जीएसटी की चर्चा के बीच झमाझम बारिश , जानकारों की राय , धान की रोपाई तेज करें किसान

जीएसटी की चर्चा के बीच झमाझम बारिश , जानकारों की राय , धान की रोपाई तेज करें किसानये धान की रोपाई का सही समय है। (फोटो- विनय)

लखनऊ। जीएसटी से किसानों को लाभ होगा कि फायदा, इस चर्चा के बीच बारिश से किसानों को राहत मिलेगी। भारी बारिश से किसानों के चेहरे पर रौनक लौट आई है। बारिश की राह देख रहे किसानों को चेहरे शनिवार की बारिश के बाद खिल गए

धान की नर्सरी तैयार होने के बाद भी पानी कमी के कारण रोपाई नहीं कर पा रहे किसानों के लिए पहली जुलाई की झमाझम बारिश राहत लेकर आई है। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने किसानों को सलाह दी है कि रोपाई वाले खेत में 1 फीट ऊंची मेढ़ बनाकर बरसात के पानी को संरक्षित करके किसान धान की रोपाई शुरू कर दें। मानूसन की देरी के कारण जिन किसानों ने अभी तक नर्सरी की बुवाई अभी तक नहीं की है वह कम जल्दी तैयार होने वाली संस्तुत प्रजातियां नरेन्द्र-97, शुष्क सम्राट, नरेनद्र लालमती और पंत धान-12 की नर्सरी डाल दें। नर्सरी की बुवाई के 10 दिन के अंदर ट्राइकोडर्मा का छिड़काव करें।

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गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्राद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के राइस ब्रीडिंग डिपार्टमेंट के प्रधान वैज्ञानिक डा. सुरेन्द्र सिंह ने बताया '' जिन किसानों की नर्सरी 20 से लेकर 25 दिन तक की हो गई है, उसकी रोपाई किसान शुरू कर दें। '' उन्होंने बताय कि धान के पौधे की रोपाई प्रत्येक वर्गमीटर में 50 हिल और 2-3 पौधा प्रति 3 से लेकर 4 सेंटीमीटर की गहराई में रोपें। रोपाई के बाद संकरी और चौड़ी पत्ती दोनों प्रकार के खर-पतवार के नियंत्रण के लिए ब्यूटाक्लोर 50 प्रतिशत ईसी 3-4 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

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उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की तरफ से इस बार खरीफ की मुख्य फसल धान की प्रदेश में 5966.088 हजार हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। जून 30 तक प्रदेश में धान की बुवाई की जो रिपोर्ट मिली है उसके मुताबिक अभी तक प्रदेश में 134.630 हजार हेक्टेयर में धान की बुवाई हो चुकी है। जो तय लक्ष्य से बहुत कम है। ऐसे में किसानों से धान की बुवाई को जल्द से जल्द करने की सलाह दी गई है।

लखनऊ में चारबाग स्टेशन के बाहर बारिश का नजारा।

उत्तर प्रदेश में इस खरीफ सीजन में पिछले साल के मुकाबले धानकी पैदावार का भी अधिक लक्ष्य रखा गया है। पिछले सीजन सीजन में 143.96 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ था, इस बार 151.30 लाख मीट्रिक टन धान के उत्पादन का लक्ष्य तया हुआ है। उत्पादन के इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीक का प्रयोग, संकर बीजों के प्रयोग का विस्तार, मृदा परीक्षण, संतुलित उवर्रक, जैविक खाद और प्रमाणित बीज को उपलब्ध करा रहा है।

तब तक इस वीडिया से जीएसटी को विस्तार से समझिए

उत्तर प्रदेश में इस बार कुल खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य 9158.00 हजार हेक्टेयर तय किया गया है, कृषि विभाग को जून 28 तक बुवाई के जेा आंकड़े मिले हैं उसके मुताबिक पूरे प्रदेश में 372.00 हजार हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डा. आईएन मुखर्जी ने बताया '' धान के अलावा मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, सोयाबीन, तिल और अरहर की बुवाई पर भी किसान विशेष ध्यान दें। '' उन्होंने बताया कि अरहर का अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसान मेड़ों पर इसकी बुवाई करें।

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