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'सरकार नाकाम साबित हुई, मेरे पिता नहीं बचे'

पिता को बचाने के लिए बेटी सोशल मीडिया पर इलाज के लिए गुहार लगाती रही। बेटी का आरोप है मेरे पिता का इलाज ही नहीं किया गया।

Mithilesh DharMithilesh Dhar   4 Jun 2020 3:15 PM GMT

सुबह आठ बजकर पांच मिनट पर अमरप्रीत के ट्विटर हैंडल से एक ट़्वीट होता है, "मेरे पिता को बहुत बुखार है। उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल में भर्ती कराना होगा। मैं उन्हें लेकर लोक नायक जय प्रकाश नारायाण अस्पताल के बाहर खड़ी हूं, लेकिन डॉक्टर उन्हें भर्ती नहीं कर रहे हैं। उन्हें कोरोना है। तेज बुखार है, वे सांस नहीं ले पा रहे हैं। बिना मदद के जिंदा नहीं रह पायेंगे।"


इसके ठीक 16 मिनट बाद आठ बजकर 21 मिनट पर मदद की आस में दोबारा यही मैसेज ट़्वीट किया जाता है।


और फिर इसके ठीक 47 मिनट बाद एक और ट़्वीट आता है जिसमें लिखा होता है, "सरकार नाकाम साबित हुई ,मेरे पिता नहीं बचे"।


यह सब कुछ घटा देश की राजधानी नई दिल्ली के लोक नायक जय प्रकाश नारायाण अस्पताल के बाहर। तारीख चार जून 2020। घटना तब की है जब सोशल मीडिया पर लोग केरल में एक बेजुबान हथिनी की दर्दनाक मौत पर दुख प्रकट कर रहे थे। जब देश के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट़्वीट करके लिखा कि केरल में हथिनी की हुई मौत को उनकी सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसकी ठीक से जांच होगी और दोषियों को छोड़ा नहीं जायेगा।


अमरप्रीत के 68 वर्षीय पिता साउथ दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहते थे जहां उनका टायर का व्यापार था।

इससे पहले अमरप्रीत ने दो जून को ट़्वीट करके दिल्ली सरकार से मदद मांगी थी। तब उन्होंने कहा था कि उनके पिता कोरोना पॉजिटिव हैं, लेकिन हेल्पलाइन नंबर से कोई जवाब नहीं मिल रहा। मुझे मदद की सख्त आवश्यकता है। दो तारीख को उन्होंने ट्वीट करके स्थानीय विधायक दिलीप पांडेय और दूसरे लोगों को मदद के लिए शुक्रिया भी बोला था।


और दो दिन बाद चार जून को उनकी मौत हो जाती है। इस पूरे मामले को जानने के लिए मैंने अमरप्रीत के ट्विटर हैंडल पर मैसेज किया तो तुरंत जवाब मिल गया। उधर से बताया गया कि मैं अमरप्रीत की दोस्त पारुल हूं। अमरप्रीत के ट्विटर हैंडल से इलाज न मिलने वाला ट्वीट पारुल ने ही किये थे। उनसे ही अमरप्रीत के पति मनदीप सिंह का नंबर मिला। जो मौके पर कुछ देर बाद पहुंचे थे।

गांव कनेक्शन ने मनदीप सिंह से फोन पर बात की। उन्होंने हमें जो बताया उसे आप पढ़िये और सुनिए भी।

26 मई को मेरे फादर इन लॉ को बुखार हुआ। तब बुखार 100 डिग्री सेल्सियस था। 29 मई को हमने कुछ डॉक्टर्स से ऑनलाइन संपर्क किया। उन्होंने तीन दिन की दवा दी। 31 मई को हम गंगा राम अस्पताल गये। वहां एक्सरे हुआ जिसमें बताया गया कि उनके सीने में संक्रमण है। कोविड टेस्ट के लिए सैंपल लिया गया है, रिपोर्ट ऑनलाइन चेक कर लीजियेगा, अब अस्पताल आने की जरूरत नहीं है। अगर कोरोना हुआ तब हम आपसे संपर्क करेंगे।

उस दिन जांच के लिए हमने तीन घंटे इंतजार किया था। तब बारिश भी बहुत तेज हो रही थी। मैं, मेरी पत्नी, सासू मां, और मेरा साला, सब भीग गये। एक जून को रिपोर्ट डाउनलोड किया तब कोरोना पॉजिटिव निकला। इसके बाद हमने तुंरत गंगा राम अस्पताल में संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

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एक से तीन जून के बीच हम मैक्स, सफदरजंग, अपोलो, और एम्स जैसे अस्पताल गये। ज्यादातर लोगों ने मरीज को लेने से यह कहकर मना कर दिया कि हमारे यहां बेड खाली नहीं है। फिर अपने अपने जान-पहचान के डॉक्टर और अस्पतालों से बात की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस बीच गंगा राम अस्पताल में लगातार फोन करते रहे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

फिर हमने मैक्स में बात की। उन्होंने कहा कि पहले आप पांच लाख रुपए जमा करिये, इलाज तभी शुरू होगा। इसके बाद हमने दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया। करते रहे, बार-बार करते रहे लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद हमने ट़्विटर पर मदद मांगी। तब बहुत से लोगों ने कहा कि शरीर का तापमान जब तक 101 डिग्री सेल्सियस से कम है, तक तक घर पर रखिये।

इस बीच हमें सरकार की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई। आरोग्य सेतु ऐप से भी कोई मदद नहीं मिली। कोई अस्पताल भर्ती करने को राजी नहीं हुआ।

