यूपी: घाघरा नदी के पानी में डूबे कई गांव, सैकड़ों परिवार बंधे पर रहने को मजबूर

यूपी: घाघरा नदी के पानी में डूबे कई गांव, सैकड़ों परिवार बंधे पर रहने को मजबूर

बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)। घाघरा नदी का भले ही जलस्तर घट रहा हो लेकिन सैकड़ों गांव अभी भी बाढ़ में डूबे हुए हैं। बताया जा रहा है कि नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण कई गांव जलमग्‍न हो गए हैं। ऐसे में लोग बांध पर रहने के लिए मजबूर हैं।

यूपी के बाराबंकी जिले की सिरौली गौसपुर तहसील के लगभग एक दर्जन गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है लेकिन घाघरा नदी पार करने के बाद गोंडा से सटे मांझारायपुर गांव की हालत बहुत खराब है। इस गांव में बाढ़ के पानी से आने जाने का रास्‍ता पूरी तरह से बंद हो गया है। यहां सैकड़ों परिवारों के घर पानी में पूरी तरह से समां चुके हैं, ऐसे में लोगों को परसावल बंधे पर अपना आशियाना बनाकर रहना पड़ रहा है।



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बांध पर लोगों को खाने और पीने की बड़ी समस्‍या है, उनका आरोप है कि सैकड़ों गांव पानी डूबने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी हमारा हाल जानने नहीं आया है। यहां न खाने की व्‍यवस्‍था है और न पीने की.. हर तरफ बस पानी ही पानी है।

मांझारायपुर की बाढ़ पीड़ित माया यादव ने बताया "गांव में पानी आए तीन महीने से अध‍िक का समय हो रहा है लेकिन कोई अध‍िकारी यहां देखने नहीं आया है। हमारा पूरा गांव पानी में डूबा है, घर के अंदर रखे सामान खराब हो रहे हैं। इस बाढ़ के कारण बच्‍चे स्‍कूल तक नहीं जा पा रहे हैं। बारिश होने पर पूरे छप्‍पर से पानी टपकता रहता है।"



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वहीं बाढ़ पीड़‍ित मुकेश बताते हैं "पूरे गांव में घाघरा नदी का भर गया है। कहीं आने जाने के लिए नाव का प्रयोग करना पड़ता है, इस बाढ़ में पूरे गांव की फसल भी बर्बाद हो गई है। राशन लेने के लिए भी नाव से दूर तक जाना पड़ता है। ऐसे में लोगों की तबीयत खराब होने पर कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

गौरतलब है कि बाराबंकी जिले का सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित मांझारायपुर का गांव हैं, यह गांव गोंडा सीमा से जुड़ा होने और घाघरा नदी के किनारे बसे होने के कारण अक्सर बाढ़ से प्रभावित रहता है। लोगों का कहना हैं गांव के लगभग पांच सौ परिवार गांव से निकलकर बांध पर रह रहे हैं, वहीं कुछ लोग अभी भी गांव में ही फंसे हैं।

सतीश कश्यप, कम्‍युनिटी जर्नलिस्‍ट

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