सूखा प्रभावित किसानों की मदद के लिए अमेरिका में अप्रवासी भारतीयों ने जुटाया पैसा

सूखा प्रभावित किसानों की मदद के लिए अमेरिका में अप्रवासी भारतीयों ने जुटाया पैसान्यू जर्सी में आयोजिस कार्यक्रम में बिके टिकटों से 14000 अमेरिका डॉलर (897407.00 रुपए) इकट्ठा हुए हैं।

विवेक पांडेय, कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

न्यू जर्सी (अमेरिका)। वो वर्षों तक देश नहीं आ पाते, यहां का उगाया हुआ अनाज भी बहुत कम ही खा पाते हैं। अपने खेत और गांवों भी बहुत कम जा पाते हैं, उनकी दुनिया अमेरिका में बस गई है, लेकिन भारत और यहां के किसान उनके दिलों में बसते हैं। समय-समय पर ये एनआरआई किसानों की मदद के लिए पहल भी करते हैं। मदर्स डे के मौके पर न्यू जर्सी में कार्यक्रम का आयोजन कर सूखा प्रभावित किसानों के लिए फंड जुटाया गया।

महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्य सूखे की मार झेल रहे हैं। बुंदेलखंड, विदर्भ समेत कई इलाकों के किसानों की मदद के लिए सेव इंडियन फार्मर्स संस्था की ओर से अमेरिका के न्यू जर्सी में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में अप्रवासी भारतीय, भारतीय और अमेरिकी भी पहुंचे। इस कार्यक्रम के टिकट से जितना भी पैसा इकट्ठा हुआ वो सारा पैसा भारत के किसानों की मदद करने में इस्तेमाल किया जाएगा।

न्यू जर्सी में आयोजिस इस कार्यक्रम में अमेरिकी बच्चों ने म्यूजिक प्रोग्राम किया, जिसमें बिके टिकटों से 14000 अमेरिका डॉलर (897407.00 रुपए) इकट्ठा हुए हैं। इस पैसे से बुंदेलखंड के किसानों की मदद की जाएगी। ‘गाँव कनेक्शन’ भी इस मुहिम में संगठन के साथ है। संस्था के द्वारा सूखा ग्रस्त इलाकों में कम होते भूजल के स्तर को बेहतर करने के बोरवेल रिजार्च कार्यक्रम चलाया जाएगा।

प्रोजेक्ट जल के डायरेक्टर महेश वाणी ने कार्यक्रम के पहले बताया, ''इस कार्यक्रम से हम जो धनराशि इकट्ठा करेंगे उससे बुंदेलखंड के किसानों की मदद की जाएगी। इसके अलावा हम लोग कर्नाटका, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी प्रोजेक्ट जल का काम शुरू कर रहे हैं, जिसमें हम 200 किसानों की पानी से जुड़ी समस्यों पर मदद करेंगे।''

न्यू जर्सी में आयोजिस इस कार्यक्रम में अमेरिकी बच्चों ने म्यूजिक प्रोग्राम किया।

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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के एक आंकड़ें के अनुसार '2014-2015 के बीच देश में किसानों की आत्महत्याएं 42% बढ़ गई। सर्वे में पाया गया कि 2014 में किसानों की कुल 5,650 आत्महत्या दर्ज हुई, जबकि नवीनतम आंकड़ों में यह आंकड़ा बढ़कर 8007 तक पहुंच गया है। इसमें 3030 आत्महत्या के मामले के साथ महाराष्ट्र का ग्राफ देश में (37.8% के साथ) सबसे अधिक है। तेलंगाना 1,358 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर और कर्नाटक 1197 के साथ तीसरे नंबर पर है।

कैसे हुई 'सेव इंडियन फार्मर्स' की स्थापना?

समारोह में गांव कनेक्शऩ मीडिया पार्टनर रहा।

अमेरिका के न्यू जर्सी में रहने वाले अप्रवासी भारतीय हेमंत जोशी जो जब पता चला कि हर 41 मिनट में एक किसान आत्म हत्या करता है, तो उन्हों ने इसपर सिर्फ दुख व्यक्त करने के बजाए किसानों के लिए कुछ करने की सोची।

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उन्होंने एक बोर्ड पर इस आंकड़े को लिखा कि 'प्रत्येक 41 मिनट में एक किसान भारत में आत्महत्या करता है' और न्यू जर्सी के मेट्रो स्टेशन पर जाकर रोजाना 45 मिनट तक उस बोर्ड को हाथ में लेकर खड़े होने लगे। मकसद साफ था और भी भारतीयों को साथ जोड़ना, जिससे अभियान की शुरूआत कर सकें।

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कुछ महीनों बाद उनके एक दोस्त ने पूछा कि यह क्या कर रहे हो, तो हेमंत ने बताया कि वो भारतीय किसानों के जीवन में कुछ बदलाव लाना चाहते हैं। उनका मित्र उनके उद्देश्य से बहुत प्रभावित हुआ पर उसने कहा ऐसे बोर्ड हाथ में लेने से किसी का भला नहीं होगा, बल्कि कुछ ठोस काम करते हैं। फिर 1 से 2 और 2 से कई और इनके साथ जुड़े और आज एक पूरी टीम तैयार हो चुकी है। उन्होंने मिल कर 'सेव इंडियन फार्मर्स' स्थापना की। यह एक ऐसी संस्था थी, जो अप्रवासी भारतीयों द्वारा बनायीं गयी पर पूर्ण रूप से भारतीय किसानों और ग्रामीणों के लिए समर्पित है। फण्ड रेजिंग इवेंट्स व अन्य कई फाउंडेशन से मिलने वाले रुपये कि मदद से इस संस्था ने भारत के किसानों व ग्रामीणों की सहायता शुरू की।

हम सबका गांव कनेक्शन है।

'सेव इंडियन फार्मर्स' के मुख्य 2 मिशन

हेमंत बताते हैं कि 'सेव इंडियन फार्मर्स' के मुख्यतः 2 मिशन हैं। पहला भारतीय किसानों की वर्त्तमान परिस्थितियों के बारे में देश में और देश के बाहर जागरूकता फैलाना और दूसरा ग्रामीणों के जीवन में पूर्ण साकारात्मक बदलाव लाना। संस्था की भागीदारी ग्रामीणों से जुड़े हर क्षेत्र जैसे पानी, स्वास्थ्य, खेती, स्वच्छता, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को आर्थिक मदद और उन्हें रोजगार और जीवन यापन के नए अवसर देना समेत अन्य क्षेत्रों में मदद करना है।

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संस्था के संस्थापक हेमंत कहते है, ''हमारी आदत हो गयी है किसानों की समस्याओं को न्यूज पेपर में पढ़ना और पेज पलट कर भूल जाना। इसे सोच को 60% ग्रामीण आबादी वाले इस देश में देश को उनकी जरूरत है और उन्हें हमारी।''

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