विशेष : घुटने वाली हैं सांसें, भारत में एक व्यक्ति के लिए सिर्फ 28 पेड़ बचे

विशेष : घुटने वाली हैं सांसें, भारत में एक व्यक्ति के लिए सिर्फ 28 पेड़ बचेफोटो: इंटरनेट

सरकार दिल्ली में फैल रहे वायु प्रदूषण को लेकर चिंतित है, हालांकि हाल में सरकार ने एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषित हवा की खराब गुणवत्ता को ठीक करने के लिए अब सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। सरकार ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझाव पर वायु मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने का फैसला लिया है, मगर इससे अलग स्वच्छ पर्यावरण को लेकर भी सवाल उठना लाजमी है। भारत में पेड़ों की स्थिति पर पढ़िए गाँव कनेक्शन की खास रिपोर्ट...

भले ही सरकारें पर्यावरण की रक्षा करने के लिए नई-नई परियोजनाएं लाती हैं और करोड़ों पेड़ लगाने के बाद उनका देखभाल करना भूल जाती है, इससे इतर हैरान करने वाली बात यह है कि भारत में अब प्रति व्यक्ति सिर्फ 28 पेड़ बचे हैं और इनकी संख्या साल दर साल कम होती जा रही है।

जरूरी है दूसरे देशों की तरफ देखें

हाल में जारी हुई नेचर जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में एक व्यक्ति के लिए 422 पेड़ मौजूद हैं। दूसरे देशों की बात करें तो पेड़ों की संख्या के मामले में रूस सबसे आगे हैं। रूस में करीब 641 अरब पेड़ हैं, जो किसी भी देश से ज्यादा हैं। इसके बाद 318 अरब पेड़ों की संख्या के साथ कनाडा दूसरे स्थान पर, 301 अरब पेड़ों की संख्या के साथ ब्राजील तीसरे स्थान पर और 228 अरब पेड़ों की संख्या के साथ अमेरिका चौथे स्थान पर है।

भारत में सिर्फ 35 अरब पेड़

और देशों की तुलना के वैश्विक अनुपात के मुताबिक, भारत में सिर्फ 35 अरब पेड़ हैं यानी एक व्यक्ति के लिए सिर्फ 28 पेड़। गौर करने वाली बात यह है कि हम दुनियाभर में हर साल करीब 15.3 अरब पेड़ खो रहे हैं, यानी कि प्रति व्यक्ति के अनुसार दो पेड़ से भी ज्यादा का नुकसान हर साल हो रहा है। दूसरी ओर की तस्वीर यह है कि हम बहुत कम संख्या में पौधे लगा रहे हैं। नेचर जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में पांच अरब पेड़ हर साल लगाए जा रहे हैं और जबकि हम हर साल 10 अरब पेड़ का नुकसान उठा रहे हैं।

3.04 लाख करोड़ पेड़ अब तक काटे गए

मानव सभ्यता की शुरुआत से लेकर अब तक 3.04 लाख करोड़ पेड़ काटे जा चुके हैं। यानी कि बड़ी संख्या में आज भी पेड़ जा रहे हैं। नेचर जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, मानव सभ्यता की शुरुआत से मौजूद पेड़ों में अब तक 46 प्रतिशत तक कमी आ चुकी है। सिर्फ इतना ही नही, दुनियाभर में हर साल 10 अरब पेड़ काटे जा रहे हैं।

दुनियाभर में पेड़ मौजूद

रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में पेड़ों की संख्या में सबसे ज्यादा 45.7 प्रतिशत उष्णकटिबंधीय और उप उष्णकटिबंधीय पेड़ हैं, वहीं बोरियल पेड़ों की संख्या 24.3 प्रतिशत है, जबकि शीतोष्ण पेड़ों की संख्या 20 और अन्य पेड़ों की संख्या 10 प्रतिशत है।

'हर इंसान को करनी होगी मदद'

देश में पेड़ों की तेजी से गिरती संख्या पर उत्तर प्रदेश के वन विभाग के सचिव एसके पाण्डेय कहते हैं, "हमारा हमेशा यह प्रयास है कि पेड़ों की संख्या बढ़ें, मगर फैले भ्रष्टाचार की वजह से पेड़ों की चोरी और कटने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। जब हमें सूचना मिलती है तो हम तुरंत एक्शन लेते हैं, अवैध रूप से चल रही आरा मशीनों को भी बंद करवाते हैं, कार्रवाई समय-समय पर होती रहती हैं, मगर इसके बावजूद बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं।" वह आगे कहते हैं, "पेड़ों को बचाने के लिए हर व्यक्ति को हमारी मदद करनी होगी, हम अकेले कुछ नहीं कर सकते हैं। जरुरत है कि न सिर्फ पेड़ों को लगाएं, बल्कि उसकी देखभाल भी करें। इसके अलावा कहीं भी पेड़ कटने या चोरी होने की घटनाओं पर विभाग को सूचित करें ताकि हम तुरंत एक्शन ले सकें।"

