अब डकैतों के लिए नहीं, इस संग्रहालय के लिए जाना जाएगा चंबल

इस संग्रहालय में अब तक करीब 14 हजार किताबें, सैकड़ो दुर्लभ दस्तावेज, विभिन्न रियासतों के डाक टिकट, विदेशों के डाक टिकट, राजा भोज के दौर से लेकर सैकड़ो प्राचीन सिक्के, सैकड़ों दस्तावेजी फिल्में आदि उपलब्ध हो चुके हैं।

अब डकैतों के लिए नहीं, इस संग्रहालय के लिए जाना जाएगा चंबलसाभार: इंटरनेट


कभी यहां की घाटियों में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजती थी, डकैतों के आतंक से लोग जाना नहीं चाहते थे, लेकिन आज वही चंबल संग्रहालय के लिए जाना जाएगा।

इस संग्रहालय में अबतक करीब 14 हजार किताबें, सैकड़ो दुर्लभ दस्तावेज, विभिन्न रियासतों के डाक टिकट, विदेशों के डाक टिकट, राजा भोज के दौर से लेकर सैकड़ो प्राचीन सिक्के, सैकड़ों दस्तावेजी फिल्में आदि उपलब्ध हो चुके हैं। संग्रहालय में आठ कांड रामायण से लेकर रानी एलिजाबेथ के दरबारी कवि की 1862 में प्रकाशित वह किताब भी मौजूद है, जिसके हर पन्ने पर सोना है।

यहां दुर्लभ और दुनिया के सबसे पुराने स्टांप, डाक टिकट भी होंगे। इसके साथ ही यहां ब्रिटिश काल से लेकर दुनिया भर के करीब चालीस हजार डाक टिकट मौजूद हैं. इसके अलावा संग्रहालय में करीब तीन हजार प्राचीन सिक्कों का कलेक्शन भी किया जा चुका है। चंबल संग्राहलय को सहयोग और शोध के लिए विदेशों से भी लोग संपर्क कर रहे हैं। यह वाकई सुखद है कि जहां सिर्फ बदहाली और डकैतों के खौफनाक किस्से हैं, उस हिस्से में संग्रहालय बन चुका है।



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चंबल संग्रहालय में सहेजी जा रही अमूल्य किताबें

चंबल संग्रहालय की शुरूआत करने वाले 2700 किमी की चंबल संवाद यात्रा साईकिल से करने वाले शाह आलम बताते हैं, "इसी शोध यात्रा के दौरान ज़ेहन में चंबल संग्रहालय का ख्वाब बुना गया था। फिर मार्च, 2018 में चंबल संग्रहालय की यात्रा की शुरूआत हुई। संग्रहालय को बेहतर बनाने के लिए और भी शोध सामग्री तलाश की जा रही है।"

वो आगे बताते हैं, "पहले चरण में सन्दर्भ सामग्री के संरक्षण के लिये डिजिटाइजेशन, लेमिनेशन आदि पर बीते तीन महीने से शिद्दत से काम चल रहा है। दुर्लभ वस्तुओं की सहेजने वाले किशन पोरवाल की पांच दशकों की कड़ी मेहनत और दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम की दो दशकों की सामग्री से यह यात्रा शुरू हुई है। चंद ही दिनों में इस पहल से आज तमाम लोग खुले दिल से जुड़ रहे हैं।"

आठ कांड रामायण से लेकर रानी एलिजाबेथ के दरबारी कवि की किताब मौजूद

चंबल संग्रहालय में आठ कांड की रामायण, जिसमें लव कुश कांड भी है। प्राचीन गीता, संस्कृत और उर्दू में साथ-साथ लिखी दुर्लभ मनुस्मृति तो है ही, रानी एलिजावेथ के दरबारी कवि की 1862 में प्रकाशित वह किताब जिसके हर पन्ने पर सोना है, भी यहां मौजूद है। 1913 में छपी एओ ह्यूम की डायरी, प्रभा पत्रिका के सभी अंक, चांद का जब्तशुदा फांसी अंक और झंडा अंक, गणेश शंकर विद्यार्थी जी द्वारा अनुदित 'बलिदान' और आयरलैण्ड का इतिहास पुस्तक, जिस पढ़कर नौजवान क्रांतिकारी बनने का ककहरा सीखते थे की मूल प्रति. तमाम गजेटियर, क्रांतिकारियों के मुकदमें से जुड़ी फाइलों के इलावा देश और विदेश की 18वीं और 19वीं शताब्दी के हर मुद्दों की दुर्लभ किताबों का जखीरा मौजूद है।

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इन दुर्लभ पत्रिकाओं का भी है जखीरा

सरस्वती, माधुरी, विश्वमित्र, चांद, प्रभा, सुधा, विश्व मित्र, सुकवि, कन्या मनोरंजन, नवजीवन विशाल भारत, हंस, सारिका, धर्मयुग, दिनमान, साप्ताहिक हिन्दुस्तान आदि सहित देश-विदेश की सात हजार दुर्लभ पत्रिकाएं के इलावा प्रमूख साहित्यकारों की दुर्लभ कृतियां आकर्षित कर रही हैं। आजादी आंदोलन के दौरान के साहित्य का जखीरा मौजूद है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सैड़को प्रत्रिकाओं के प्रवेशांक भी मौजूद है। आजादी के पहले के कुछ मैगजीनों के भेजे गए टिकट लगे लिफाफे भी संरक्षित किये गए हैं।


दुनिया से सबसे पुराने स्टांप-डाक, प्राचीन सिक्कों का भी कलेक्शन

चंबल संग्रहालय में डाक टिकट और स्टांप भी सहेजे जा रहे हैं। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा स्टेट का स्टांप, इसे दुनिया का सबसे पुराना स्टांप माना जाता है, यहां मौजूद है. इसके साथ ही ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा जारी स्टांप का संग्रह, तथागत बुद्ध की 2550वीं जयंती पर जारी स्टांप, आजादी की 25वीं वर्षगांठ पर भारत और सोवियत संघ द्वारा जारी स्टांप, जंग-ए-आजादी 1857 की 150वीं वर्षगांठ पर रानी लक्ष्मीबाई पर जारी स्टांप प्रमुख संकलन में हैं। देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. आर. वेंकटरमन को विदेशी दौरों के दौरान गिफ्ट अनोखे डाक टिकटों का संग्रह भी यहां है। ब्रिटिश काल से लेकर दुनिया भर के करीब चालीस हजार डाक टिकट मौजूद हैं। हजारों लिखित और अलिखित पत्र लिफाफें भी मौजूद हैं, इसके अलावा संग्रहालय में करीब तीन हजार प्राचीन सिक्कों का कलेक्शन भी मौजूद है।

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