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अब गाँवों में कोरोना की दहशत, एक ही गाँव में मिले 40 कोविड पॉजिटिव

देश के बड़े-बड़े शहरों की परीक्षा ले रहे कोरोना ने अब गांवों की ओर भी अपने कदम बढ़ा दिए हैं। लखनऊ के पास के जिले सीतापुर में आज 23 अप्रैल को 306 कोरोना मरीज मिले हैं। ये हाल सिर्फ सीतापुर का नहीं बल्कि कई ग्रामीण इलाकों का है।

Mohit ShuklaMohit Shukla   23 April 2021 3:42 PM GMT

सीतापुर (उत्तर प्रदेश)। 15 अप्रैल को बृजेश कुमार अवस्थी (22) अपनी तबीयत को लेकर असहज थे। जुकाम-खांसी के अलावा उन्हें बुखार भी था। बृजेश अपने घर से करीब 7 किमी दूर पिसावां में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचे और अपना कोरोना टेस्ट कराया। उनका डर तब सच में बदल गया, जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

सीतापुर जिले के बरखेरवा गांव के रहने वाले बृजेश कुमार अवस्थी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "मुझे 14 दिनों के लिए होम क्वारंटाइन रहने के लिए कहा गया और कुछ दवाएं लिखी गईं, जो केंद्र में नहीं थीं। लिहाजा अगले दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम घर पर आई और दवा दे गई।" बृजेश के अलावा उनके घरवालों ने भी टेस्ट कराए थे, जो निगेटिव आए।

लखनऊ से 145 किमी दूर इस गांव में बृजेश के बाद 2 और केस पॉजिटिव आए हैं। खतरे की घंटी बज चुकी है, शहरों के बाद अब गांवों में भी इस वायरस ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। 20 अप्रैल को पीसावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम लोगों का टेस्ट करने के लिए गांव पहुंची।

लगभग 500 की आबादी वाले इस गांव में कुल 152 लोगों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 40 लोग पॉजिटिव पाए गए। इनमें से 7 लोग 60 साल से अधिक उम्र के थे। इन 40 मरीजों में दो स्वास्थ्य कार्यकर्ता, एक डॉक्टर और एक लैब तकनीशियन भी शामिल हैं।

ग्रामीण भारत में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पीसावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी आनंद यादव ने गाँव कनेक्शन को बताया, "बरखेरवा गांव की मुख्य सड़क पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। पॉजिटिव मिले 7 लोग जो 60 साल से ऊपर हैं उन्हें जल्द अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। बाकी बचे पॉजिटिव मरीजों को होम आइसोलेशन की सलाह दी गई है। साथ ही गांव और जांच की जा रही है।"

बरखेरवा के हालात देखकर ग्रामीण भारत की स्वास्थ्य सेवाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। जन स्वास्थ्य अभियान के योगेश जैन ने गाँव कनेक्शन को बताया, "देश में जो कुछ भी सामने आ रहा है वो चिंता का प्रमुख कारण है।" उन्होंने आगे कहा, "गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं की पहले से ही कमी है, ऐसे में वहां कोरोना के केस बढ़े तो महामारी से जूझना मुश्किल होगा।"

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योगेश ने कहा कि गांवों में अब तक शादियों व अन्य कार्यक्रमों में लोग इकट्ठा हो रहे थे, जो यहां पर कोविड के बढ़ने की ओर साफ इशारा कर रहे है। उन्होंने आगे बताया, "हम देख रहे है कि किस तरह से बड़े-बड़े शहरों में इस महामारी से निपटने असमर्थ साबित हो रहे हैं, ऐसे में यह सोचा नहीं जा सकता कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था इससे कैसे निपटेगी?"

