बच्चों के साथ होने वाले 95 फीसदी यौन अपराधों में वो आरोपी को पहचानते हैं

बच्चों के साथ होने वाले 95 फीसदी यौन अपराधों में वो आरोपी को पहचानते हैंज्यादातर बाल अपराधों में बच्चों के जानने वाले ही करते हैं उनके साथ जबरदस्ती।

मेरठ के एक गाँव में कक्षा आठ में पढ़ने वाली रचना (बदला हुआ नाम) सरकारी स्कूल में पढ़ती थी, एक दिन अचानक वो चीख चीख कर रोने लगी तो टीचर परेशान हो गए। बहुत देर पूछने के बाद रचना ने जो बात बताई उससे हर कोई हैरान हो गया। रचना ने बताया कि उसके खुद के पिता उसके साथ जबरदस्ती करते हैं वो भी सालों से।

स्कूल की प्रधानाध्यापिका रंजीत कौर को रचना ने बताया कि वो पांच भाई बहन हैं वो सबसे बड़ी है। उसकी मां गर्भवती थीं इसलिए मायके चली गई थीं तब उसके पिता ने उसके साथ बलात्कार किया। महीनों ऐसा होता रहा जब मां वापस आईं तो मुझे लगा अब ऐसा नहीं होगा लेकिन मेरे पिता ने मुझे धमकी दी कि अगर मैं उन्हें बताऊंगी तो वो मेरे भाई बहनों को काट के फेंक देगें। रचना के पिता उसकी मां को खेत पर भेज देते थे और फिर उसके साथ जबरदस्ती करते थे।

एनसीआरबी की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक बलात्कार के जारी आंकड़े कहते हैं कि, “2016 में 94.6% बलात्कार केस में आरोपी- भाई, पिता, दादा, बेटा या परिचितों सहित पीड़ित के रिश्तेदार ही हैं।” देश में पिछले साल रेप के कुल 38,947 मामले दर्ज किए गए, इनमें से 36,859 मामलों में रेप करने वाले अपने ही थे।

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इस तरह के अपराधों के बढ़ने पर लखनऊ की बाल संरक्षण अधिकारी आसमां जुवैद बताते हैं, “इन घटनाओं से बच्चों को बचाने के लिए हम कई तरह के प्रोग्राम चला रहे हैं। स्कूलों में जाकर उन्हें गुड टच बैड टच की जानकारी देते हैं।” इसके अलावा बच्चों को सेक्स एजुकेशन की जानकारी भी जरूरी है ये निश्चित कर लें कि ये किस स्तर तक हो लेकिन इससे उनमें जागरुकता आएगी।”

साल 2012 में पोक्सो अधिनियम एवं 2013 में आपराधिक कानून ( संशोधन) अधिनियम के लागू होने के बाद बाल यौन उत्पीड़न एवं बलात्कार के अधिक मामले दर्ज हुए हैं। पोक्सो के तहत दर्ज होने वाले मामलों में राज्य उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। देश में कुल दर्ज हुए बाल यौन उत्पीड़न मामले में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा स्थान पश्चिम बंगाल एवं तीसरा स्थान तमिलनाडु का है।

लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता ताहिरा हसन बताती हैं, “आए दिन अखबारों में, टीवी पर आपको देखने को मिलता है कि दो साल की बच्ची का रेप, कभी 5 साल साल की बच्ची का रेप तो इस तरह के मामले जो बढ़ रहे हैं उसके लिए जरूरी है कि अभिवावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरुक रहें।”

वो आगे कहती हैं कि आज कल मां बाप दोनों नौकरीपेशा होते हैं ऐसे में बच्चों पर ध्यान भी कम दे पाते हैं, कई केस तो नौकरों के ही ऐसे सामने आते हैं। इसलिए बच्चों को समझाना, उन्हें इन सब के लिए जागरुक करना बहुत जरूरी है।

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बच्चों के साथ बढ़ रही यौन हिंसा मामले में यूनिसेफ का कहना है कि बच्चों को बचाने के लिए बेहतर कानूनों की जरूरत है। इसके अलावा सामाजिक सेवाओं से भी समर्थन की दरकार है, तभी हालात में कुछ बेहतरी की उम्मीद की जा सकती है।

इस तरह की हिंसाए बच्चों का भविष्य हमेशा के लिए अंधकार में डाल देते हैं। इस बारे में लखनऊ की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ कविता धींगरा बताती हैं, “ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के लोग बच्चों को निशाना बनाते हैं क्योंकि वो नासमझ होते हैं। ऐसे बच्चे जो अकेले खेलते हों, जिनके मां बाप घर पर न रहते हो, जो स्कूल अकेले आते जाते हों उनको वो आसानी से पकड़ लेते हैं।”

बच्चों में यौन हिंसा के मामले में लगातार बढ़ोत्तरी।

बच्चे कई बार तो छेड़खानी की घटनाओं को बता ही नहीं पाते हैं डर से। कई बार वो खुद ही नहीं समझ पाते हैं बस उन्हें ये पता होता है कि जो उनके साथ हुआ है वो कुछ गंदा है। उनका आत्मविश्वास भी कम हो जाता है। अगर मां बाप शुरुआती समय में ही ध्यान दें तो कुछ हद तक ऐसी घटनाओं में कमी आ सकती है।

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