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गेहूं की कटाई पर कोरोना का साया, बिना मजदूर कैसे हो फसल कटाई

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   8 April 2020 6:15 AM GMT

गेहूं की कटाई पर कोरोना का साया, बिना मजदूर कैसे हो फसल कटाई

वर्ष 1947 में आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अपने एक भाषण में कहा था, "बाकी सब कुछ इंतजार कर सकता है, कृषि नहीं", लेकिन लॉकडाउन ने देश के लाखों किसानों का इंतजार बढ़ा दिया है। इससे पहले अप्रैल के पहले सप्ताह में किसान मंडियों में होते थे, अपनी मेहनत की कमाई का हिसाब-किताब कर रहे होते थे, लेकिन इस साल अभी वे कटाई को लेकर चिंतित हैं। दुआ कर रहे हैं कि फसल किसी तरह कट जाये, मंडियों तक सही सलामत पहुंच जाये।

हरियाणा के जिला करनाल, ब्लॉक गरौंदा, गांव शाहजानपुर के रहने वाले किसान सुक्रमपाल (45) पिछले एक सप्ताह से परेशान हैं। उनकी 10 एकड़ की गेहूं पककर कटने को तैयार है, लेकिन उन्हें न तो मजदूर मिल रहे हैं और न ही गेहूं कटाई की मशीनें।

वे गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "गेहूं की कटाई 12 दिन पिछड़ गई है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, मेरी चिंता भी बढ़ रही है। भगवान ना करें कहीं फिर बारिश हो गई तो सब बर्बाद हो जायेगा। बड़ी मुश्किल से तो ये फसल तैयार हुई है। बारिश और ओला ने तो वैसे ही पैदावार घटा दी। मजदूर मिल नहीं रहे हैं, मशीनें भी नहीं हैं। अब अगर कटाई नहीं हुई तो पेड़ों से गेहूं खेतों में गिरने लगेगा।"

अपने गेहूं के खेत में किसान सुक्रमपाल।

लॉकडाउन में उन किसानों की समस्या ज्यादा बढ़ गई है जो गांव से दूर रहकर खेती कराते हैं। वे अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में उनके पास यह विकल्प भी नहीं है कि खुद से ही कटाई शुरू कर दें।

महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाले अभिजीत मुरलीधर देवरे नाशिक जिले में सटाना तालुका के मूल निवासी हैं। वहां पिंगलवाड़े गांव में उनकी कृषि योग्य जमीन है, जिस पर वो खेती कराते हैं। इस बार 2 एकड़ में गेहूं था, 10 दिन पहले गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन कट नहीं पाई।

अभिजीत फोन पर बताते हैं, "मैंने पुणे पुलिस से नासिक जाने की परमिशन मांगी लेकिन मिल नहीं पाई। गांव यहां से 350 किलोमीटर दूर हैं, पुलिस कह रही है ऐसे सबको परमिशन देने लगे तो लॉकडाउन टूट जाएगा। मैं समझता हूं कि कोरोना बड़ा संकट है लेकिन फसल भी जरूरी है, देखते हैं क्या होता है, बस बारिश न हो।"

मार्च 25 से देश में लगे 21 दिनों के लॉकडाउन ने रबी फसलों के किसानों को मुसीबत में डाल दिया है। मजदूरों, हार्वेस्टर, थ्रेशर, ट्रैक्टर, ट्रकों और दूसरे उपकरणों की आवाजाही ठप होने के कारण गेहूं, दलहन, तिलहन जैसी रबी फसलों की कटाई रुक गई है। किसाना परेशान हैं। फिर मई-जून से खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी भी तो करनी है।

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कृषि मंत्रालय ने वर्ष 2019-20 में गेहूं, चावल, मोटे अनाज और दलहन आदि सहित कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 29 करोड़ 19.5 लाख टन होने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष (2018-19) 28 करोड़ 52.1 लाख टन से कहीं अधिक होगा।

रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं होती है। कृषि मंत्रालय भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है। वर्ष 2020 जनवरी के अंत तक तीन करोड़ 36.1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुआई हुई थी जबकि पिछले साल इसी दौरान गेहूं का यह रकबा दो करोड़ 99.3 लाख हेक्टेयर था। कृषि मंत्रालय की फरवरी में आई रिपोर्ट में बताया गया था कि अच्छी बरसात और ज्यादा बुआई से देश में गेहूं की पैदावार 2019-20 में 10 करोड़ 62.1 लाख टन तक पहुंच सकती है। यह गेहूं का अब तक का सबसे ज्यादा उत्पादन होगा। वर्ष 2018-19 में 10 करोड़ 36 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था जो रिकॉर्ड था। गेहूं रबी (सर्दियों) की मुख्य फसल है।

सरकार ने तो अपनी ओर से कहा है कि सामाजिक दूरी का पालन करते हुए खेतों में कटाई-मड़ाई का काम किया जा सकता है, लेकिन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 31 मार्च को जारी एक विज्ञप्ति में किसानों को राय दी है कि वे कटाई-मड़ाई का काम मशीनों के सहारे ही करें।

मजदूर न मिलने से कई जगह किसानों ने खुद ही कटाई शुरू कर दी है, लेकिन बड़ी जोत वाले किसानों के सामने ज्यादा दिक्क्त है।

गेहूं की कटाई में हो रही देरी के कारण गेहूं की सरकारी खरीद 15 से 20 दिनों पिछे चली गई है। देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में वैसे तो गेहूं की सरकारी खरीद हर साल एक अप्रैल से शुरू होती थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से इस साल गेहूं खरीद की शुरुआत 15 अप्रैल से होगी। उधर मध्य प्रदेश में कुछ जिलों को छोड़कर वहां भी सरकारी खरीद 15 अप्रैल से होगी। हरियाणा में भी पहले एक अप्रैल से गेहूं की खरीद होनी थी जो अब 20 से अप्रैल से होगी जबकि पंजाब में 20 अप्रैल से खरीद शुरू होगी।

पंजाब और हरियाणा के किसान इस समय सबसे ज्यादा चिंतित हैं। दोनों ही राज्य गेहूं उत्पादन के मामले में देश में पहले और दूसरे नंबर पर हैं। केंद्रीय पूल के कोटे में इन दोनों प्रदेशों से लगभग 70 फीसदी गेहूं जाता है जिसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत देश में बांटा जाता है। वर्ष 2018-19 में केंद्रीय पूल के तहत केंद्र ने 357.95 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था जिसमें से 126.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं पंजाब का और 87.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं हरियाणा का था। इस सीजन में इन दोनों प्रदेशों के किसान कटाई मशीन और मजदूर, दोनों को लेकन परेशान हैं।

पंजाब के फाजिल्‍का जिले के बेगावाली गांव के रहने वाले किसान नृपेंद्र सिंह कहते हैं, "मेरी गेहूं की कटाई में अभी तो चार-पांच दिन का समय है, लेकिन हमारे यहां मशीनें ही नहीं हैं। हमारी मशीनें तो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में कटाई कर रही हैं। लॉकडाउन की वजह से उनका काम भी सही नहीं हो पा रहा है। हम तो इस बात को लेकर परेशान हैं कि समय पर मशीनें नहीं आईं तो क्या करेंगे।"

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मध्य भारत के राज्यों मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में रबी सीजन की कटाई फरवरी-मार्च में ही शुरू हो जाती है। इन दोनों प्रदेशों में चना और सरसों की खेती भी खूब होती हैं। हरियाणा, पजाब से कटाई की मशीनें इन राज्यों में लॉकडाउन से पहले चली गई थीं, जो अब भी वहीं हैं।

पिछले कुछ वर्षों में राज्यवार गेहूं का उत्पादन। सोर्स- कृषि मंत्रालय, भारत सरकार

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में रहने वाले भारतीय किसान यूनियन के किसान नेता स्वामी इंद्र कहते हैं कि किसानों को मशीनें तो मिल भी जाएंगी लेकिन सबसे बड़ी समस्या मजदूरों को लेकर आने वाली हैं। वे बताते हैं, "हरियाणा-पंजाब में गेहूं की कटाई तो हो जायेगी लेकिन मंडियों में उसकी तुलाई कैसे होगी, यह बहुत बड़ी समस्या है। दोनों राज्यों में कृषि का ज्यादातर काम यूपी, बिहार से आये मजदूर करते हैं जो अपने घरों को लौट चुके हैं।"

