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एमएसपी और एपीएमपी को लेकर किसानों की आशंकाओं को खत्म करता या बढ़ाता है ये बजट?

लोगों को अनुमान था कि किसान आंदोलन को देखते हुए सरकार कृषि के लिए ऐसा बजट लाएगी जो आंदोलन के प्रभाव कम करेगा, लेकिन वित्त मंत्री ने बजट के दौरान सरकार की उपलब्धियों का ही बखान किया। सरकार ने दावा किया कि बजट से कृषि क़ानूनों को लेकर जो आशंकाएं थीं वो दूर होती हैं तो किसान संगठनों ने कहा कि हमारी शंकाएं सही साबित हो रही हैं..

Arvind ShuklaArvind Shukla   2 Feb 2021 6:30 AM GMT

एमएसपी और एपीएमपी को लेकर किसानों की आशंकाओं को खत्म करता या बढ़ाता है ये बजट?नए बजट में सरकार ने एग्री इंफ्रा फंड से मंडियों को मजबूत करने की बात कही है लेकिन किसान कृषि के कम बजट पर सवाल उठा रहे। फोटो अरविंद शुक्ला

कोरोना महामारी और किसानों के आंदोलन के बीच आए बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आत्मनिर्भर भारत का ये बजट किसानों और कृषि के लिए है। यह हमारे मेहनती अन्नदाताओं की आय को दोगुना करने में योगदान देगा और भविष्य की टेक्नॉलोजी के साथ इस क्षेत्र को मज़बूत करेगा। लोन आसानी से मिलेगा और एपीएमसी तंत्र मजबूत होगा।"

कृषि क़ानूनों को लेकर आंदोलनकारी किसानों के साथ 12 दौर की वार्ता कर चुके केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, "इस बजट में एमएसपी (MSP) के प्रति प्रतिबद्धता है तो मंडियों (APMC) को सशक्त बनाने के लिए ध्यान रखा गया है। कृषि क़ानूनों पर यही 2 शंकाएं किसानों के मन थीं, मुझे उम्मीद है किसान बजट को देखते हुए वो सकारात्मक रुप से विचार करेंगे।"


वित्त वर्ष 2021-22 के लिए सरकार ने कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए 148,301 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। सरकार की फ्लैगशिप स्कीम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए 65,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। एक लाख करोड़ के एग्रीकल्चर इंफ्रास्टैक्चर फंड से अब कृषि उपज समितियां भी धन ले सकेंगी, इसके लिए पेट्रोल-डीज़ल पर एग्रीकल्चर डेवलममेंट सेस लगाया गया है जो 2 फ़रवरी से लागू हो गया है। एक हजार और मंडियों को ENAM से जोड़ा जाएगा। कृषि ऋण के लक्ष्य को बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है।

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मौजूदा बजट 2021-22 में कृषि और उससे संबंधित सेक्टर और योजनाओं के लिए आवंटित बजट। ग्राफिक्स फराज

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में सरकार की उपब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार जो एमएसपी दे रही है वो लागत का डेढ़ गुना है। वित्त वर्ष 2021 में गेहूं की एमएसपी को लेकर 75,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जबकि धान की ख़रीद अभी जारी है और भुगतान राशि 172,752 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। दालों की ख़रीद के बदले करीब 10,503 करोड़ रुपए किसानों को दिए जाएंगे। इन आंकड़ों के जरिए सरकार ने न सिर्फ यूपीए सरकार से अपनी तुलना की बल्कि ये भी बताने की कोशिश कि तीन कृषि क़ानूनों के संबंध में उठ रही आशंकाओं (एमएसपी बंद और मंडियां खत्म) को दूर करने की कोशिश की है। लेकिन किसान संगठनों और कृषि अर्थशास्त्रियों ने इस पर सवाल उठाए हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा की सात सदस्यीय कमेटी के सदस्य योगेंद्र यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और। उन्होंने कहा, "कृषि और पशुपालन आदि मिलाकर कृषि का बजट 154 हजार करोड़ रुपए था वो घटाकर 148 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है। यानि छह हजार करोड़ रुपए कम किया है। पिछले साल सरकार ने अपने बजट का 5.1% कृषि को दिया था इस बार इसे 4.3% कर दिया है।"