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'लोगों को जागरूक होने की जरुरत'

सचिव एसके पाण्डेय ने आगे कहा, "लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की जरुरत है। वन विभाग की ओर से अगर पेड़-पौधे लगाए जाते हैं तो उन्हें जानवरों को खिला दिया जाता है या फिर कटवा डालते हैं। लोगों को अपने आस-पास पेड़-पौधों की देखभाल करनी चाहिए।"

'मूर्तियां ऑक्सीजन नहीं देती हैं'

वहीं, अब तक अलग-अलग क्षेत्रों में हजारों पेड़-पौधे लगा चुके पेड़ वाले बाबा के नाम से मशहूर मनीष तिवारी कहते हैं, "मैं यह हमेशा से कहता हूं कि पेड़-पौधे ही जीवन हैं, किसी की भी याद में लगाई गई मूर्तियां ऑक्सीजन नहीं देती, बल्कि पेड़ ऑक्सीजन देते हैं। इसलिए हमें पेड़-पौधों के महत्व को समझना चाहिए और हर व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए।"

628 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में आई कमी

भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के समग्र वन क्षेत्रों में एक चौथाई उत्तर-पूर्व के राज्यों में है और पिछले मूल्यांकन की तुलना में उत्तर-पूर्व के राज्यों में 628 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में कमी आई है। देश में पेड़ों तथा वनों का समग्र क्षेत्रफल 794,245 वर्ग किलोमीटर (79.42 मिलियन हेक्टेयर) है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 24.16 प्रतिशत है।

अब बात प्रदूषण की करते हैं

प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल, द लांसेट में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, भारत में प्रदूषण से हुई मौतों के मामले में साल 2015 में भारत 188 देशों की सूची में पांचवे स्थान पर रहा है। दुनियाभर में हुई करीब 90 लाख मौतों में से 28 प्रतिशत मौतें अकेले भारत में हुई हैं। यानी यह आंकड़ा 25 लाख से ज़्यादा है। ये मौतें वायु, जल और अन्य प्रदूषण के कारण हुई हैं।

एक दिन में लगाए थे पांच करोड़ पौधे मगर...

पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए पिछले साल उत्तर प्रदेश में 24 घंटे में पांच करोड़ पौधे लगाकर रिकॉर्ड बनाया गया था। इन पौधों की निगरानी करने के लिए सेटेलाइट सिस्टम का भी प्रयोग किया जाना था, लेकिन सेटेलाइट सिस्टम से पौधों की निगरानी के दावे हवा-हवाई साबित हुए। अधिकारियों का दावा था कि इन पौधों का संरक्षण किया जाएगा, मगर कई लाख पौधे देखरेख के अभाव में खराब हो गए थे।

भारत में वायु प्रदूषण से हर मिनट होती है दो की मौत

चिकित्सीय पत्रिका 'द लांसेट' के अनुसार, हर साल वायु प्रदूषण के कारण 10 लाख से ज्यादा भारतीय मारे जाते हैं। अध्यन्न के अनुसार, उत्तर भारत में छाया स्मॉग भारी नुकसान कर रहा है और हर मिनट भारत में दो जिंदगियां वायु प्रदूषण के कारण चली जाती हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण सभी प्रदूषणों में सबसे घातक प्रदूषण बनकर उभरा है।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से लोगों की 6 साल तक घटी उम्र

आईएमए के एक अध्यन्न के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों की जिंदगी खतरनाक वायु प्रदूषण की वजह से लगभग 6 साल कम हो चुकी है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है। दूसरी ओर, एनसीआर में डब्लूएचओ के मानकों को लागू किया जा सका तो लोग 9 साल तक अधिक जीवित रहेंगे।

'हमें लगाने होंगे अधिक से अधिक पेड़'

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के लालगंज में 102 बीघे के बौझारी जंगल लोगों ने खत्म कर दिया था। ऐसे में पर्यावरण के प्रति अपने स्तर पर काम कर रहे अजय क्रांतिक्रारी ने पर्यावरण सेना तैयार की और उसमें पांच हजार लोगों को जोड़ा। अजय क्रांतिकारी कहते हैं, "हमारी पर्यावरण सेना ने इस जंगल में दस हजार से ज्यादा पेड़ लगाए।" वह आगे कहते हैं, "पर्यावरण के प्रति अब हम लोगों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने होंगे, ताकि देश में पर्यावरण की स्थिति सुधरे।"

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