"सामान्य सीजन में जब किसान मंडी पहुंचते हैं तो कई दिनों तक लाइन लगी रहती है, और जब इस सीजन में मजदूर ही नहीं होंगे तो काम तो पूरा रुक जायेगा। आने वाला समय किसानों के लिए ठीक नहीं है।" वे आगे कहते हैं।

मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे रीवा जिले के मऊगंज गांव के किसान सुरेश प्रसाद मिश्र ने इस साल 10 एकड़ में गेहूं में लगाया है। अच्छी बारिश के कारण फसल भी खूब अच्छी हुई है, लेकिन कटाई न होने की वजह से वे परेशान हैं।

गेहूं उत्पादन के मामले में पंजाब और हरियाण देश में सबसे आगे हैं।

वे गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "बड़ी मुश्किल से तो फसल बची इस साल। पहले बारिश फिर ओलावृष्टि और अब लॉकडाउन, लेकिन लग रहा कि इससे नहीं बच पाएंगे। गेहूं पक गई है, लेकिन अगर पांच-छह दिन देरी हुई तो फसल गिरने लगेंगी। अपने दो बच्चों के साथ कटाई कर तो रहा हूं, लेकिन इसमें बहुत समय लगेगा। "

राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ के किसान कृष्ण कुमार की लगभग सात एकड़ की फसल पककर तैयार हैं। उन्होंने पांच एकड़ में चना और दो एकड़ में गेहूं लगाया है, लेकिन वे डरे हुए हैं।

वे कहते हैं, "हमारे यहां तो ज्यादातर मजदूर राजस्थान के दूसरे क्षेत्रों से आते थे। कटाई सीजन शुरू होते ही उनका आना शुरू हो जाता है, लेकिन हमारे क्षेत्र में इंतजार ही हो रहा है। आज शाम को बादल था, हमें लगा कि कोई अनहोनी ना हो जाये, शुक्र है बादल छंट गये।"

सरकार ने मशीन से कटाई की इजाजत दी है लेकिन समस्या कंबाइन मशीन चलाने वालों की भी है। यूपी समेत कई राज्यों में जो मशीनें चलती हैं उन्हें चलाने वाले कारीगर (फोन मैन, ड्राइवर) आदि पंजाब से आते हैं। कुछ कारीगर यूपी के शाहजहांपुर में बंडा और मोहम्मदी से भी जाते हैं लेकिन उन्हें आने-जाने की इजाजत नहीं मिल पा रही है। वहीं कई जगह समस्या ये आ रही है कि किसान को मशीनों के टूल्स और पार्ट के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

यूपी के बस्ती जिले में रहने वाले पत्रकार और किसान बृहस्पति पांडे कहते हैं, "फसल पककर तैयार है लेकिन मशीनें अभी चल नहीं रही हैं।"

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यूपी सरकार और जिला प्रशासन का कहना है कि कंबाइन मशीनों के आवागमन में कोई दिक्कत नहीं है, मशीने दूसरे जिले और राज्य में भी जा सकती है। यूपी में अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा कहते हैं, "किसान की फसल कटाई और नई फसल की बुवाई में कोई दिक्कत न हो हमने उसका पूरा ध्यान रखा है। कंबाइन मशीनें और थ्रेसर चल रहे हैं। खाद और बीज की दुकानें भी बिना रोकटोक खुल रही हैं।"

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 42 किमी दूरी बाराबंकी के बेलहरा निवासी रामकुमार सिंह कहते हैं, "लॉकडाउन की वजह से हम किसानों को खासी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। गेहूं की फसल तैयार है और कटाई के लिए लेबर ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं। लॉकडाउन के पहले हमारे यहां लेबर मंडी लगती थी जहां से लेबर आसानी से मिल जाते थे। इस समय लहसुन, प्याज की खुदाई भी चल रही है, लेकिन मजदूर नहीं हैं। खुद से करेंगे भी तो सोच रहे हैं कि पहले क्या करें। पिछले और इस साल भी मौसम बहुत खराब रहा है, अब अगर फिर कहीं आंधी-बारिश हुई तो सब बर्बाद हो जायेगा। अब सब ऊपर वाले के ही हाथ में है।"

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