कोरोना का साया: "पटरी दुकानदार ने कहा, पहले रोज़ 3000 रुपए का सामान बेचता था अब 600 तक पहुंचना मुश्किल"

कोरोना वायरस से जुड़ी आपात स्थिति के उत्पन्न होने से करोड़ों लोगों पर सीधा असर पड़ा है। एक लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं और साढ़े तीन हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन इन गिनतियों के परे करोड़ों लोग हैं जिनकी जिंदगियों और जीविका पर इस बीमारी का अदृश्य असर पड़ रहा है। गाँव कनेक्शन की सीरीज "कोरोनाश" के दूसरे भाग में आज पड़ताल इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार से जुड़े आम लोगों पर

Arvind ShuklaArvind Shukla   12 March 2020 5:15 AM GMT

लखनऊ। "ना कोई ईयरफोन खरीद रहा है, ना स्पीकर, ना इमरजेंसी लाइट, ना मोबाइल के कवर।" उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में सड़क किनारे अपना ठेला लगाए विनोद कुमार (28 साल) ग्राहकों की राह देख रहे हैं।

मुंह पर मास्क है, और जेब ख़ाली है।

इसका कारण लखनऊ से 3200 किलोमीटर दूर, चीन के वुहान शहर में है। वहां शुरू हुए कोरोना वायरस ने उनकी कमाई ठप्प कर दी है।

"आज दोपहर तक सिर्फ 40 रुपए का ईयरफोन बेचा है, पूरे दिन में मुश्किल से 600-700 रुपए की बिक्री हो रही है, जबकि 15-20 दिन पहले तक हम रोजाना 2500-3000 रुपए का सामान निकाल देते थे।" लखनऊ की इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट नाका हिंडोला में अपने ठेले पर काले रंग का मास्क पहने बैठे विनोद कुमार (28 साल) गाँव कनेक्शन को बताते हैं।

दुनिया भर में कोरोना वायरस से जुडी आपात स्थिति के उत्पन्न होने से करोड़ों लोगों पर सीधा असर पड़ा है। एक लाख से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, जिन में से 75,000 से अधिक ठीक हो चुके हैं और लगभग साढ़े तीन हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है (7 मार्च तक), लेकिन इन गिनतियों के परे करोड़ों लोग हैं जिनकी जिंदगियों और जीविका पर इस बीमारी का अदृश्य असर पड़ रहा है।

विनोद कुमार पिछले छह साल से इस बाज़ार में इलेक्ट्रॉनिक्स का छोटा सामान बेच रहे हैं। वो जो बेचते हैं उसमें से 90 फीसदी के आसपास सामान चीन से आता है। तीन बच्चों के पिता विनोद 2000 रुपए में किराए का कमरा लेकर मां पत्नी और बच्चों के साथ लखनऊ में रहते हैं। अकेले लखनऊ शहर में ही विनोद जैसे सैकड़ों पटरी दुकानदार होंगे जो सड़क किनारे इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान बेचते हैं, और इनमें से ज्यादातर का रोजगार प्रभावित हैं, क्योंकि इनकी रोटी रोज की बिक्री पर चलती है। विनोद कुमार की माने तो उन लोगों की होली, बेरंग हो गई है।

अगर होली के बाद भी यही रहा तो मैं धंधा बदल दूंगा, चाइना का माल ही नहीं उठाऊंगा, हमारे जैसों को तो रोज कुआं खोदना रोज पानी पीना है।- विनोद कुमार, पटरी दुकानदार

सड़क किनारे अपनी दुकान पर बैठकर ग्राहकों का इंतजार करते विनोद कुमार। फोटो- अरविंद शुक्ला

सीरीज का पहला पार्ट-Corona Virus : "टीवी चैनल वालों ने डर भर दिया है, ग्राहक सबसे पहले पूछते हैं, चाइनीज पिचकारी तो नहीं?"

