कीटनाशकों का प्रयोग करते समय रखें ये सावधानियां 

कीटनाशकों का प्रयोग करते समय रखें ये सावधानियां 

सीतापुर। फसलों की सुरक्षा में प्रयोग होने वाले नाशियों में यदि लापरवाही हो जाए तो किसानो की जान तक जा सकती है पीड़कनाशी जहां कीटो एवं बीमारियों को खत्म करने में सक्षम होते हैं, लेकिन यदि प्रयोग करने से पहले प्रयोग की संपूर्ण जानकारी न ली जाए तो वह इंसानों के लिए भी बहुत विनाशकारी साबित हो सकते हैं।

ये भी पढ़ें- नुकसान से बचना है तो किसान बीज, कीटनाशक और उर्वरक खरीदते समय बरतें ये सावधानियां

राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबंधन केंद्र नयी दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मुकेश सहगल ने कृषि विज्ञान केंद्र कटिया द्वारा आयोजित पीड़कनाशी जागरूकता कार्यक्रम अंतर्गत जनपद के विकास खंड महोली के ग्राम मल्ल्पुर में आयोजित किसान गोष्ठी किसानों को बताया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. सुमित्रा अरोरा ने कहा कि पीड़कनाशी खरीदते समय निर्माण तिथि, उपयोग तिथि, घोल बनाने कि विधि, भण्डारण न करने, छिड़काव की विधि और समय, प्रयोग करने से पहले सुरक्षित कवच पहनने की सलाह देते हुए कहा कि हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम हरे निशान वाली दवा को प्राथमिकता दे तथा लाल निशान वाली दवा के प्रयोग से बचने के लिए एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन विधियों को अपनाएं।

ये भी पढ़ें- नीम : एक सस्ता घरेलू जैविक कीटनाशक

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. आनंद सिंह ने किसानों को सम्बोधित करते हुए बताया कि 18 वर्ष कि काम आयु के बच्चों को पीड़कनाशी प्रयोग न करने दे और जब खेतो में पीड़कनाशी प्रयोग हो रहा हो तो छोटे बच्चो को दूर रहने कि सलाह दें। सब्जियों कि तुड़ाई से एक सप्ताह पूर्व कीटनाशी प्रयोग बंद कर दें।

केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव ने कहा कि कीटों व बीमारियों का आक्रमण अधिक न बढ़ने पाए इसके लिए आवश्यक है कि प्रतिदिन अपने खेतो कि निगरानी अवश्य करें। रस चूसक कीटो कि प्रति पौध एवं पत्ती संख्या एवं इल्ली व सुंडी कि प्रति वर्ग मीटर संख्या का आंकलन करते रहें। खेतो में पीला चिपचिपा पाश, प्रकाश प्रपंच, फेरोमोन प्रपंच, चिड़िया का अड्डा अवश्य लगाएं।

केंद्र के शष्य वैज्ञानिक डॉ. शिशिर कांत सिंह ने कहा कि कोशिश करे कि खेत खरपतवार मुक्त रहे ताकि कीट एवं व्याधियों पनपने ही न पाएं। प्रसार वैज्ञानिक एस के सिंह ने स्प्रेयर के इस्तेमाल करने से पहले लीकेज जांचने एवं नोजल कि उपयोगिता पे जानकारी प्रदान की ।

ये भी पढ़ें- खेतों की जान ले रहे कीटनाशक, सुरक्षित हम भी नहीं

फसलों की बीमारियां पहचानने के लिए किसान सुविधा ऐप के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। कृषि विज्ञान केंद्र कटिया की तरफ से 20 किसानों को जैविक कीटनाशी प्रदान किये गए एवं घर पे वानष्पतिक कीटनाशी बनाए की विधियों के बारे में भी जानकारी दी गयी। कार्यक्रम में बायर क्रॉप साइंस के रवि भदौरिया ने किसानो को कीटनाशी सुरक्षा उपायों पे चर्चा की और 20 किसानों को सुरक्षा कवच प्रदान किया।

ये भी देखिए:

Share it
Top