कैसा हो सकता है इस बार का आम बजट?

एक फ़रवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारण वित्त वर्ष 2021-22 के लिए सरकार की आमदनी और ख़र्चों का लेखा-जोखा पेश करेंगी। कोरोना वायरस महामारी के दौरान पेश होने वाले इस बजट पर देश भर की निगाहें लगी हुई हैं। देश के हर वर्ग ने इस बजट से राहत की उम्मीद लगा रखी है। कैसा हो सकता है यह आम बजट?

Israr Ahmed SheikhIsrar Ahmed Sheikh   31 Jan 2021 5:30 AM GMT

union budget 2021-22, budget 2021 22, general budget 2021, budget 2021स्वास्थ्य और स्वास्थ्य पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती हैं।

नई दिल्ली। एक फ़रवरी को पेश होने वाला आम बजट कैसा होगा इसके कुछ संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही दे चुके हैं। संसद के बजट सत्र की शुरुआत से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ये इस दशक का पहला बजट है। उन्होंने कहा था कि ये भारत के इतिहास में शायद पहली बार हुआ है कि वित्त मंत्री ने 2020 में एक बजट नहीं बल्कि अलग-अलग पैकेज के रूप में चार-पांच बजट पेश किए हैं। इसलिए इस बजट को भी उन पिछले 'चार बजटों' की श्रृंखला में देखा जाएगा। आपको बता दें कि कोरोनावायरस महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों और आम लोगों के लिए कई चरणों में राहतों का ऐलान किया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कह चुकी हैं कि ये इस सदी का ऐतिहासिक बजट होगा।

टैक्स में राहत

इस बजट में सरकार का पूरा ध्यान कोरोनावायरस महामारी और उसके कारण लगे लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था की सुस्त पड़ चुकी रफ़्तार को गति देना होगा। इस बजट में नौकरीपेशा लोगों को इंकम टैक्स में छूट दिए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। सरकार, इंकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडेक्शन को 50 हज़ार से बढ़ाकर एक लाख तक कर सकती है। जानकारों का कहना है कि वित्त मंत्री इंकम टैक्स के स्लैब में बदलाव करके नौकरीपेशा लोगों और जीएसटी में छूट के ज़रिए व्यापारियों और उद्योगों को राहत दे सकती है। ये भी माना जा रहा है कि स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम पर मिलनी वाली छूट की सीमा भी बढ़ सकती है और

स्वास्थ्य

आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 कहता है कि कोरोनावायरस महामारी की वजह मरने वालों की संख्या और कम हो सकती थी अगर स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारा बुनियादी ढांचा मज़बूत होता। सर्वे में स्वास्थ्य पर होने वाले ख़र्च को बढ़ाकर लगभग दोगुना करने की सलाह दी गई है। सर्वे में मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमणियन के सलाह पर अमल करते हुए सरकार इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे सकती है।

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स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट राशि पिछले सालों की तुलना में काफ़ी अधिक हो सकती है। पिछले साल के बजट में वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य के लिए 67,484 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए थे। माना जा रहा है कि पहली छमाही के बाद हुए संशोधित अनुमानों में इस राशि को बढ़ा दिया गया है। इसकी जानकारी पहली फ़रवरी को बजट पेश होने के बाद ही मिल पाएगी।

कृषि

स्वास्थ्य के अलावा जिस क्षेत्र में वित्त मंत्री का ख़ास ध्यान रहेगा वो है कृषि क्षेत्र। देश के कई राज्यों के हज़ारों किसान पिछले दो महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओँ पर डेरा डालकर बैठ गए हैं। इन किसानों की मांग है कि सरकार तीनों कृषि कानून वापस ले और किसानों की फ़सलें एमएसपी से कम पर न ख़रीदी जाएं, इसके लिए कानून बनाए। सरकार कानूनों की वापसी की बजाए उनमें संशोधन को तैयार है। मगर किसान नहीं मान रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है सरकार किसानों के बीच अपनी छवि को सुधारने के लिए कृषि क्षेत्र के लिए कई ऐलान कर सकती है। माना जा रहा है कि पिछले साल की तुलना में इस बार कृषि का बजट बढ़ाया भी जा सकता है।

इंकम टैक्स और जीएसटी में राहत की ख़बरों के साथ ये अनुमान भी लगाया जा रहा है कि सरकार इस साल एजुकेशन सेस की तरह से ही कोरोना सेस भी लगा सकती है। माना जा रहा है कि ये कोरोना सेस 2% तक हो सकता है। यह सेस लगभग तीन साल के लिए हो सकता है। जानकारों का कहना है कि वैसे तो यह सेस सभी पर लग सकता है लेकिन हो सकता है आम लोगों की तुलना में कॉरपोरेट के लिए यह सेस अधिक हो सकता है।

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इस बजट में सामाजिक सुरक्षा, स्किल डवेलेपमें, इंफ़्रास्ट्रक्चर, पीने का पानी और साफ़-सफ़ाई जैसे मुद्दों पर भी सरकार का ख़ास ध्यान रहेगा। इन मुद्दों के ज़रिए सरकार बेरोज़गारी, सुस्त अर्थव्यवस्था, कमज़ोर कारोबार जैसी समस्याओं के समाधान की कोशिश करेगी। इनके अलावा बजट में वित्त मंत्री का फ़ोकस जिन मुद्दों पर रह सकता है वो हैं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश, राजकोषीय नीति, बीमा क्षेत्र और बॉंड मार्केट।

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