टीडीपी की एप्लीकेशन 'सेवा मित्र' बनाने वाली कंपनी ने लीक किया 10 करोड़ नागिरकों का डाटा

टीडीपी की एप्लीकेशन फोटो- ट्विटर/फाइनेंशियल एक्सप्रेस

लखनऊ। हैदराबाद की एक आईटी कंपनी IT Grids (India) Pvt Ltd के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ हुई है। कंपनी पर लगभग दस करोड़ नागरिकों का आधार डाटा चोरी करने और उसका गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। कंपनी से मिली हॉर्ड ड्राइव्स में पंजाब के दो करोड़, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के सात करोड़ 80 लाख लोगों का आधार डाटा मिला है।

'हफिंग्टन पोस्ट' वेबसाइट के मुताबिक, इस केस की एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) जांच के प्रमुख आईजी स्टीफन रवीन्द्र ने बताया, "पुलिस बरामद हुईं सभी हॉर्ड ड्राइव्स की जांच कर रही है। ऐसा लगता है कि टीडीपी (तेलगु देशम पार्टी) की एप्लीकेशन 'सेवा मित्र' से प्राप्त मतदाताओं से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया गया।"

प्रतीकात्मक तस्वीर। तस्वीर- ट्विटर

एसआईटी मामले की जांच कर रही है। आईजी रवीन्द्र इस बारे में भी चिंता जताते हैं कि डाटा कहां से आया, "हम डाटा कहां से आया ये जानने के लिए हॉर्ड ड्राइव्स की फॉरेन्सिक जांच कर रहे हैं। डाटा में कुछ चीज़ें एसआरडीएच (स्टेट रसिडेंट डाटा हब) और सीआईडीआर (सेन्ट्रल आइडेंटिटीज़ डाटा रिपोज़िट्री) में दी हुई जानकारी से पूरी तरह मेल खाती हैं।"

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इस डाटा का कई तरह से गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। आईजी रवीन्द्र आगे कहते हैं, "कंपनी ने डाटा का इस्तेमाल मतदाताओं के बारे में जानने के लिए किया। जो डाटा प्राप्त हुआ उससे मतदाताओं की जानकारी निकाली गई। उसके बाद एक लिस्ट बना कर लोगों को फोन कर पता किया गया और पता किया गया कि वो किसी पार्टी को वोट करेंगे। इसके बाद जो लोग आपको वोट नहीं करने वाले हैं उन्हें वोटिंग लिस्ट से निकालने के लिए उनका फॉर्म सात भर दिया गया। ये बहुत पेचीदा योजना है।"

फॉर्म सात के ज़रिए कोई भी व्यक्ति किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटवा सकता है। फॉर्म सात भरने पर निर्वाचन आयोग जांच करता है कि व्यक्ति की मौत हो गई है, वो कहीं और चला गया है, बीमार है या उसके पास दो मतदाता आईडी हैं अगर ऐसा है तो आयोग मतदाता का नाम लिस्ट से हटा देता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर। तस्वीर- ट्विटर

डाटा ब्रीच के लिए गठित एसआईटी मामले की जांच कर रही है। 'द लॉजिकल इंडियन' वेबसाइट के अनुसार, आधार के उपाध्यक्ष टी. भवानी प्रसाद ने कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ कराई है। इनसे पहले 2 मार्च 2019 को डाटा एनॉलिस्ट थुम्मला लोकेश्वरा रेड्डी ने आईटी ग्रिड्स के खिलाफ एफआईआर कराई थी। डाटा एनॉलिस्ट का दावा था कि कंपनी गलत तरीके से लोगों के आधार नंबर, मतदाता पत्र, रंगीन तस्वीरों, सरकार की लाभार्थी योजनाओं और टीडीपी के सेवा मित्र एप के ज़रिए कराए कई सर्वेक्षणों का इस्तेमाल कर रही है।

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एक निजी आईटी कंपनी के मालिक अंकुर मिश्रा बताते हैं, "आधार अपडेट कराने वाले जितनी भी जगहें होती हैं, उनके पास आपका आई रैटिना, आपके फिंगर प्रिंट होते हैं, ये सभी जानकारियां एक एपीआई के ज़रिए सर्वर पर जाती है। सरकार का ये कहना होता है कि ये सामान्य डाटा है। सामान्य डाटा के ही एपीआई आसानी से वेबसाइट पर दिए हुए हैं।"

"आधार का डाटा भारत के एनआईसी (nic) नहीं, बाहर के सर्वर पर सेव है। साथ ही इस डाटा की एपीआई बहुत आसानी से उपलब्ध हैं। अगर आप थंब इंप्रेशन का एपीआई जान लें तो आसानी से व्यक्ति की सारी जानकारी निकाल सकते हैं। ये भी एक कारण है कि डाटा आसानी से लीक हो जाता है।"

"किसी भी प्राइवेट कंपनी के पास अगर आपका डाटा है, आपके नंबर या ई मेल आईडी के ज़रिए सीधे लोगों से सम्पर्क किया जा सकता है। चुनाव के वक्त कोई भी राजनैतिक दल अपने फायदे के लिए इनका इस्तेमाल कर सकता है," - अंकुर आगे कहते हैं।

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