मोबाइल के चार्जर से लेकर एलईडी की चिप तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग काफी हद तक चीन पर निर्भर है। कोरोना वायरस के चलते चीन से सामान नहीं आ पा रहा है तो एक्सपोर्ट से पहले से मंगाए सामान का दाम बढ़ा दिए। दूसरी तरफ बीमारी का डर और सोशल मीडिया पर चायनीज प्रोडक्ट उत्पादों को चल रहे मैसेज से भी लोग मेड इन चाइना सामान लेने से करता रहे हैं, जिससे इलेक्ट्रानिक इंडस्ट्री को झटका लगा है।

लखनऊ की नाका हिंडोला जैसी मार्केट में करीब 900 दुकाने हैं जो जहां से थोक और फुटकर का कारोबार होता है। इसके अलावा प्रीत मार्केट नाम से बड़ी मोबाइल मार्केट में भी सैकड़ों दुकानकार हैं, ये सभी कारोबारी दिल्ली में लालकिले के सामने की लाजपत राय मार्केट और दिल्ली में ही करोलबाग की गफ्फार मार्केट से थोक में सामान लेते हैं। गफ्फार खां मोबाइल एसेसरीज की बड़ी मार्केट है। इन बाजारों लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

लाजपत राय मार्केट, दिल्ली के थोक कारोबारी अजय मलिक फोन पर गांव कनेक्शन को बताते हैं, "इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री में ये ग्लोबर मंदी का दौरा है। पहले ही आर्थिक मंदी से जूझ रहे थे अब कोरोना के चलते भी व्यापार प्रभावित हुआ है।"

लाजपत राय एशिया की सबसे बड़ी मार्केट है, इसके बाद चीन की वुहान मार्केट। वुहान वही शहर है जहां दुनियाभर में सनसनी मचाने वाला कोरोना वायरस coronavirus फैला है। लाजपत राय मार्केट के अलावा दिल्ली में नेहरू प्लेस है तो मुंबई में लैंमिगटन रोड, लखनऊ में नाका के अलावा हजरतगंज में नाजा, बेंगलूरू में एसपी रोड भारत में इलेक्ट्रानिक, कंप्यूटर, टीवी और मोबाइल और मोबाइल एसेसरीज की बड़ी मार्केट हैं।

दिल्ली से देश के कई हिस्सों में प्रोडक्ट भेजने वाले विकास कुकरेजा फोन पर बताते हैं, "इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स के ज्यादातर कंपोनेंट चीन से आते हैं। वहां उत्पादन नहीं हो रहा तो देश में आ नहीं रहा, तो जो माल है वो महंगा हो गया। दूसरा दिल्ली से बाहर के लोग खरीददारी के लिए कम आ रहे हैं। कुल मिलाकर देखें तो इलेक्ट्रॉनिक के कारोबार पर 40 फीसदी तक का असर पड़ा है।"

विकास के मुताबिक बीते कुछ दिन उनके जैसे उद्यमियों के लिए काफी नुकसान दायक रहे हैं, "अब देखिए दिल्ली में दंगे हुए वो हमारे मार्केट से काफी दूर थे लेकिन बाहर के ग्राहक नहीं आए, अब कोरोना का इतना खौफ है कि लोग कम आ रहे। तो बाजार काफी कुछ माइंडसेट पर भी निर्भर है।'

कोरोना का असर हर उस ट्रेड पर पड़ा है, जिसमें कच्चा माल चाइना से आता था। मोबाइल, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रानिक (बोर्ड आधारित, जिसमें आईईसी-कंडेसर आदि लगते हैं) के सामान 20 फीसदी तक महंगा हुआ है, क्योंकि मेक इन इंडिया प्रोडक्ट के भी कई रॉ प्रोडक्ट चीन से आते हैं।' सत्यदेव तिवारी, तिवारी, रेडियोज, लखनऊ

