आजाद भारत को हवा में सलामी देने वाले एयरफोर्स मार्शल अर्जन सिंह का निधन

आजाद भारत को हवा में सलामी देने वाले एयरफोर्स मार्शल अर्जन सिंह का निधनएयरफोर्स मार्शल अर्जन सिंह।

नई दिल्ली। एयरफोर्स के इकलौते मार्शल अर्जन सिंह नहीं रहे। वे 98 साल के थे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार सुबह दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शाम को नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण उनका हाल जानने के लिए हॉस्पिटल पहुंचे थे। मार्शल अर्जन सिंह महज 44 साल की उम्र में एयरफोर्स चीफ बने थे। पाकिस्तान के साथ 1965 की जंग में उतरी एयरफोर्स की कमान उनके ही हाथों में थी। बता दें कि देश की तीनों सेनाओं में अब तक तीन मार्शल हुए हैं। अर्जन सिंह उनमें से एक थे।

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तीसरे मार्शल थे अर्जन सिंह

1970 में भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए अर्जन सिंह को भारत सरकार ने जनवरी 2002 में वायुसेना का मार्शल रैंक दिया था। मार्शल रैंक फ़ील्ड मार्शल के बराबर होता है जो केवल थल सेना के अफ़सरों को दिया जाता रहा था। के.एम. करियप्पा और सेम मानेकशॉ दो ऐसे थल सेना के जनरल थे जिन्हें फ़ील्ड मार्शल बनाया गया था। अर्जन सिंह वायु सेना और ग़ैर थल सेना के ऐसे पहले अफ़सर थे जिन्हें मार्शल का रैंक दिया गया था। अर्जन सिंह तीसरे मार्शल थे।

19 साल की उम्र में पायलेट ट्रेनिंग के लिए चुना गया

15 अप्रैल 1919 में पंजाब के लायलपुर में जन्मे अर्जन सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मॉन्टेगोमेरी स्कूल से पूरी की थी। 19 साल की उम्र में रॉयल एयरफ़ोर्स कॉलेज क्रानवेल में एंपायल पायलट ट्रेनिंग कोर्स के लिए उन्हें चुना गया था। 1944 में स्क्वॉड्रन लीडर के रूप में उन्हें पदोन्नति दी गई और उन्होंने बर्मा में अराकन अभियान के दौरान जापानी सेना के ख़िलाफ़ अपने हवाई दस्ते का नेतृत्व किया। इसके लिए उन्हें ब्रिटिश सेना के प्रतिष्ठित फ्लाइंग क्रॉस पुरस्कार से नवाज़ा गया।

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45 साल की उम्र में भारतीय वायु सेना के प्रमुख बने

15 अगस्त 1947 को जब देश स्वतंत्र हुआ तब अर्जन सिंह को 100 भारतीय वायु सेना के उन विमानों का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई जो दिल्ली और लाल किले के ऊपर से गुज़रे थे। 1 अगस्त 1964 को 45 साल की उम्र में वह भारतीय वायु सेना के प्रमुख बने और अर्जन सिंह ऐसे पहले वायु सेना प्रमुख थे जिन्होंने चीफ़ ऑफ़ एयर स्टाफ़ यानी प्रमुख रहते हुए भी वो विमान उड़ाते रहे और अपनी फ्लाइंग कैटिगरी को बरकार रखा। उन्होंने अपने कार्यकाल में 60 तरह के विमान उड़ाए जिनमें विश्वयुद्ध 2 के वक्त के बाइप्लेन से ले कर नैट्स और वैम्पायर प्लेन शामिल हैं।

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