नार्थ ईस्ट के किसानों के लिए बायो टेक्नोलॉजी विभाग की विशेष पहल, शुरू हो रहा बायोटेक किसान कार्यक्रम

बायोटेक-किसान को पूर्वोत्तर क्षेत्र में छोटे और सीमांत किसानों, विशेष रूप से क्षेत्र के महिला किसानों के साथ उपलब्ध नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों को खेत से जोड़ने के उद्देश्य से लागू किया जाएगा।

नार्थ ईस्ट के किसानों के लिए बायो टेक्नोलॉजी विभाग की विशेष पहल, शुरू हो रहा बायोटेक किसान कार्यक्रम

अरुणाचल प्रदेश में धान की खेती। फोटो: विकीपीडिया कॉमन्स

नार्थ-ईस्ट के किसानों के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने विशेष कार्यक्रम की शुरूआत की है, इस कार्यक्रम के जरिए पूर्वोत्तर क्षेत्र किसानों की स्थानीय समस्याओं को समझ कर उनका वैज्ञानिक रूप से समाधान किया जाएगा।

बायोटेक-एग्रीकल्चर इनोवेशन साइंस एप्लीकेशन नेटवर्क (बायोटेक-किसान) के जरिए किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। बायोटेक-किसान कृषि नवाचार के लिए 2017 में शुरू की गई एक वैज्ञानिक-किसान साझेदारी योजना है। इसका उद्देश्य खेतों के स्तर पर लागू किए जाने वाले नवीन समाधानों और प्रौद्योगिकियों का पता लगाने के लिए विज्ञान प्रयोगशालाओं को किसानों से जोड़ना है। इस योजना के तहत, अब तक देश के सभी 15 कृषि जलवायु क्षेत्रों और 110 आकांक्षी जिलों को कवर करते हुए 146 बायोटेक-किसान हब स्थापित किए जा चुके हैं।

इस योजना से अब तक दो लाख से अधिक किसानों को उनके कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ ही आय में वृद्धि होने का लाभ मिला है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में 200 से अधिक उद्यमिताएं भी विकसित की गई हैं।

मेघालय में चाय के बगान। फोटो: पिक्साबे

अब इस कार्यक्रम का विस्तार पूर्वोत्तर राज्यों में भी किया जा रहा है, जहां की एक बड़ी जनसंख्या कृषि और पशुपालन जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हुई है। लेकिन अभी भी यहां पर कृषि उत्पादन उतना नहीं हो पाता है, जितना हो सकता है। यहां के लोग दूसरे राज्यों पर निर्भर हैं। जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थान विशिष्ट फसलों, बागवानी और वृक्षारोपण फसलों, मत्स्य पालन और पशुधन उत्पादन को बढ़ावा देकर कृषि कार्यों में से जुड़ी एक बड़ी आबादी की आय बढ़ाने की अपार क्षमता और सम्भावनाएं हैं।

बायोटेक-किसान को पूर्वोत्तर क्षेत्र में छोटे और सीमांत किसानों, विशेष रूप से क्षेत्र के महिला किसानों के साथ उपलब्ध नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों को खेत से जोड़ने के उद्देश्य से लागू किया जाएगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र में बनाए गए हब देश भर के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के साथ-साथ राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू) / कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) / मौजूदा राज्य कृषि विस्तार सेवाओं / प्रणाली और पूर्वोत्तर क्षेत्र में अन्य किसान संगठनों के साथ प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन और किसानों को प्रशिक्षण देने में सहयोग करेंगे।

इन क्षेत्रों पर होगा विशेष काम

पानी की समस्या: अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समस्याएं हैं, कहीं पर किसान सूखे से परेशान हैं तो कहीं बाढ़ से इसलिए किसानों सही जानकारी दी जाएगी, कि कैसे बेहतर तरीके से खेती करें।

मिट्टी की जांच: मिट्टी की खराब क्वालिटी एक बहुत बड़ी समस्या है, इसके साथ ही किसानों के बीच मिट्टी की जांच के लिए जागरूकता भी नहीं है।

उन्नत बीज की कमी: छोटे किसानों की पहुंच उन्नत बीज तक नहीं है, इसलिए किसानों का अच्छा उत्पादन भी नहीं हो पाता। किसानों तक उन्नत उपलब्ध कराया जाएगा।

बाजार की कमी: पूर्वोत्तर राज्यों में किसानों के लिए बाजार की कमी एक बड़ी समस्या है, किसान अच्छा उत्पादन कर लेते हैं, लेकिन बाजार नहीं मिल पाता है, इसलिए पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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