तीन जून को हमने फैसला किया कि हम उन्हें अस्पताल लेकर जाएंगे। इंमरजेंसी की लाइन में लगकर दिखाएंगे, क्योंकि तब शरीर का तापमान 102 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा था। चार जून की सुबह पांच बजे पता चला कि तापमान 102 डिग्री सेल्सियस पर है और उसके नीचे नहीं आ रहा। उन्हें तुरंत दवा दी गई। इसके कुछ देर बाद तापमान 98 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। फिर हमने अस्पताल जाने का फैसला लिया।

डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं।

इसके बाद हमने फिर से दिल्ली के हेल्पलाइन नंबर फोन किया। उन्हें स्थिति के बारे में बताया तब उन्होंने कहा कि आप मरीज को लेकर लोक नायक जय प्रकाश नारायाण अस्पताल जाइये। वहां पर 1,100 बेड्स खाली हैं। मेरे साला अपने पापा को लेकर 6.50 पर अस्पताल पहुंचा। उसके साथ उसका चचेरा भाई और सासू मां भी थीं।

जब उन्हें कोविड ब्लॉक लेकर गये तो वहां के डॉक्टर ने कहा कि ये तो गंगा राम अस्पताल का मरीज है, इसे वहां लेकर जाओ। हम यहां नहीं देखेंगे। वापस ले जाओ। मरीज गाड़ी में इमरजेंसी वार्ड के बाहर इंतजार कर रहा था। तब तक 15 से 20 मिनट का समय बीत चुका था। इसके कुछ देर बाद मेरे साले ने देखा कि पापा बेहोश हो गये हैं। उन्हें कोई अटैक आया था।

तक तक साढ़े सात बज चुके थे और मैं और अमरप्रीत अस्पताल पहुंच गये थे। डॉक्टर इलाज करने के लिए तैयार नहीं थे। फिर अमरप्रीत ने अपने दोस्तों से सोशल मीडिया पर मदद मांगी। फिर उसकी एक फ्रेंड ने कहा कि जो भी ट्वीट करना हो, मुझे बता दो, मैं कर देती हूं।

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इसके बाद हम फिर इंमरजेंसी वार्ड की तरफ भागे। मेरे साले ने डॉक्टर के पैर पकड़ लिए और देखने की अपील करने लगा। तब तक हम गुड़गांव से वहां पहुंच चुके थे। फिर डॉक्टर आये। फिर उन्होंने यही बात कही कि इन्हें तुरंत गंगा राम अस्पताल लेकर जाओ।

मेरे साले और उनके कजिन ने स्ट्रेचर के सहारे पापा को बाहर निकालना चाहा तो डॉक्टर ने मना कर दिया। बोले कि आप लोग सुन नहीं रहे हैं, मरीज को तुरंत गंगा राम अस्पताल लेकर जाइये। और फिर लगभग 10 मिनट बाद डॉक्टर आये और उन्होंने ऑक्सीजन लगाया। 15 मिनट उन्होंने कहा कि मरीज की मौत हो गई है। ऑक्सीजन के अलावा मरीज को अस्पताल में कोई इलाज नहीं मिला।

जब वे रास्ते में जा रहे थे तब फोन पर मेरी उनसे बात भी हुई। अमरप्रीत ने भी बात की थी। जब वे अस्पताल पहुंचे तब जिंदा थे। समय पर इलाज मिलता तो शायद उन्हें बचाया जा सकता था।

और अंत में हमने उनका अंतिम संस्कार कर दिया।

मनदीप और उनका परिवार अब और परेशान है। पूरा दिन बीत जाने के बाद भी उनके घर के किसी भी शख्स की कोई जांच नहीं हुई है और न ही किसी ने इसके लिए उनसे संपर्क किया है। अमरप्रीत ने चार जून को शाम साढ़े पांच बजे ट़्वीट करके कहा कि हम चाहते हैं कि मेरा, मां, मेरे पति, मेरे भाई, उसकी पत्नी और उनके दोनों बच्चों का टेस्ट हो। इसके लिए हम सुबह से प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी तक कुछ हुआ ही नहीं।


मनदीप ने यह भी कहा कि उन्हें पता चला कि डॉक्टर ने कहा कि ये मरीज को अस्पताल में मृत अवस्था में ही ले आया गया था। इंडिया टुडे की खबर के अनुसार लोक नायक जय प्रकाश नारायाण अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि मरीज को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। वहां के डॉक्टर्स ने यह भी कहा कि हमने इलाज के लिए मना नहीं किया, हां उन्हें गंगा राम अस्पताल ले जाने को जरूर बोला।

अस्पताल प्रशासन की ओर से एक विज्ञप्ति जारी करके कहा गया है कि सारे आरोप गलत है। हमार रिकॉर्ड के अनुसार मरीज की मौत साढ़े सात बजे ही हो गइ थी जबकि पेशेंट की बेटी के ट्विटर हैंडल से पहला ट्वीट 8.05 मिनट पर किया गया था।

अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति।

महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद दिल्ली में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले हैं। राजधानी में अब तक कोरोना के कुल 23,645 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से 13,488 मामले एक्टिव हैं और अब तक 615 लोगों की मौत भी हो चुकी है। देश में अब तक कोरोना वायरस की वजह से 6,178 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 2,21,229 लोग संक्रमित हो चुके हैं। एक्टिव मामलों की संख्या 1,08,993 है।

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