आयुष्मान भारत योजना: अभी भी गरीबों की पहुंच से दूर स्वास्थ्य बीमा का लाभ

केंद्र सरकार की यह योजना कमजोर और गरीब वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई गई है, लेकिन इस पहलू को ध्यान ही नहीं रखा गया कि ग्रामीण और अनपढ़ व्यक्ति इसका लाभ कैसे ले पाएगा?

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   12 Nov 2019 8:27 AM GMT

आयुष्मान भारत योजना: अभी भी गरीबों की पहुंच से दूर स्वास्थ्य बीमा का लाभ

लखनऊ। " गाँव में कार्ड बनाने के लिए लिखा पढ़ी हुई थी। कहा गया था कि एक कार्ड बनकर आएगा। उससे फ्री में इलाज में होगा, लेकिन छह महीने बीत चुके हैं, अब तक कार्ड नहीं मिला।" यह कहना है उत्तर प्रदेश के जनपद ललितपुर की महरौनी तहसील के अजान गाँव निवासी बाबूलाल अहिरवार (48 वर्ष) का।

बाबूलाल का आठ लोगों का परिवार है। उनकी पत्नी अक्सर बीमार रहती हैं, लेकिन गरीबी के चलते वे इनका सही से इलाज नहीं करा पा रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, भारत सरकार की एक स्वास्थ्य योजना है जिसे 1 अप्रैल, 2018 को पूरे भारत मे लागू किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितम्बर, 2018 को झारखंड की राजधानी रांची से इस योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (बीपीएल धारक) को पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराने का उद्देश्य है। इसके प्रीमियम का भुगतान सरकार करती है। एक साल में लगभग 10 करोड़ आयुष्मान कार्ड बांटे गए। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना का लाभ जल्द से जल्द 50 करोड़ देशवासियों को उपलब्ध कराई जाए।

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लेकिन प्रधानमंत्री की इस महत्वकांक्षी योजना का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। बाबूलाल जैसे न जाने कितने ऐसे में लोग हैं जिन्हें इस योजना का लाभ मिलना चाहिए था लेकिन बीमा कार्ड न होने की वजह से उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा। हालांकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 'आयुष्मान भारत योजना' के एक साल पूरे होने पर कहा था कि इस योजना के तहत पिछले एक साल में 47 लाख लोगों का इलाज हुआ, जिसमें केंद्र सरकार के 7500 करोड़ रुपए खर्च हुए।

बाबूलाल कहते हैं, "मेरी पत्नी तुलसा हमेशा बीमार रहती है। उसके पेट में कुछ दिक्कत है। डॉक्टर ने बोला है कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। आयुष्मान योजना के तहत जो कार्ड मिलने वाला था अगर वह मिल जाए तो फ्री में उसका इलाज हो जाएगा। छह महीने से कार्ड का इंतजार कर रहा हूं। पत्नी की तकलीफ अब देखी नहीं जा रही है। "

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उत्तर प्रदेश के जनपद लखनऊ के इटौंजा निवासी जरीना का पैर टूट गया। उनके पास गोल्डन कार्ड नहीं है। वह गोल्डन कार्ड (बीमा कार्ड) के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गईं लेकिन अभी तक बन नहीं पाया है। ऐसे में वह अस्पताल जाती हैं तो आयुष्मान मित्र गोल्डन कार्ड की मांग करते हैं। कार्ड नहीं होने से इलाज नहीं मिल पा रहा है, जबकि शासनादेश है कि लाभार्थी का नाम सूची में है तो उसका इलाज किया जाए। इसके बाद भी जरीना को इलाज नहीं मिल पा रहा है।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर काम करने वाली संस्था प्रतिनिधि के कार्यकारी निदेशक मजहर रशीदी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "आयुष्मान योजना की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वास्तविक लाभार्थियों तक इसका लाभ पहुंचे। इसकी सबसे बड़ी परेशानी भी यही है कि इस योजना का ढांचा बहुत कठिन है। इस योजना से जुड़ी हुई जानकारियां एक साधारण आदमी तक पहुंच ही नहीं पाती हैं। इसी का फायदा उठाकर अस्पताल और डॉक्टर धोखाधड़ी कर रहे हैं। मेरा मामना है कि सरकार को चाहिए कि वह आयुष्मान योजना की प्रक्रिया को और भी सहज और आसान बनाए।"

सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 की बात करते हुए बुंदेलखंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के सचिव सुधीर त्रिपाठी बताते हैं," आयुष्मान योजना में तमाम खामिया हैं। अपात्र पात्र बन गये और पात्र अपात्र। ऐसे में गरीब लोगों तक आयुष्मान का लाभ नहीं पहुंच रहा है। यह सब हवा-हवाई जनगणना के कारण हुआ है। आयुष्मान में सुधार की जरूरत है, जिससे हर जरूरतमंद को योजना का लाभ मिल सके।"

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देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क की मालिनी आइसोला ने गाँव कनेक्शन से बताया, "आयुष्मान भारत योजना का लाभ लोगों को मिल रहा है, यह अच्छी बात है, लेकिन इसका एक दूसरा पक्ष यह भी है कि इस योजना में प्राथमिक चिकित्सा पर ध्यान नहीं दिया गया, जो भारत जैसे देश के लिए काफी जरूरी है," आगे कहती हैं, "जब तक हम प्राथमिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ नहीं करेंगे तब तक ये योजनाएं शत प्रतिशत लाभकारी नहीं हो सकती हैं। बुनियादी स्वास्थ्य को मजबूत करने की बेहद जरूरी है।"


आयुष्मान भारत योजना के तहत करीब 1300 बीमारियों का इलाज मुफ्त में होता है। इसमें कैंसर, ह्दय की सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, रेडियोलॉजी जैसी गंभीर और महंगी बीमारियों को भी शामिल किया गया है। डिलीवरी की सुविधा, नवजात और बच्चों के स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य सुविधा, कॉन्ट्रासेप्टिव सुविधा और संक्रामक, गैर संक्रामक रोगों के प्रबंधन की सुविधा, आंख, नाक, कान और गले से संबंधित बीमारी के इलाज के लिए अलग से यूनिट होगी। बुजुर्गों का इलाज भी करवाया जाता है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत वितरित किये जा रहे गोल्डन कार्ड के बारे में डाॅ प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ललितपुर कहते हैं," 89,842 लाभार्थी आयुष्मान योजना के तहत लक्षित हैं जिनमें से 62,842 लाभार्थी आयुष्मान भारत योजना एवं 26,972 लाभार्थी मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के हैं, जिसमें से अब तक 37,248 लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किये गऐ, जो 41.47 प्रतिशत हैं। लोगों को जो परेशानियां हो रही हैं उसका निस्तारण किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि प्रत्येक लाभार्थी को आयुष्मान का लाभ मिले।"

बिहार के जनपद मुजफ्फरपुर के मुसहरी निवासी मधुबन सिंह (60वर्ष) के परिवार में सात लोग हैं। मधुबन के पेट में पथरी है। पटना में इलाज चल रहा है, लेकिन कुछ फादया नहीं हुआ। इसी माह पांच हजार रुपए उधार लेकर इलाज कराने पटना गए थे। मधुबन गाँव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, " आयुष्मान कार्ड के बारे में सुना है, लेकिन कैसे बनता है यह नहीं जानता हूं। गाँव के कुछ लोग बता रहे थे कि एक कार्ड बनता है जिससे मुफ्त में इलाज होता है। मुखिया से कहकर अपना भी कार्ड बनाऊंगा। "

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स्वास्थ्य मुददे पर काम करने वाली वरिष्ठ पत्रकार पत्रलेखा चटर्जी कहती हैं, " सरकार की यह योजना मुख्यतः कमजोर और गरीब तबके के लिए बनाई गई है, लेकिन इस पहलू को ध्यान ही नहीं रखा गया कि ग्रामीण और अनपढ़ व्यक्ति इसका लाभ कैसे ले पाएगा। इस तरह की योजनाओं को ग्रामीण और अशिक्षित वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए। साथ ही इसके बनने की प्रक्रिया भी आसान होनी चाहिए तभी ये योजना जमीन पर सही से काम कर सकेगी। "

सहयोग: अरविंद सिंह परमार, ललितपुर


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