"पीएम किसान योजना का बजट पिछले साल 75,000 करोड़ रुपए था जो इस बार 65,000 करोड़ रुपए है। किसान को एमएसपी दिलाने के लिए जो स्कीमें हैं उनमें एमआईएस, पीएम आशा उनका भी बजट कम हुआ है। एमआईएस को 20,000 करोड़ रुपए से घटाकर 15,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। जिस एक लाख करोड़ रुपए के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की ज़ोर-शोर से बात हो रही है। पिछले दिनों सरकार ने उस पर सिर्फ 200 करोड़ खर्च किए और अब 900 करोड़ आवंटित किए हैं। बात किसान की और काम उद्योगपतियों का। किसान इस आंकड़ेबाजी का जवाब देंगे," योगेंद्र यादव ने आगे कहा।

आम बजट से सबसे ज्यादा निराशा आम किसानों को पीएम किसान निधि योजना से हुई है। लोगों को उम्मीद थी कि सरकार साल में मिलने वाले 6,000 रुपए को बढ़ाएगी। यूपी में बाराबंकी जिले के युवा किसान उपेंद्र शुक्ला कहते हैं, "जिस हिसाब से डीज़ल और पेस्टीसाइड आदि के दाम बढ़े हैं हमें लगा रहा था महीने के 500 रुपए की जगह 1,000 रुपए तो बजट में हो सकते हैं। लेकिन इस बजट में सीधे किसानों के लिए कुछ नहीं है।"

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बजट में कृषि क्षेत्र के इंफ्रास्टैक्टर पर जोर नजर आती है लेकिन जो छोटे किसान पीएम किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे उन्हें निराशा हुई।

सोमवार को पेश किए बजट में वित्त मंत्री ने 2021-22 के लिए उर्वरक सब्सिडी 79,530 करोड़ रुपए रखी है जबकि 2020-21 के संशोधित अनुमानों में ये राशि 133,947 करोड़ रुपए थी। बाजार हस्तक्षेप योजना और मूल्य समर्थन योजना यानि (MIS-PSS) का बजट 2021-22 में 1,501 करोड़ है जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में ये बजट 2,000 करोड़ रुपए था। संशोधित अनुमानों में ये 996 करोड़ रुपए था। जबकि 2019-20 में ये आवंटन 2,005 करोड़ रुपए का था। फसल बीमा योजना का इस बजट में आवंटन 16,000 करोड़ रुपए है जबकि 2020-21 में 15,695 करोड़ रुपए था। संशोधित अनुमानों में ये राशि 15,307 करोड़ रुपए थी।

बजट को लेकर देश के प्रख्यात खाद्य एवं निर्यात नीति विशेषज्ञ देविंदर शर्मा कहते हैं, "पिछली 2 तिमाही में जिस तरह से कृषि ने ग्रोथ दिखाई है, उसे देखते हुए वित्त मंत्री से बड़ी अपेक्षा थी, लेकिन वैसा हुआ नहीं। आरबीआई के अनुसार, 2011-12 और 2017-18 के बीच, कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र का निवेश सकल घरेलू उत्पाद का केवल 0.4 प्रतिशत था। इसलिए पेट्रोल और डीज़ल पर सेस लगाकर एक कृषि निवेश कोष बनाने का प्रस्ताव एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन सबसे अच्छा तरीका यह है कि कृषि निवेश के लिए निश्चित प्रावधान करना होगा जैसे रेल, सड़क और पूँजी निवेश के लिए घोषणाएँ की जाती हैं।"

