‘ गोरक्षकों के चलते अपनी ही गाय को सड़क पर लेकर चलना मुसीबत, करते हैं गुंडई और वसूली ’

‘ गोरक्षकों के चलते अपनी ही गाय को सड़क पर लेकर चलना मुसीबत, करते हैं गुंडई और वसूली ’गोरक्षकों के चलते गाय पालने वाले हैं परेशान। 

लखनऊ। दूसरे राज्यों से गाय भैंस खरीद कर लाना किसानों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। गोरक्षकों की दखल और बढ़ती हिंसा को देखते हुए पशुपालकों काफी परेशान हैं, सबसे ज्यादा दिक्तत गाय खरीद कर लाने वाले किसानों को हो रही है।

“तीन साहीवाल गायों को खरीदने के लिए राजकोट गए थे। वापसी में जब जूनागढ़ से आ रहे थे तो राजकोट हाईवे से पहले 50 की संख्या में गोरक्षकों ने ट्रक रोका। उसके बाद 100 किलोमीटर पर फिर पांच लोगों ने ट्रक को रोका। कागज़ होने के बाद परेशान करते हैं।” ऐसा बताते हैं, राकेश दुबे (55वर्ष)।

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फैजाबाद से 37 किमी. दूर बिरठौली ब्लॉक के बहराय मंजरा गाँव के रहने राकेश दुबे हाल में तीन गायों को जूनागढ़ से खरीद के लाए हैं। राकेश दुबे आगे बताते हैं , “जब से कुछ घटनाएं सामने आई हैं,तब से पशुपालक के दूसरे राज्यों से पशु को खरीदने में कतराता रहा है। एक तो दूसरे राज्य से गाय-भैंस बहुत मंहगी मिलती हैं। दूसरी तरफ हाई वे लोग वसूलते हैं। ऐसे लोग स्थानीय बाज़ारों से ही पशु खरीद ले रहे हैं।”

गाय

अंग्रेजी मीडिया की रिपोर्ट के संग्रह और सामग्री के विश्लेषण के आधार पर बनाए गए इंडियास्पेड के डेटाबेस से पता चलता है कि मई, 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार के सत्ता में आने के बाद से इस तरह की 97 फीसदी (70 में से 68 ) घटनाएं दर्ज की गई हैं। 27 जुलाई, 2017 तक दर्ज हिंसा के मामलों पर किए गए हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि आधे से ज्यादा या 54 फीसदी ( 70 मामलों में से 38 ) गाय से संबंधित हिंसा के मामले भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित राज्यों में से थे।

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विभागीय अधिकारी भी गोरक्षकों से परेशान

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ें भी बताते हैं कि करीब आठ वर्षों में यानी वर्ष 2010 से 2017 के दौरान गायों के मामलों पर केंद्रित हिंसा के 51 फीसदी मामलों (70 में से 36) में निशाने पर मुसलमान रहे हैं।

“पशु को ले जाने में हो रही दिक्कतों को देखते हुए ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए है कि हिंसक घटनाओं को रोका जाए। गोरक्षक किसानों को ही नहीं विभागीय अधिकारियों को भी परेशान करते है। हाल ही में आईवीआरआई के लोगों को हरियाणा के एक हाईवे पर रोका गया। सब जानते है फिर भी ऐसी हरकतें करते है।” ऐसा बताते हैं, उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद के सीईओ डॅा बलभद्र सिंह यादव।

‘प्रत्येक जिले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए’

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि गौरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसक घटनाओं की रोकथाम और उनके प्रभावी तरीके से निपटने के लिए प्रत्येक जिले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। साथ ही कोर्ट ने हर एक राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव से हलफनामा देने को भी कहा है राज्य के मुख्य सचिवों से कहा कि वह गौरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा को काबू में करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें।

इसके अलावा कोर्ट ने पूछा है कि डीजीपी बताए इसे खत्म करने के लिए क्या किया जाए। कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है कि गौ रक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश राज्यों को देने कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है या नहीं। केशव शाहजहांपुर जिले के भावलखेड़ा ब्लॅाक में पिछले तीन वर्षों से डेयरी चला रहें पशुपालक केशव कुमार (36 वर्ष) बताते हैं,“दिन पर दिन पशु को खरीदना मुश्किल हो रहा है, जो पशु पहले 60 से 70 हज़ार रुपए में मिल जाता था, वहीं अब पशु की कीमत एक लाख रुपए तक पड़ जाती है। और पशु को रास्ते का खर्च अलग होता है। पशु लाना भी अब मुसीबत बन गया है।”

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