं, यह बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि इन फिल्मों को कितनी सफलता मिलती है।

 जाजंतरम मामंतरम (2003)

प्रसिद्ध लेखक जनाथन स्विफ्ट के उपन्यास गुलिवर ट्रवेल्स पर आधारित फिल्म जाजंतरम मामंतरम भले ही बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल न दिखा पाई हो लेकिन बच्चों ने इस खूब पसंद किया। इस फिल्म में जावेद जाफरी एक दूसरे टापू पर पहुंच जाते हैं, जहां पर बहुत छोटे कद के लोग होते हैं।

मिस्टर इंडिया (1987)

साल 1987 में आई फिल्म मिस्टर इंडिया बड़ों के साथ ही बच्चों को भी पसंद आई थी। अनिल कपूर और श्रीदेवी अभिनीत इस फिल्म में अनिल कपूर अनाथ बच्चों को अपने घर में रखते हैं। तभी उनके हाथ गायब करने वाली घड़ी आ जाती है, बस वहीं से मिस्टर इंडिया की शुरुआत होती है। इस फिल्म को आए तीस साल हो गए हैं लेकिन आज भी ये खूब पसंद की जाती है। फिल्म में अनिल कपूर के साथ अमरीश पुरी का मोगैंबो का किरदार भी बहुत लोकप्रिय हुआ था।

मकड़ी (2002)

विशाल भारद्वाज के निर्देशन में साल 2002 में फिल्म मकड़ी आई थी। इस फिल्म में शबाना आजमी, मकरंद देशपांडे और श्वेता प्रसाद ने अभिनय किया था। शबाना आजमी ने डायन का किरदार निभाया था। वहीं श्वेता ने चुन्नी और मुन्नी जुड़वा बहनों का किरदार निभाया था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे आज के समय में भी लोग चुड़ैलों और जादू-टोने पर विश्वास करते हैं। 

तारे जमीन पर (2007)

2007 में आई अमोल गुप्ते की ‘तारे जमीन पर’ ईशान अवस्थी (दर्शील सफारी) की कहानी है। ‘तारे जमीन पर’ ईशान अवस्थी की कहानी है, जो स्कूल से नफरत करता है। उसके घरवाले उसे बोर्डिंग स्कूल में भेज देते हैं, जहां पर उसे आर्ट टीचर के रूप आमिर खान मिलते हैं। जहां उसे पता चलता है कि ईशान को डिक्लेक्सिया नाम की बीमारी है। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

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