यूपी: सीतापुर में बुखार का कहर, 20 की मौत, 2000 ग्रामीण चपेट में

लखनऊ से सटे सीतापुर जिले के तीन ब्लॉक मिश्रिख, गोंदलामऊ और मछरेहटा के लगभग 40 गाँवों में 2000 लोग बुखार से पीड़ित हैं। कई गांवों में हर घर में मरीज हैं।

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   28 Aug 2019 6:10 AM GMT

यूपी: सीतापुर में बुखार का कहर, 20 की मौत, 2000 ग्रामीण चपेट में

चन्द्रकान्त मिश्रा/ मोहित शुक्ला

सीतापुर (उत्तर प्रदेश) । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे सीतापुुर जिले में संदिग्ध बुखार से लोगों की मौत का सिलसिला जारी है। जिले में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2000 से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित हैं। एक के बाद मौतों से ग्रामीणों में दहशत है। गोंदलामऊ ब्लाॅक से शुरू हुआ बुखार मिश्रिख, रेउसा, लहरपुर इलाके में भी फैल गया है। संक्रामक रोग लगातार फैलता जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें इस जानलेवा बीमारी पर काबू पाने में नाकाम साबित हो रही हैं।

"मई महीने में ही उसका मुंडन कराया था। अभी तो रिश्तेदारों से मिले कपड़ों को उसे पहना भी नहीं पाई थी। रोज जिद करता था, नए कपड़ों को पहनने की। मुझे क्या पता था इन कपड़ों को पहनना उसकी नसीब में नहीं था।" इतना कहते-कहते सीमा देवी जोर-जोर से रोनी लगीं। सीमा देवी (36वर्ष) उत्तर प्रदेश के सतीपुर जनपद के गाँव पैरुआ की रहने वाली हैं। जनपद में फैले संदिग्ध बुखार की चपेट में आकर सीमा देवी के तीन साल के बेटे देव की पिछले सप्ताह मौत हो गई।

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सीमा देवी के तीन साल के बेटे की मौत बुखार से हो गई।

अपने सबसे छोटे बेटे को खो चुकी सीमा देवी रोते हुए बताती हैं, " देव छह भाई-बहनों में सबसे छोटा था। घर में सब उसे बहुत मानते थे। सभी भाई-बहनों में सबसे खूबसूरत था। बहुत चंचल और प्यारा बच्चा था। अभी तीन साल का था। अपने भाई-बहनों को स्कूल जाते देख वह भी स्कूल जाने की जिद करता था। 13 तारिख को पता नहीं कैसे इतना तेज बुखार हो गया था। बुखार की दवा देकर सुला दिया था। रात को करीब दो बजे वह हम सभी को छोड़कर हमेशा के लिए चला गया।"

मिश्रिख, गोंदलामऊ और मछरेहटा ब्लॉक के लगभग 40 गाँवों में 2000 लोग बुखार से पीड़ित हैं। शायद ही कोई ऐसा घर होगा जिस घर में लोग बुखार की चपेट में लोग न हो। इस बुखार में पहले तो सर्दी लगती है। फिर उसके बाद काफी तेज बुखार होता है। एक सप्ताह से गाँव में बुखार का प्रकोप है। स्वास्थ्य विभाग की टीम आई थी, खून के नमूने लेकर गई है। जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा कि यह कौन सा बुखार है।

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गाँव में कैंप लगाकर ग्रामीणों को दवा देते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी।

संक्रामक रोग से पीड़ित गाँव पैरुआ के रहने वाले संतोष ने बताया, " बुखार से पूरा गांव पीड़ित है। डॉक्टर आते हैं और दो टिकिया दवाई देकर चले जाते हैं। जब सरकारी दवाई से फायदा नहीं होता तो हम लोग मजबूरी में प्राइवेट डॉक्टर के पास जाकर दवाई ले रहे हैं। दवा खाने के बाद बुखार उतर जाता है और फिर आ जाता है। कई लोगों को मच्छरों के काटने से मलेरिया हो गया है।"