बजट में एमएसपी के आंकड़ों पर देविंदर शर्मा कहते हैं, "सरकार एमएसपी पर ख़रीद की बढ़ोतरी की बात कर रही लेकिन एमएसपी तो मिलती ही 6 फीसदी किसानों को है, बाकी किसानों का क्या होगा? किसान तो सभी के लिए एमएसपी कानून की मांग की मांग कर रहे।"

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में 1,000 मंडियों को National Agriculture Market (eNAM) जोड़ने की बात कही है। सरकार के मुताबिक देश में 1,000 मंडियां पहले से eNAM से जुड़ी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि एक लाख करोड़ के एग्री इंफ्रा फंड में पहले मंडियां नहीं थी। अब मंडियां इस पैकेज से फंड लेकर अपने को मजबूत बना सकेंगी। वहां इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ें होगे, इससे किसानों को फायदा होगा।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में 2,477 बड़ी एपीएमसी (कृषि उपज एंव बाजार समिति) हैं जबकि 4,843 उप एपीएमसी हैं। कृषि सुधारों के लिए यूपीए सरकार में बनाए गए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक देश में 42,000 मंडियों की जरुरत है। देविंदर शर्मा कहते हैं, "ग्रामीण इलाकों की हाट बाजारों को अब और अधिक अनदेखा नहीं किया जा सकता है। सरकार ने तो काफी पहले 22,000 गाँव हाटों को अपग्रेड करने और उन्हें राष्ट्रीय ई मंडी नेटवर्क से जोड़ने की बात कही थी।

अखिल भारतीय किसान मज़दूर सभा के महासचिव आशीष मित्तल कहते हैं, "सरकार की मोटी योजना एग्रीकल्चर को खत्म करके कॉरपोरेट को बढ़ावा देना है। सब कुछ प्राइवेट को ही करना है।"

नए कृषि कानून लागू होने के बाद देश में न तो कोई मंडी बंद हुई, न एमएसपी बंद हुई। बल्कि ये कानून बनने के बाद एमएसपी पर खरीद बढ़ी है। मैं पूछना चाहता हूं कि पहले जो हक और व्यवस्थाएं थीं, उनमें से कुछ भी नए कानून ने छीना है क्या? नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा के दौरान

इस बजट से एक बार फिर चर्चा में आए एग्री इंफ्रा फंड की घोषणा 9 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में कोल्ड स्टोरेज, भंडारण के लिए गोदाम और खाद्य प्रंस्सकरण इकाइयों का निर्माण और उनमें सहयोग प्रमुख है। इस फंड का लाभ किसान, एफपीओ, महिलाओं के स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियां, कृषि उद्यमी और किसान उत्पादन संघ (एफपीओ) आदि उठा रहे हैं।

बजट सत्र की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा था, "नए कृषि सुधारों से देश के 10 करोड़ किसानों को तुरंत लाभ मिलना शुरु हुआ है।" इस लाभ के केंद्र में ये एग्री इंफ्रा फंड भी बताया जा रहा है। बजट में कृषि से जुड़े स्टार्टअप और उद्ममों पर खासा ज़ोर रहा है।

यूपी, छत्तीसगढ, झारखंड और बिहार समेत 6 राज्यों के 3 लाख से ज्यादा किसानों के साथ काम कर रहे एग्री स्टार्टअप देहात DeHaat के को-फाउंडर श्याम सुंदर सिंह कहते हैं, "बजट में काफी बेसिक चीजों पर फोकस किया गया है। अच्छा है। इंफ्रास्ट्रक्चर की बात है मंडियों को ऑनलाइन करने की बात है। एग्री इंफ्रा फंड के आसपास काफी फोकस है। कुछ को सीधा फायदा मिलेगा कुछ को सरल इको सिस्टम के तहत फायदा मिलेगा। छोटी कंपनियों की परिभाषा बदली है। पहले वो 2 करोड़ रुपए तक की फंडिंग ले सकते थे अब उनमें 20 करोड़ रुपए तक का निवेश हो सकेगा।"

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खबर बजट पर चर्चा के दौरान अपडेट की गई।

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