Top

रंग लाई शिक्षिका की मुहिम, 22 गांवों में बच्चों को पढ़ा रही युवाओं की टोली

ख़ास बात यह है कि शिवानी ने भियामऊ गाँव में बच्चों को पढ़ाने के लिए यह मुहिम पांच सितम्बर से शुरू की और मात्र कुछ ही दिनों शिवानी की यह मुहिम 22 गांवों तक पहुँच चुकी है।

Virendra SinghVirendra Singh   4 Nov 2020 8:28 AM GMT

बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)। लॉकडाउन के बाद से लम्बे समय तक स्कूल बंद होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर खासा असर पड़ा है। शहरों में शिक्षक ऑनलाइन क्लास के जरिये भले ही बच्चों को पढ़ा पा रहे हैं, मगर ग्रामीण इलाकों में सीमित संसाधन होने की वजह बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई।

गांवों में बच्चों को पढ़ाने के लिए कुछ शिक्षक नए-नए तरीके इजाद करके बच्चों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें एक शिक्षिका शिवानी भी हैं जो गांवों में बच्चों को पढ़ाने के लिए ख़ास मुहिम चला रही हैं।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले की हैदरगढ़ तहसील के प्राथमिक विद्यालय भियामऊ की शिक्षिका शिवानी सिंह की इस मुहिम की वजह से अब करीब 1,300 बच्चे स्कूल न खुलने के बावजूद पढ़ पा रहे हैं।

शिक्षिका शिवानी सिंह 'गाँव कनेक्शन' से बताती हैं, "गाँव में बच्चों की पढ़ाई खासा प्रभावित हो रही थी, गाँव में ऑनलाइन क्लास चलाना भी मुमकिन नहीं था क्योंकि गाँव में ज्यादातर बच्चों के पास एंड्राइड मोबाइल नहीं थे, तब मैं खुद ही कुछ बच्चों को गाँव में जाकर पढ़ा रही थी।"

बच्चों को पढ़ाने के लिए गाँव में युवाओं को जोड़ने की कोशिश करतीं शिक्षिका शिवानी सिंह। फोटो : गाँव कनेक्शन

"मगर बहुत कम बच्चे ही पढ़ पा रहे थे, तब मैंने गाँव के कुछ बड़े बच्चों, जो इंटर या ग्रेजुएशन कर रहे हैं, को छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए जोर दिया। ताकि वो दिन में थोड़ा समय निकाल कर छोटे बच्चों को गाँव में कहीं खुली जगह में समूह में पढ़ायें, यह प्रयास रंग लाया," शिवानी बताती हैं।

ख़ास बात यह है कि शिवानी ने भियामऊ गाँव में यह मुहिम पांच सितम्बर से शुरू की और मात्र कुछ ही दिनों शिवानी की यह मुहिम 22 गांवों तक पहुँच चुकी है। आज हर गाँव में ऐसे युवा टोली बना कर छोटे बच्चों को पढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि इन गांवों में अब करीब 1,300 बच्चों को शिक्षा मुहैया हो रही हैI

शिवानी बताती हैं, "बुनियादी शिक्षा को सशक्त बनाने और मिशन प्रेरणा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मैंने गांव के शिक्षित युवाओं को पहले छोटी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने का संकल्प दिलाया और फिर उन्हें प्रेरित कियाI अब यह युवा टोली बनाकर गाँव के कई हिस्सों में अलग-अलग बट जाते हैंI इसके लिए यह युवा कोई शुल्क भी नहीं लेती हैI"

बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक दूरी का भी रखा जा रहा ख्याल। फोटो : गाँव कनेक्शन

हैदरगढ़ तहसील के ही पासिंन पुरवा गाँव की रहने वाली कक्षा 11 की छात्रा शानू देवी बताती हैं, "अपनी पढ़ाई के बाद खाली समय में घर पर रहती थी, लेकिन शिवानी मैम बगल के गांव में पढ़ाने के लिए आती थींI उन्होंने आकर हमें प्रेरित किया कि हम भी छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ा कर उन्हें शिक्षित करें, अब आज हमारे पास 10 बच्चे पढ़ने आते हैं और उन्हें पढ़ा कर मुझे बहुत अच्छा लगता हैI"

वहीं भेटमुआ गांव की रहने वाली हेमा जो खुद इंटर की छात्रा हैं, आज शिक्षिका शिवानी की प्रेरणा से कई छात्रों को पढ़ा रही हैंI हेमा बताती हैं, "करीब दो माह हो गए हैं मुझे गाँव के छोटे बच्चों को पढ़ाते हुए, इस कोरोना वायरस के दौर में जब सभी प्राथमिक विद्यालय बंद है, तब मैं बच्चों को पढ़ा पा रही हूँ, यह बहुत अच्छा हैI"

गाँव में बच्चों को पढ़ाने की यह मुहिम धीरे-धीरे और गांवों में भी बढ़ती गयीI यही वजह है कि अब प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका शिवानी के इन प्रयासों की सराहना अब हर कोई करता हैI

हैदरगढ़ के ही रनापुर गाँव की 55 वर्षीय संगीता कहती हैं, "जब स्कूल बंद थे तो बच्चों को जो कुछ आ रहा था, वह भी भूलने लगे थे, लेकिन गांव के युवा बच्चे अब अलग-अलग जगह पर समूह बना कर पढ़ा रहे हैं जिससे बच्चों को काफी लाभ मिल रहा हैI यह सब कुछ शिवानी जी की वजह से संभव हो सका हैI"

यह भी पढ़ें :

'मैं तीरंदाजी का कोच होकर आज पकौड़ियाँ तल रहा हूँ, मैं अब क्यों किसी बच्चे को खिलाड़ी बनाऊंगा'

एक शिक्षक का सपना : 'जब आस-पास कंक्रीट के जंगल खड़े हो रहे हैं, तब मेरा विद्यालय ऑक्सीजन चैम्बर बनेगा'


Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.