नाका हिंडोला बाजार में ही पिछले 20 वर्षों इलेक्ट्रॉनिक पार्टस के थोक कारोबारी तिवारी रेडियोज के मालिक सत्यदेव तिवारी कहते हैं, "कोरोना का असर हर उस ट्रेड पर पड़ा है, जिसमें कच्चा माल चाइना से आता था। मोबाइल, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रानिक (बोर्ड आधारित, जिसमें आईईसी-कंडेसर आदि लगते हैं) के सामान 20 फीसदी तक महंगा हुआ है, क्योंकि मेक इन इंडिया पोडक्ट में कई रॉ (कच्चा माल) उपकरण चाइना से आते हैं।'

यूपी की राजधानी लखनऊ का नाका हिंडौला इलेक्ट्रानिक बाजार।

बिक्री कैसे प्रभावित हुई इस बारे में पूछने पर विनोद कुमार, "अपने मुंह का मास्क हटाकर ठेले पर रखा लाल रंग का स्पीकर दिखाते हुए कहते हैं, "ये स्पीकर 20 दिन पहले तक मैं 150 रुपए का बेच रहा था, अब 250 का बेच रहा हूं क्योंकि पीछे से महंगा आ रहा है। लेकिन ग्राहक को लगता है 15 दिन में इतने दाम कैसे बढ़ गए तो वो ले नहीं रहा, दूसरा कुछ चीजे हैं ऐसी है जो चाइना माल के नाम ही फेमस हैं, इन्हें वो लेना ही नहीं चाहते।"

सत्यदेव तिवारी कोरोना के चलते किस तरह असर हुआ है उसका उदाहरण देकर समझाते हैं, "मोटर साइकिल और स्कूटर की बैटरी जो थोक में 600 रुपए के आसपास थी वो अब 900 तक पहुंच गई है क्योंकि बैटरी भले ही देश में बनती है, उन्हें ऊपर से सील करने का आइटम ज्यादातर बाहर से आता है। दूसरा बड़ी एलईडी टीवी महंगी हुई है क्योंकि भी ज्यादातर सामान चाइना का लगता है, पीछे से आयातकों ने दाम बढ़ा दिए हैं। फरवरी महीने में ज्यादा असर था, अब फिर भी कुछ राहत है।'

दोहरी मार- कोरोना से परेशान बाजार पर मौसम की मार

कोरोना से परेशान दुकानदारों और कारोबारियों के सामने एक नई मुसीबत के मौसम के रूप में आई है। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर से लखनऊ सामान लेने आए दुकानकार मो. असद (45 साल) बाजार के लिए खतरे की तरफ आगाह करते हैं, "हमारे यहां कोरोना का उतना असर नहीं है लेकिन मार्केट में ग्राहक नहीं है क्योंकि पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलें खराब हो गई हैं। फसल बर्बाद हो गई है तो किसान अपने पास का पैसा खर्च नहीं करेगा।"

साल 2019 में बाढ़, सूखा, तूफान और अतिवृष्टि से ग्रामीण की बड़ी आबादी किसानों को काफी नुकसान हुआ था, साल 2020 में भी फरवरी के आखिरी हफ्ते से लेकर मार्च 7 मार्च तक कई राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, यूपी, बिहार और महाराष्ट्र में ओलावृष्टि और बारिश से फसलें बर्बाद हुई हैं। गांव कनेक्शन से बात करते हुए पिछले दिनों बहुत सारे किसानों ने कहा कि उनकी होली काली हो गई है।

नाका हिंडौला वाले विनोद कुमार यूपी के सीतापुर जिले में गोपालपुर गांव के रहने वाले हैं, जहां 5 मार्च को भीषण ओलावृष्टि हुई थी, विनोद के मुताबिक उनके खेत का गेहूं भी चौपट हो गया है, "अब तो गांव से भी कोई राहत की उम्मीद नहीं, हो सकता है राशन भी लखनऊ में ही खरीदना पड़े।" वो जोड़ते हैं।

