‘सरकार मुआवजा उसे दे रही जो मारने आया था’

‘सरकार मुआवजा उसे दे रही जो मारने आया था’जले घर के सामने खड़ी महिला 

सहारनपुर। शब्बीरपुर जातीय संघर्ष के दौरान मरे युवक को सरकार की तरफ से 15 लाख रुपए का मुआवजा देने के बाद दलित समुदाय में नाराज़गी है। पांच मई को शब्बीरपुर में दलित और राजपूत समुदाय के बीच जातीय संघर्ष हुआ था, जिसमें दलितों समुदाय के 25 से ज्यादा घरों को जला दिया गया था। आगजनी और मारपीट के दौरान एक राजपूत युवक सुमित कुमार की मौत हो गई थी। सरकार द्वारा सुमित के परिवार को स्थानीय विधायक ब्रजेश सिंह और सहारनपुर के सांसद राघव लेखन पाल की उपस्थिति में 15 लाख रुपए का चेक सौंपा गया।

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25 से ज्यादा घरों को जला दिया गया था.

शब्बीरपुर निवासी और घटना में बुरी तरफ घायल हुए अग्नि भास्कर (41 वर्ष) कहते हैं, ‘‘सरकार मुआवजा उस व्यक्ति को दे रही है जो किसी को मारने और जलाने आया था। जो लड़का मरा है वो रसूलपुर टोंक 20 किलोमीटर गाँव का रहने वाला था। घटना के दौरान वो यहां कैसे आया था। पोस्टमार्टम में भी मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। सरकार को पीड़ितों का दर्द सुनना चाहिए।’’

जिन-जिन लोगों ने एफआईआर दर्ज कराया था उन-उन परिवारों को एक-एक लाख रुपए देने की घोषणा की गई है। ऐसे 48 लोग हैं। इन लोगों को मुआवजे की पहली क़िस्त 25 हज़ार रुपए भेज दी गई है। इसके अलावा जिनके छोटे-छोटे नुकसान हुए हैं, जैसे किसी की गाड़ी जल गई हो या साइकिल जल गई हो उन्हें नुकसान के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
नागेन्द्र प्रसाद सिंह, डीएम सहारनपुर

शब्बीरपुर निवासी मिठू कुमार (22 वर्ष) कहते हैं, ‘‘हम लोगों का घर जला है तो स्थानीय विधायक और सांसद हमारा हाल भी जानने नहीं आए और जो घर जलाने वाला था उसे 15 लाख रुपए का चेक देने पहुंच गए। हमें अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। आज अख़बारों में पढ़ा कि 25-25 हज़ार रुपए दिए जाएंगे। घर जल गया और 25 हज़ार रुपए दे रहे हैं।”

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शब्बीरपुर गाँव के पड़ोसी गाँव चंद्रपुर गाँव के पूर्व प्रधान महेन्द्र सिंह (60 वर्ष) बताते हैं, “पीड़ितों को भी मुआवजा देने की बात हुई है। गहरे रूप से घायल संत कुमार को एसडीएम ने एक लाख रुपए का चेक सौंपा है। 48 लोगों को एक-एक लाख और 44 लोगों को नुकसान के अनुसार मुआवजा देने की बात डीएम साहब ने कही है।”

पूर्व प्रधान महेन्द्र सिंह

हिंसा के दौरान मरे युवक को 15 लाख रुपए देने की बात पर महेंद्र सिंह कहते हैं, “जो आदमी 20 किलोमीटर दूर से किसी का घर जलाने और कत्ल करने आया था उसे सरकार वीरता का पुरस्कार दे रही है। जबकि उसकी मौत हिंसा से नहीं हुई दम घुटने से हुई है।’’

सहारनपुर के डीएम नागेन्द्र प्रसाद सिंह बताते हैं, ‘‘जिन-जिन लोगों ने एफआईआर दर्ज कराया था उन-उन परिवारों को एक-एक लाख रुपए देने की घोषणा की गई है। ऐसे 48 लोग हैं। इन लोगों को मुआवजे की पहली क़िस्त 25 हज़ार रुपए भेज दी गई है। इसके अलावा जिनके छोटे-छोटे नुकसान हुए हैं, जैसे किसी की गाड़ी जल गई हो या साइकिल जल गई हो उन्हें नुकसान के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। शब्बीरपुर में कुल पांच लाख 12 हज़ार रुपए का नुकसान हुआ है। सभी मुआवजा साम्प्रदायिक प्रकोष्ट से दिए गए हैं।’’

सरकार मुआवजा उस व्यक्ति को दे रही है जो किसी को मारने और जलाने आया था। जो लड़का मरा है वो रसूलपुर टोंक 20 किलोमीटर गाँव का रहने वाला था। घटना के दौरान वो यहां कैसे आया था। पोस्टमार्टम में भी मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। सरकार को पीड़ितों का दर्द सुनना चाहिए।
अग्नि भास्कर, शब्बीरपुर

दलित समुदाय के आरोप कि लोगों को मारने और आगजनी करने आए युवक को 15 लाख का मुआवजा क्यों दिया गया जबकि उसकी मौत दम घुटने से हुई है इसके जवाब में नागेन्द्र प्रसाद सिंह कहते हैं, “पुलिस ने जो जानकारी मुझे दी है उसमें युवक की मौत पत्थरबाजी के दौरान हुई है। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में यह नहीं बताया कि मौत किस तरह हुई है और न ही यह बताया गया है कि वह वहां आग लगाने ही आया था। जिसकी मौत हुई वह गरीब घर का था तो सम्वेदना के आधार पर सांप्रदायिक प्रकोष्ट से 15 लाख रुपए दिया गया है।”

जातीय हिंसा में 10 से बाइक जला दी गई.

बरगांव थाने के एसएचओ मानिंद सिंह के अनुसार, पोस्टमार्टम में सुमित की मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। वहीं सहारनपुर के एसएसपी सुभाष चन्द्र दुबे बताते हैं, ‘‘सुमित की मौत का कारण मुझे नहीं पता है। मैंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं पढ़ा है। इस मामले में अभी तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और मामले की जांच चल रही है। जो भी व्यक्ति दोषी होगा उसपर कारवाई की जाएगी।’’

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First Published: 2017-05-14 21:42:19.0

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