डॉक्टर और इंजीनियरिंग स्टूडेंट का अनोखा वेलैंटाइन-डे

डॉक्टर और इंजीनियरिंग स्टूडेंट का अनोखा वेलैंटाइन-डेgaon connection, jeev aashrya

लखनऊ। जब विश्व में करोड़ों युवा हाथ में गुलाब लेकर अपने प्रेमी-प्रेमिकाओं से प्यार का इज़हार कर रहे थे, वहीं पर लखनऊ के कुछ लड़के-लड़कियां हाथ में हंसिया लेकर बरसीम काट रहे थे। मनाया तो उन्होंने भी वेलेनटाइन डे, लेकिन बेजुबान, बीमार जानवरों के साथ।

जिला मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर पश्चिम दिशा में बेसहारा जानवरों के आश्रय गृह, जीवाश्रय में रविवार को मेले का माहौल था। कई स्कूल-कॉलेजों के बच्चे सुबह ही जीवाश्रय में  पहुंच गये थे। बच्चों ने वहां पहुंचकर वहां के लोगों का काम संभाल लिया, उसके बाद जानवरों को चारा देने से लेकर, खेत में जाकर हरा चारा काटने काम उन्हीं लोगों ने किया।

जीवाश्रय के मुख्य सचिव यतिंद्र त्रिवेदी बताते हैं,  ''वेलेनटाइन डे और रविवार दोनों एक ही दिन पड़ गये हैं, आज के दिन लोग या तो घर पर बिताते या फिर कहीं बाहर जाकर, हम ने इंजीनियरिंग कॉलेज, सरस्वती डेंटल कॉलेज और आर्मी स्कूल जैसे कई संस्थानों को अपने कार्यक्रम की जानकारी एक दो दिन पहले ही दे दी थी। कई छात्र-छात्राओं ने इसमें रुचि दिखाई थी।"

वो आगे कहते हैं, ''रविवार सुबह से ही लड़के-लड़कियां आने लगे और हमारे रोज दिनचर्या में हमारी मदद करने लगे हैं और हमारी उम्मीद से ज्यादा लोग आए हैं।"

लखनऊ से फैज़ाबाद रोड पर स्थित सरस्वती डेंटल कालेज में पहले साल में पढऩे वाली सुभ्रा सिंह (20 वर्ष) अपनी दो और दोस्तों के साथ के साथ आयी हुई थीं। खेत में बरसीम काटते हुए सुभ्रा सिंह कहती हैं,  ''मैं आगरा की रहने वाली हूं लखनऊ आने से पहले ही दो साल से फेसबुक पर जीवाश्रय को देखती आ रही थी, कभी मौका ही नहीं मिला था यहां पर आने का। लेकिन आज ये मौका मिला।”

लखनऊ के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में बलिया जि़ले के राहुल यादव बीटेक के पहले साल में हैं। राहुल यादव कहते हैं, ''हमारे साथ के कई लोग यहां पहले भी आते रहते हैं। इन बेजुबानों की सेवा करके बहुत सुकून मिलता है।”

सरस्वती डेंटल कालेज में ही प्रथम वर्ष की छात्रा नंदिनी पंत (21 वर्ष) नैनीताल से हैं और उनके साथ की कृष्णा शर्मा असम से लखनऊ आयी थीं। नंदिनी पंत बताती हैं, ''हम लोग अक्सर होटलों में अक्सर पार्टी करन जाते रहते हैं। लेकिन अब हम महीने में एक बार यहां भी आया करेंगे। यहां जानवरों के लिए काम करके बहुत अच्छा लगा।"

इस दौरान जीवाश्रय के डॉक्टरों ने दो घंटें की वर्कशाप में जानवरों के प्राथमिक उपचार के बारें में जानकरी दी, ताकि वक्त पड़ने पर लोग जानवरों की मदद कर सकें।

जीवाश्रय नादरगंज में 54 एकड़ में बना हुआ है। ये सैकड़ों भटके और आवारा पशुओं के लिए एक ठिकाना हैं और उनके रहने के लिए बाड़े बनाए गए हैं। जीवाश्रय में गाय, सांड़, कुत्ते, बंदर जैसे लगभग 1500 जानवर रखे गए हैं, जिनकी देखभाल यहां के कर्मचारी करते हैं।

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