कारोबार पर क्या असर, यह पूछने पर दिल्ली के एक बड़े एक्सपोर्टर नाम न बताते की शर्त पर कहते हैं, मार्केट में ज्यादा असर नहीं है क्योंकि इस सीजन का माल तो पहले ही आ चुका था, रेट इसलिए बढ़ गए क्योंकि आयातकों ने मौके का फायदा उठाया, लेकिन जब आयातकों को लगा की ज्यादा रेट बढ़ाने से मार्केट में नुकसान हो रहा है, ग्राहक हट रहे हैं तो उन्होंने नए कंटेनर खुलवाए और रेट भी संतुलित किए हैं।'

चीन में नया साल इस बार 25 जनवरी को मनाया गया है, वहां इससे पहले छुट्टियां शुरू हो गई थीं, तो फैक्ट्रियों में काम बंद था। इसके बाद फरवरी में कोरोना का असर हो गया, जिसके चलते फैक्ट्रियों में ना सिर्फ कामकाज बंद हुआ बल्कि निर्यात-आयात भी बंद हो गया है। जिसका असर दुनिया के कई देशों में पड़ा, जिसमें विनोद जैसे लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि इनका रोजी रोटी इसी से जुड़ी है।


मोबाइल एसेसरीज हुई महंगी, मार्केट में सन्नाटा

विनोद के ठेले के पीछे ही यूपी की सबसे बड़ा मोबाइल बाजार प्रीत मार्केट है। प्रीत मार्केट में पिछले कुछ दिनों से सन्नाटा है। मार्केट में चीन की रंग-बिरंगी एलईडी और मोबाइल के चमकते शोरूम में रोशनी तो बहुत है लेकिन ग्राहक बहुत कम नजर आते हैं।

मार्केट में घुसते ही रिपोर्टर को एक काउंटर से लटककर सेल्स ब्वॉय ने आवाज दी। "क्या चाहिए, मोबाइस, एसेसेरिज चाहिए या स्क्रीन लगवाना है सब हो जाएगा.."

खरीद के लिए ना सुनने मायूस होने वाले युवक का नाम मनीष कश्यप है। वे मां दुर्गे इंटरप्राइज में काम करते हैं। मार्केट का हाल पूछने पर मनीष बताते हैं, "मार्केट का हाल बुरा है, क्योंकि मोबाइल का ज्यादातर सामान चाइना से आता है। जो माल है वो महंगा मिल रहा है। स्क्रीन आदि टूटने पर लोग यहां बनवाने भी आते हैं। लेकिन वे जो फोल्डर (स्क्रीन और डिस्पले) पहले 1000 रुपए का था वो अब 1500-1600 का मिल रहा है। टेंपर ग्लास भी 20 से 30 फीसदी महंगा हो गया है।"

विकास आगे जोड़ते हैं, "मार्केट के हालात सुधर रहे हैं, क्योंकि हमारे पास अभी माल है। लेकिन अगर अगले एक दो महीने माल और नहीं आया तो दिक्कत हो जाएगी। हम लोगों ने कुछ सामान ताइवान से मंगवाने का सोचा था वहां भी दिक्कत हो गई। अब एलईडी टीवी और होम थिएटर जैसे प्रोडक्ट में 70 फीसदी सामान चाइना का लगता है, इन सब पर असर पड़ेगा ही।"

लखनऊ के नाका बाज़ार में विनोद कुमार नहीं जानते कि कोरोना कि मार का असर कितना होगा, और कब तक होगा।

"अगर होली के बाद भी यही रहा तो मैं धंधा बदल दूंगा, चाइना का माल ही नहीं उठाउंगा, हमारे जैसों को तो रोज कुआं खोदना रोज पानी पीना है।"

'कोरोनाश' के पहले भाग में पढ़िए : Corona Virus : "टीवी चैनल वालों ने डर भर दिया है, ग्राहक सबसे पहले पूछते हैं, चाइनीज पिचकारी तो नहीं?"

(गांव कनेक्शन की सीरीज 'कोरोनाश' का तीसरे भाग में पढ़िएगा- भारत में शादी समारोह, और उससे जुड़े उद्योगों पर कैसे पड़ा असर..)

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