इसी गाँव के रहने वाले केसन पासवान (45वर्ष) की छह अगस्त को बुखार की चपेट में आकर मौत हो गई। पैरुआ गांव गंदे तालाबों, खुले हुए नालों और कूड़े के ढेरों से पटा हुआ है। केसन के घर के सामने एक एब बहुत बड़ा गंदा तालाब है। गाँव में दो लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गाँव में दवा छिड़कने आई थी।

बुखार से अपने पिता को खोने वाली पिंकी।

अपने पिता के बीमार होने वाले दिन को याद करते हुए केसन की 12 साल की बेटी पिंकी बताती हैं, " 06 अगस्त को अचानक पापा को तेज बुखार आ गया था। उनकी सांसे तेज-तेज चल रही थी। हम लोग सीतापुर के एक सरकारी अस्पताल ले गए। पापा कुछ बोल नहीं रहे थे। एक दम शांत पड़ गए थें। शरीर बुखार से तप रहा था। यहां डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। हम लोग पापा को लेकर लखनऊ के लिए निकल लिए, लेकिन बीच रास्ते में ही पापा हम लोगों को अकेला छोड़ कर चले गएं।"

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पड़ोस के गाँव सैदपुर में एक माह से बुखार का प्रकोप फैल रहा है। ग्रामीण सरोजी देवी (45वर्ष) बताती हैं, " मेरे बेटे मनोज को पिछले एक सप्ताह से बुखार आ रहा है। सरकारी अस्पताल से दवा लेकर आई थी। दवाई का कोई फायदा नहीं है। गाँव मे गंदगी से नालियां बजबजा रही हैं। सरकारी हैंडपम्पों के आस पास पानी भरा हुआ है। गाँव में एक बार भी न तो फॉगिंग हुई है आर न ही चूना डलवाया गया है।"


सोमवार को लखनऊ मंडल के अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉक्टर एसके कुमार ने एक टीम के साथ-साथ कई गाँवों का निरीक्षण किया। बुखार से पीड़ित मरीजों का हाल जाना और दवाइयां वितरित कराई। डॉ. एसके कुमार ने गाँव कनेक्शन को बताया, " गाँवों में गंदगी का यह आलम है कि गाँवों में जितने भी तालाब हैं वो गंदगी से पटे पड़े हैं। जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। गंदगी होने से यहां मच्छर पनप रहे हैं। यही मच्छर लोगों को काट रहे हैं और बीमारी की वजह बन रहे हैं। सफाई कर्मचारियों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को गाँवों में सफाई और दवा छिड़काव का निर्देश दे दिया गया है।"

गंदगी से पटा पड़ा तालाब, जो मच्छरों के पनपने की सबसे सही जगह है।

डिप्टी सीएमओ डॉक्टर सुरेंद्र सिंह क्षेत्र में फैले बुखार के बारे में बताते हैं, " यह समय वायरल बुखार चल रहा है। ओपीडी में रोजाना काफी संख्या में बुखार के मरीज आ रहे हैं। सभी रोगियों के खून की जांच की जा रही है। मौसम बदलने के कारण बुखार फैल रहा है। लोगों को अपने आस-पास के माहौल को साफ रखना चाहिए। गाँवों में एंटी लार्वा दवाई का छिड़काव किया जा रहा है। सभी सरकारी अस्पतालों में बेड रिजर्व कर दिए गए हैं। "

वहीं, दो साल पहले नटवलग्रंट सहित करीब 10 गाँवों में बुखार फैल गया था, जिसमें 50 लोगों की मौत हो गई थी। आखिर में स्वास्थ्य विभाग ने इन मौतों की वजह मलेरिया बताया था। बड़ा सवाल यह है कि बुखार के संक्रमण से बचाव में स्वास्थ्य महकमा द्वारा लापरवाही क्यों बरती गई, जबकि पिछले साल 50 लोगों की मौत हो चुकी है। दूसरा सवाल यह कि गांव में बुखार के संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा क्या इंतजाम किया गया है, क्योंकि संक्रमण घटने के बजाय लगातार बढ़ रहा है।

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