देश में कोरोना अपनी पूर रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में लगातार दूसरे दिन गुरुवार 22 अप्रैल को देश में कोरोना के 3,32,730 मामले सामने आए। इसमें 75.01 प्रतिशत केस अकेले 10 राज्यों में मिले, जिसमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान शामिल हैं।

7 बुजुर्गों को अब तक नहीं किया गया भर्ती

बरखेरवा में ग्रामीण चिंतित हैं। गांव के पहले कोरोना पॉजिटिव रोगी बृजेश अवस्थी ने बताया, "एक सप्ताह हो गया है, गांव में लोगों को कोरोना पॉजिटिव आए हुए, बावजूद इसके नियम के तहत मेरे घर को अब तक सैनिटाइज नहीं किया गया है।"

हालांकि, कल देर शाम (22 अप्रैल), पिसावां सीएचसी के चिकित्सा अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने गाँव कनेक्शन को आश्वासन दिया, "अधिकांश दवाएं प्रभावित ग्रामीणों को वितरित कर दी गई हैं, और बाकी आज 23 अप्रैल को दी जाएंगी।"

वहीं जब हमने पॉजिटिव आए उन 7 बुजुर्गों को भर्ती करने के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, "हम अभी भी एम्बुलेंस का इंतजार कर रहे हैं।" इसके अलावा उन्होंने आज (23 अप्रैल) गांव को सैनिटाइज करने की बात कही।

दूसरे राज्यों में लॉकडाउन लगने और कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण बाहर से लोग गाँव लौट रहे है। फोटो: अरविंद शुक्ला

बरखेरवा गांव के काफी संख्या में लोग बाहर काम करते हैं, जो अब अपने घरों को लौट रहे हैं। गांव के करीब 80 फीसदी लोग खेती से जुड़े हैं, बाकी दूसरे राज्यों में काम करते हैं। गांव के रहने वाले दीपक शुक्ला ने गाँव कनेक्शन को बताया, "पिछले 5 दिनों में दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड में काम करने वाले काफी युवक गांव को लौटे है।" हाल में 34 अन्य लोगों का गांव में टेस्ट किया गया, जिनमें एक महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई।

मौजूदा समय मेंउत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव भी चल रहे हैं और ग्रामीणों को डर है कि वोट डालने के लिए शहरों से आने वाले लोग गांव में वायरस के फैलने का कारण बन सकते हैं।

"लखनऊ के अस्पतालों और श्मशान घाटों की खबरें डरावनी हैं।"यह बिल्कुल संभव है कि जो लोग वोट देने आए हैं, उनकी वजह से संक्रमण ग्रामीणों में फैल सकता है।" लखनऊ जिले के बख्शी का तालाब तहसील के अंतर्गत अकादरिया कलां गांव के निवासी मनीष द्विवेदी ने यह बात 19 अप्रैल को गांव कनेक्शन से कही थी, जब पंचायत चुनाव का दूसरा चरण चल रहा था।

ग्रामीण इलाकों में अब तेजी से बढ़ रहे केस

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, 20 अप्रैल को जिले में 2,985 कुल सक्रिय मामलों के साथ 384 नए कोरोना मामले दर्ज किए गए। इससे पांच दिन पहले 15 अप्रैल को जिले में 307 नए केस और 1,681 सक्रिय मामले दर्ज किए गए थे। इस बीच 11 अप्रैल को जिले में केवल 71 नए केस आए और 714 सक्रिय मामले दर्ज किए गए थे।

ऐसे में सिर्फ 9 दिनों के भीतर 11 अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच रोजाना के केस 71 से 384 तक बढ़ गए।

यूपी में दो चरण का मतदान हो गया है, अभी दो चरण बाकी हैं, मतदान के लिए भी बाहर से बड़ी संख्या में लोग गाँव आ रहे हैं।

शाहजहांपुर जिले में कोविड नियंत्रण सेंटर के प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया कि दो से तीन दिन पहले तक जहां 250 से 300 केस आते थे, वहीं कल (22 अप्रैल) बीते चौबीस घंटे में 600 केस दर्ज हुए। महामारी शुरू होने के बाद से अब तक जिले में कोरोना से 145 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि 23 अप्रैल को कोरोना के 232 केस दर्ज किए गए।

मिर्जापुर जिले के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, तीन दिन पहले 20 अप्रैल को 312 कोरोना के नए मामले सामने आए। महामारी की शुरुआत के बाद से अब तकजिले में 6,298 कोरोना के मामले आए और 50 मौतें हो चुकी हैं।

इस बीच, सीतापुर जिले में आज (23 अप्रैल) को 306 नए कोरोना के मरीज मिले।

इनपुट – शाहजहांपुर से रामजी मिश्रा, बाराबंकी से विरेंद्र सिंह और मिर्जापुर से बृजेंद्र दुबे।

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