भारत के हर आदमी के हिस्से में अब 350 ग्राम दूध 

भारत के हर आदमी के हिस्से में अब 350 ग्राम दूध फोटो: विनय गुप्ता

नई दिल्ली। दूध उत्पादन में भारत दुनिया का सिरमौर बना हुआ है। आज भारत के हर व्यक्ति के हिस्से में 350 ग्राम दूध उपलब्ध हो गया है। यह देश के पशुपालन में लगे किसानों की बदौलत हुआ है।

दुग्ध व्यवसाय में अनेक संभावनाएं

रविवार को नई दिल्ली के पूसा में ‘’राष्ट्रीय दुग्ध दिवस” पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने बताया, ‘’भारत विश्व में उस पटल पर पहुँच गया है, जहाँ दुग्ध व्यवसाय में वैश्विक स्तर पर उद्यमियों के लिए अनेक संभावनाएँ उभर कर सामने आ रही है।‘’

अनेक योजनाओं को उपलब्धि का श्रेय

उन्होंने बताया कि पिछले 15 वर्षों से भारत विश्व में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला देश बना हुआ है। इस उपलब्धि का श्रेय दुधारू पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए भारत सरकार की तरफ से शुरू की गई अनेक योजनाओं को जाता है। विश्व में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाला देश बन गया है।

इस तरह बढ़ा उत्पादन

कृषि मंत्री ने कहा कि 2013-14 में दूध उत्पादन करीब 137.7 मिलियन टन का उत्पादन हुआ था, वह बढ़कर वर्ष 2016-17 में 163.6 मिलियन टन हो गया है। वर्ष 2013-14 की तुलना में 2016-17 की अवधि में दुग्ध उत्पादन में 18.81 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता वर्ष 2013-14 में 307 से बढ़कर वर्ष 2016-17 में 351 ग्राम हो गई है। वर्ष 2011-14 के बीच दूध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 4 प्रतिशत थी जो कि अब 2014-17 में 6 प्रतिशत हो गई है। जबकि विश्व में दूध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 2014-17 में 2 प्रतिशत रही।

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जिनके पास कुल गायों की 80 प्रतिशत आबादी

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि भूमिहीन एवं सीमांत किसानों के लिए डेयरी व्यवसाय उनके जीवनयापन एवं सुरक्षा चक्र प्रदान करने का जरिया बन गया है। करीब 7 करोड़ ऐसे ग्रामीण किसान परिवार डेयरी व्यवसाय से जुडे हुए हैं, जिनके पास कुल गायों की 80 प्रतिशत आबादी है। उन्होंने बताया कि कामकाज करने वाली महिलाओं का 70 प्रतिशत हिस्सा (करीब 44 लाख) डेयरी व्यवसाय में कार्य कर रहा है। इनमे से करीब 3 लाख 60 हजार महिलाएँ डेयरी सहकारी संस्थाओं का नेतृत्व कर रही हैं, जबकि 380 महिलाएँ जिला दुग्ध संघों और राज्य दुग्ध फ़ेडरेशन के बोर्ड में प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

दूध की मांग तेजी से बढ़ रही

कृषि मंत्री ने कहा कि आज भारत में दूध की मांग घरेलु स्तर पर लोगों की खरीदने के क्षमता, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, खानपान की आदतें एवं रहने की शैली के कारण लगातार बढ़ रही है। दूध, जो अपनी अनेक विशेष फायदों के लिए जाना जाता है, हमारे अधिकतर शाकाहारी जनसंख्या के लिए पशु प्रोटीन का एकमात्र स्त्रोत है। साथ ही उपभोक्ताओं की रुचि धीरे-धीरे अधिक प्रोटीन वाले उत्पादों की ओर बढ़ रही है एवं मूल्य वृर्द्धि उत्पादों का चलन भी बढ़ने के कारण दूध की मांग तेजी से बढ़ रही है।

उत्पादन बढ़ाने पर जोर

पिछले 15 वर्षों में दुग्ध सहकारी संस्थाओं ने अपने कुल पैदा किए दूध के 20 प्रतिशत हिस्से को मूल्य वृद्धि दुग्ध पदार्थों मे परिवर्तित किया है जिससे तरल दूध की अपेक्षा 20 प्रतिशत अधिक आय होती है। ऐसी अपेक्षा है कि वर्ष 2021-22 तक 30 प्रतिशत दूध को मूल्य वृर्द्धि पदार्थों मे परिवर्तित किया जाएगा। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि विभिन्न कारणों से देश में दूध की मांग जो बढ रही है, उसे घरेलु उत्पादन से ही पूरा करने के लिए सरकार ने विभिन्न डेयरी विकास योजनाओं का क्रियांवयन किया है। जिसमें विशेष ध्यान दुधारु पशुओं की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

राष्ट्रीय गौकुल मिशन की शुरुआत

देश में पहली बार देशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए एक नई पहल ‘’राष्ट्रीय गौकुल मिशन” की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत 18 गोकुल ग्राम 12 राज्यों मे स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही 2 अवार्ड ‘गोपाल रत्न अवार्ड’ - देशी नस्लों के सबसे अच्छे पशु का रखरखाव करने के लिए और ‘कामधेनु अवार्ड’ ऐसी संस्थाओं को जो सर्वोत्तम रूप से रखे जा रहे देशी नस्ल के पशु यूथ हेतु रखे गए है।

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किसानों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका

इस वर्ष विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर 10 गोपाल रत्न अवार्ड और 12 कामधेनु अवार्ड दिए गए। देश में देशी नस्लों के संरक्षण के लिए दो "नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर" आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थापित किए जा रहे हैं। इसके तहत 41 गोजातीय नस्लों और 13 भैंस की नस्लों को संरक्षित किया जाएगा। दुग्ध उत्पादन व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने के लिए राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन की शुरुआत की गई जिसके तहत ई पशु हाट पोर्टल स्थापित किया गया है। यह पोर्टल देशी नस्लों के लिए प्रजनकों और किसानों को जोड़ने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

10,881 करोड़ की लागत

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि 10,881 करोड़ की लागत से डेयरी प्रसंस्करण और अवसंरचना विकास कोष (डीआईडीएफ) योजना को चलाया जा रहा है। जिसमें दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता और बल्कि मिल्क कूलर के माध्यम से दुग्ध अवशीतन क्षमता का सृजन किया जाएगा। साथ ही इलेक्ट्रानिक दुग्ध मिलावट परिक्षण उपकरण और दूध को मूल्य वर्धित दुग्ध पदार्थों में परिवर्तित करने की क्षमता का भी प्रावधान रखा गया है।

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