बज़ट आने पर भी नहीं हुई खेलकूद प्रतियोगिताएं

बज़ट आने पर भी नहीं हुई खेलकूद प्रतियोगिताएंगाँव कनेक्शन

प्रतापगढ़। गाँवों में प्रतिभाओं को निखारने के लिए हर वर्ष ब्लॉक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता की जाती है, विभाग की लापरवाही से इस वर्ष ग्रामीण खेलों का आयोजन ही नहीं हो पाया। जबकि जिला योजना की तरफ से बजट भी आ चुका है।

जिला मुख्यालय ये लगभग 25 किमी दक्षिण में मानधाता ब्लॉक के खरवई गाँव के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की लड़कियां भी हर वर्ष ब्लॉक स्तरीय खेल में हिस्सा लेती हैं, इस वर्ष अभी तक खेल का आयोजन ही नहीं हुआ। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाध्यापिका गुंजन सिंह बताती हैं, ''हर वर्ष ब्लॉक में खेल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, जिसमें हमारे विद्यालय की भी लड़कियां जाती हैं, लेकिन इस बार अभी तक कोई सूचना ही नहीं मिली।" 

इस बार जिले के 17 ब्लॉकों में से किसी भी ब्लॉक में खेलकूद का आयोजन नहीं हुआ। वित्तीय वर्ष में जिला योजना से 4.15 लाख रुपये मिले हुए हैं। यह धनराशि युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न विधाओं में खेलकूद का आयोजन करने के लिए दी गई है, लेकिन अधिकारी इसको अभी तक खर्च नहीं कर सके हैं। जिले के इंटर कॉलेजों में होने वाले वार्षिक खेलकूद के परिणाम की सूची लेकर विभागीय अधिकारी अपने विभाग से प्रतियोगिता कराने का दावा कर रहे हैं।

राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में ग्यारवीं पढ़ने वाली शालिनी सिंह कई प्रतियोगिताओं में खेल चुकी हैं, शालिनी बताती हैं, ''हर बार ब्लॉक में हम लोग खेलने जाते हैं, लेकिन इस बार कहीं नहीं ले जाया गया, स्कूल में भी स्पोर्ट्स टीचर नहीं है। 

खेलकूद प्रतियोगिता न आयोजित होने के बारे में जिला युवा कल्याण अधिकारी डीपी चौरसिया कहते हैें, ''इस वर्ष बजट नहीं मिलने के कारण खेलकूद प्रतियोगिताएं नहीं हो पाई हैं। जिला योजना से जो धनराशि मिली है, उसे खर्च करने की योजना बनाई जा रही है। जल्द ही ब्लॉक स्तरीय खेलों का आयोजन किया जाएगा।" 

भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार द्वारा साल 2008-09 से संयुक्त रूप से पंचायत युवा क्रीड़ा और खेल अभियान पायका योजना संचालित थी जिसमें प्रदेश के सभी जि़लों की ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायत स्तर पर खेल मैदानो का विकास कर खेल गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना था। लेकिन भारत सरकार द्वारा यह योजना मार्च 2014 से बन्द कर दी गयी है और इसके स्थान पर एक अप्रैल 2014 से राजीव गांधी खेल अभियान योजना की शुरुआत की गयी। 

पायका योजना के तहत जिले के 1105 ग्राम पंचायतों में एक-एक क्रीड़ाश्री की नियुक्ति की गई थी। खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए इन लोगों को मानदेय भी दिया जाता था। मगर योजना बंद होते ही क्रीड़ाश्री भी बेकार हो गए। राजीव गांधी खेल अभियान योजना के तहत ब्लाकों में एक-एक स्टेडियम बनाए जाने थे। स्टेडियम के लिए 6.6 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी, लेकिन किसी भी ब्लॉक में जमीन नहीं मिली। इसलिए किसी भी ब्लॉक में स्टेडियम नहीं बन पाये हैं।

ब्लॉक में स्टेडियम न बनने के बारे में मानधाता ब्लॉक के खण्ड विकास अधिकारी साहबराज सिंह कहते हैं, ''ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देने के लिए ब्लॉक में स्टेडियम बनने थे, लेकिन इतनी जमीन ही नहीं मिल पायी, जहां स्टेडियम बन पाता।" 

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