12 वीं के छात्र का खुला ख़त , प्रधानमंत्री जी... हमारे गांव के लोगों को नहीं पता क्या है जीएसटी

12 वीं के छात्र का खुला ख़त , प्रधानमंत्री जी... हमारे गांव के लोगों को नहीं पता क्या है जीएसटीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

बरुई बरुआ (सीतापुर)। पिछले कई दिनों से जीएसटी की चर्चा जारी है। आज सुबह सोकर उठा तो पता चला देश में एक कर व्यवस्था लागू हो गई है। मैंने अपने मोबाइल में देखा तो पता चला देश में जीएसटी के लॉन्चिंग को जश्न मनाया गया। लेकिन मेरे गांव के ज्यादातर लोगों ने इसका नाम नहीं सुना था।

आज स्कूल का पहला दिन था तो जल्दी-जल्दी तैयार हुआ लेकिन सोचा एक बार स्कूल जाने से पहले गांव का चक्कर मार आऊँ कि आखिर हो क्या रहा है। गांव में सब कुछ आम दिनों की तरह ही था। कुछ पुरुष दरवाजे पर बंधी गाय-भैसों का चारा दे रहे थे तो कुछ महिलाएं घर के बाहर ईंट पर बर्तन मांजने में जुटी थीं। कई महिलाएं रोज की तरह पशुओं का गोबर भी साफ कर रही थीं... कई घर के पुरुष तड़के खेतों में जा चुके थे तो कई जाने की तैयारी में थे, उनके लिए बड़ी ख़बर ये थी कि ऊपर वाला मेहरबान है तो झमाझम बारिश हो रही है और धान लगाने का शानदार मौका है।

उत्तर प्रदेश में सीतापुर जिला मुख्यालय से 84 किलोमीटर दूर रामपुरमथुरा ब्लॉक में घाघरा की तराई में मेरा गांव पड़ता है। जीएसटी तो दूर हमारे जैसे गांवों में ऐसी तमाम जानकारियों और योजनाओं को पहुंचने में वर्षों लग जाते हैं। बातचीत में पता चला लोग देश में ऐसे होने वाले परिवर्तनों से अनभिज्ञ रहते हैं। संचार के साधन न के बराबर जो हैं। अख़बारों में विज्ञापन छपे होंगे लेकिन 35 घर वाले मेरे गांव कुशवाहा नगर (ग्राम पंचायत बरई –बरुआ) में किसी के घर अख़बार नहीं आता। कुछ घरों में टीवी हैं लेकिन वो कई चली नहीं क्योंकि गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची। मोबाइल पर डाउनलोड कराए गाने और फिल्में लगभग हर फोन में होंगी, लेकिन चाइना वाले मोबाइल में इंटरनेट भी बहुत कम ही है। गांव के दो-चार जागरुक लोगों ने ही सिर्फ रेडियो पर जीएसटी के बारे में सुना था, लेकिन कितना समझ पाए होंगे, आप अंदाजा लगा सकते हैं।

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मेरे घर से 7-8 घर छोड़कर रहने वाले 53-54 साल के मोती लाल चाचा थोड़े जागरुक किसान हैं तो मैंने उन्हीं से पूछ लिया, चाचा, ये जीएसटी जानते हैं क्या है ? गले में पड़े अगौछे से मुंह पोछते हुए वो बोले, अरे भैया, यह जीएसटी क्या है, हमें तो कुछ पता नहीं, ना किसी ने बताया।" मैंने अपनी तरफ से उन्हें समझाने की कोशिश की ये कई टैक्स को मिलाकर एक टैक्स है लेकिन समझ में कुछ नहीं आया।

हर्षित कुशवाहा, 12वीं के छात्र और गांव कनेक्शन के कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

अपने गांव का चक्कर मार मैं फिर घर आया और बैग उठाकर स्कूल चल पड़ा, आज 12वीं का पहला दिन था, अऩुमान लगा रहा था कि क्या कुछ महंगा होगा। तभी रास्ते में बरुई-बरुआ गांव में बीएससी के छात्र रविचंद्र मिले। 19 साल के छात्र ने जीएसटी के बारे में सुना था लेकिन उत्तर कुछ ऐसा दिया, “हमने रेडियो में जीएसटी के बारे में सुना तो था , लेकिन यह क्या है? क्यों हैं ?और हमारे ऊपर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? यह हम नहीं जानते यह हम नहीं जानते।”

मैं सोच रहा था बीएससी में पढ़ने वाले छात्र को जब इसकी जानकारी नहीं है तो आम ग्रामीण को क्या होगा, इतना हंगामा मचा था कई महीनों से और लोगों को सही तरीके से जागरुक तक नहीं किया गया। यानि जो दुकानदार समझाएगा आज भी वही होगा। न मोल-न भाव ना टैक्स, न छूट।

कुछ देर बार मैं अपने स्कूल पहुंच गया था। अपने क्लास के कई बच्चों से बात की, लेकिन जबाव सबके वैसे ही थे। शिवानी सिंह हमारे क्लास की सबसे तेज छात्राओं में से एक हैं, वो टीवी भी देखती है और अख़बार भी पढ़ती है। उसने बताया, टीवी पर देखा था, सब जीएसटी-जीएसटी कर रहे थे, शायद ये कोई टैक्स होता है। लेकिन हम पर क्या फर्क पड़ेगा ये जानकारी नहीं।”

मैं सोच रहा था.. अच्छा है अपने यहां एक देश एक कर लागू हो गया, लेकिन जल्द एक देश और एक शिक्षा भी लागू होगी.. एक देश है तो सुविधाएं सबको एक जैसी हों.. मैंने ये भी सुना है कि इससे टैक्स की चोरी रुकेगी.. सरकार को ज्यादा आमदनी होगी और उससे हमारे गांव का विकास होगा...

नोट- लेखक 12वीं का छात्र और गांव कनेक्शन का कम्यूनिटी जर्नलिस्ट (छात्र पत्रकार) है।

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