गज़लों का सफर व पुलिस की नौकरी साथ-साथ

Abhishek PandeyAbhishek Pandey   27 Jun 2017 2:42 PM GMT

गज़लों का सफर व पुलिस की नौकरी साथ-साथनौकरी के साथ-साथ गज़ल भी लिखते है मो. अलि साहिल।

लखनऊ। “वो हिफाजत करेगा क्या मेरी, खुद जो शीशे के घर में रहते हैं, ये बताती है धड़कनों की सदा, कोई दिल के खंडर में रहता है।” बचपन से ही मुकेश और रफी साहब के दर्द भरे नगमें सुनने और उन्हें गुनगुनाने का शौक कब हकीकत में बदल गया यह यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर मो.अली साहिल को खुद नहीं पता था। धीरे-धीरे वक्त गुजरता गया और साहिल अपनी नगमों के जादू से लोगों को मंत्रमुग्ध करने लगे।

उनके नगमों के कद्रदानों की भी संख्या बढ़ने लगी, जिसे देखते हुए साहिल ने दर्द भरी उर्दू गज़ल "पहला कदम" नाम से एक पूरी किताब ही लिख डाली। उनकी उर्दू शायरी की ओर सराहनीय कार्य और बेहतरीन गज़लों को देखते हुए कई अवार्ड से राज्य सरकार ने नवाजा है।मो.अली साहिल बताते हैं कि, जब इटावा जिले के इस्लामिया इंटर कॉलेज से इंटरमीडियट कर रहा था, उस वक्त अक्सर मैं गाने गुनगुनाया करता था।

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यह देख स्कूल के दोस्तों ने कहा कि, मैं भी गीत-गजल लिखूं, लेकिन उनकी इस बात को मजाक में टाल कर आगे बढ़ गया। इस दौरान घर पर अकेला बैठे-बैठे उलटी-सीधी गज़लें लिखना शुरू कर दिया, यह देख अब्बू ने कहा यह सब छोड़ो पढ़ाई पूरी कर कहीं सरकारी नौकरी का प्रयास करो। वर्ष 1990 में यूपी पुलिस में बतौर एसआई/स्टेनो पद पर नौकरी मिल गई। नौकरी के बाद पहली तैनाती नैनीताल में मिली, जिसके कुछ वर्षों बाद 1993 में लखनऊ में तबादला हो गया।

मो. अली साहिल

जहां 1997 में आईजी जोन कार्यालय में तैनात कर दिया गया। वहां काम का बोझ इतना अधिक रहा कि शायरी के लिए समय ही नहीं निकाल पाया, अलबत्ता कभी कभार समय निकालकर कवि गोष्ठियों में भाग लेता रहा। धीरे-धीरे मुझे रदीफ़-काफिये की समझ होने लगी और मैंने इस ओर काम करना शुरू कर दिया, जबकि इन सब के बीच मेरा एक ऐसे इलाके से ताल्लुक था, जहां उर्दू भाषा से कोई बावस्तगी नहीं रही थी और मै उर्दू-अरबी से ना-वाकिफ था, साथ ही लहजे(तलफ़्फ़ुज़) के बारे में मुझे लखनऊ आने से पहले कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन यहां के लोगों के शायराना अंदाज ने मुझे उर्दू भाषा की ओर अग्रसर कर दिया।

इस बीच मो.साहिल को आईपीएस नवनीत सिकेरा के साथ काम करने का मौका मिला, जिनसे बहुत सी चीजे सीखने को मिली। मशहूर शायरों के साथ मुशायरों में शामिल होने का मौका मिला, जिनसे प्रेरणा लेकर अपनी पहली गजल संग्रह पहला कदम लिखी, जिसे पढ़ने के बाद उर्दू के बड़े शायर मुन्नवर राणा साहब ने बधाई दी और मुझे आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दी।

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इन अवार्डों से नवाजे गए मो.अली साहिल

मो.अली साहिल के इस कार्यों को देखते हुए राज्य सरकार ने कई अवार्डों से नवाजा गया है। इन अवार्ड की फेहरिस्त में यूपी हिंदी संस्था अवार्ड, जश्न-ए- गज़ल अवार्ड, अवध गौरव सम्मान, मुम्बई में कर्म योगी सम्मान, यूपी सरकार की ओर से अकबर इलहाबादी अवार्ड, फिराग गोरखपुरी अवार्ड देकर सम्मानित किया गया है।

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