शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मधुमक्खी पालकों का सम्मेलन

कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह ने कहा बताया कि मधुमक्खी पालकों व सरकार के सामूहिक प्रयासों से वर्ष 2020-21 में देश में शहद का उत्पादन वर्ष 2013-14 के 76150 मीट्रिक टन से बढ़कर अब सवा लाख मीट्रिक टन हो गया है।

शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मधुमक्खी पालकों का सम्मेलन

मधुमक्खी पालन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की मदद से वर्ष 2020-21 में शहद का निर्यात वर्ष 2013-14 के सवा 28 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर लगभग 60 हजार मीट्रिक टन हो गया है। फोटो: यश सचदेव

मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए नागालैंड में मधुमक्खी पालकों का सम्मेलन आयोजित किया गया। साथ ही नागालैंड स्थित केंद्रीय बागवानी संस्थान में किसान भवन का लोकार्पण हुआ।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी कार्यक्रम शामिल हुए। आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में तोमर ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की जलवायु कृषि के अनुकूल है। बागवानी फसलों विशेषकर फल-सब्जियों, फूलों और मसालों की खेती के लिए यह क्षेत्र आदर्श है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि बागवानी में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लघु व सीमांत किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की मध्य क्षेत्र योजना के तहत केंद्रीय बागवानी संस्थान, नागालैंड की स्थापना की गई थी और यह संस्थान बागवानी के विकास और किसानों के उत्थान के लिए राज्य सरकार, एफपीओ और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर अच्छा काम कर रहा है। इससे किसानों के जीवन स्तर में बदलाव आ रहा है, उद्देश्य यही है कि किसान नागालैंड के साथ देश के विकास में अपना योगदान दे सकें।

उन्होंने कहा कि छोटे और मझौले किसानों की परेशानियां दूर करने, उन्हें बैंकों के माध्यम से सरलता से ऋण उपलब्ध कराने, उनके लिए खेती में मुनाफा बढ़ाने पर प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का पूरा जोर है। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से हर साल छह-छह हजार रूपए किसानों को आय सहायता के रूप में दिए जा रहे हैं। सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि छोटे किसानों की आमदनी बढ़े व उनकी प्रगति हों।

तोमर ने मधुमक्खी पालन को किसानों की आय वृद्धि के लिए एक सहायक क्षेत्र बताते हुए कहा कि मीठी क्रांति लाने के लिए हनी मिशन प्रारंभ किया गया है और केंद्र सरकार ने इसमें 500 करोड़ रुपए का प्रावधान आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत किया है। भारत सरकार की 10 हजार नए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने की योजना के अंतर्गत शहद उत्पादक किसानों के एफपीओ भी बनाए जा रहे हैं। शहद की ठीक से जांच हो, इसलिए देश में अनेक जगह लैब बनाई गई है, साथ ही प्रोसेसिंग सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मधुमक्खी पालकों व सरकार के सामूहिक प्रयासों से वर्ष 2020-21 में देश में शहद का उत्पादन वर्ष 2013-14 के 76150 मीट्रिक टन से बढ़कर अब सवा लाख मीट्रिक टन हो गया है। वहीं, मधुमक्खी पालन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की मदद से वर्ष 2020-21 में शहद का निर्यात वर्ष 2013-14 के सवा 28 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर लगभग 60 हजार मीट्रिक टन हो गया है।

उन्होंने कहा कि हम सबका एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि छोटे किसानों को उनके उत्पादों का अधिक से अधिक दाम मिले। उन्होंने कहा कि शहद उत्पादक किसान राज्य सरकार के साथ मिलकर आगे बढ़े, केंद्र सरकार उनके साथ कंधे से कंधा और कदम से कदम मिलाकर खड़ी हुई है।

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