मुश्किल में डॉक्टरों की जान

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लखनऊ। उत्तराखंड के जसपुर सामुदायिक केन्द्र पर एक डॉक्टर की गोली मार कर हत्या कर दी गई। इस अस्पताल में दो दिन पहले एक बच्चे की मौत हो गई थी, और परिजनों का आरोप था कि इलाज में लापरवाही होने से बच्चे की मौत हुई थी। डॉक्टर पर हमला इससे जोड़कर देखा जा रहा है। 

वहीं, मेरठ में बुधवार को सड़क हादसे के बाद एक युवक को लेकर दयानंद अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों ने डॉ. राजेश कुमार पर तमंचा तान दिया।  अस्पताल पहुंची पुलिस की जांच में पता चला आरोपी लुटेरे थे, एक मोटरसाइकिल लूट कर भागे थे इसी दौरान हादसा हुआ। उनके पास दो लूट की बाइक और दो तमंचे बरामद हुए।

“इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के साथ होने वाली हिंसा के लिए कानून बनाने की लड़ाई काफी समय से लड़ रहा है।” इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव व पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं।

सात अप्रैल को फैजाबाद जिले के प्रसूता की मौत के बाद तीमारदारों ने जमकर हंगामा काटा था। लखनऊ के डफरिन, क्वीनमेरी और ट्रामा सेंटर में डॉक्टर और तीमारदारों के बीच अक्सर विवाद होते रहते हैं।

डॉक्टरों पर ड्यूटी के दौरान होने वाले हमले लगातार बढ़े हैं, इसे लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने चिंता जाहिर की है।

इंडियन मेडिकल एसोसिशन लखनऊ के अध्यक्ष विजय कुमार बताते हैं, “डॉक्टर के लिए आदर नहीं रहा। कई मामले में डॉक्टरों की लापरवाही भी होती है, लेकिन ज्यादातर में एक पक्षीय रिपोर्ट मीडिया में आती हैं। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की नकारात्मक छवि बनाई जा रही है। ऐसे में मरीज सरकारी की जगह नर्सिंग होम जाते हैं, जहां खर्च बढ़ता है।”

केजीएमयू में ट्रामा सेंटर के सीएमओ डॉ. धीरेंद्र पटेल का भी कुछ ऐसा ही तर्क है। “ट्रामा सेंटर में 250 बेड हैं, मरीज 300 आते हैं। हम उनका स्टेचर पर इलाज करते हैं, उसकी फोटो छापी जाती है। ट्रामा सेंटर आने वाले अधिकांश मरीज गंभीर हालत में होते हैं, जिनमें से कई का बच पाना मुश्किल होता है, फिर हंगामा होता है,” डॉ. पटेल बताते हैं।

आईएमए मेरठ ने डॉक्टरों की प्रति बढ़ती आक्रामकता के लिए कुछ डॉक्टरों की लापरवाही और झोलाछाप डॉक्टरों जिम्मेदार माना है। आईएमए (मेरठ) के अध्यक्ष डॉ. तनुराज सिरोही कहते हैं, भारत ही नहीं दुनिया भर के डॉक्टर हमले का शिकार हो रहे हैं। जब से पेशे को उपभोक्ता फोरम के तहत लाया गया है, हमले बढ़े हैं। डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच कम्यूनिकेशन गैप (बातचीत न होना) बढ़ा है। प्रदेश में कानून है, कई आरोपियों पर मुकदमें भी दर्ज हुए हैं लेकिन सजा न होने से उनका मनोबल बढ़ा है।”

उत्तर प्रदेश में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू मेडिकल एक्ट से डॉक्टरों को कितनी सुरक्षा मिलती है? पूछने पर फैजाबाद के सीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं, “डॉक्टर बहुत निरीह और सहनशील प्राणी है, वो बदसलूकी सहकर अपने काम में लग जाता है। अस्पतालों में तैनात ज्यादातर डॉक्टर बाहर के होते हैं, वो विवाद को आगे बढ़ाना नहीं चाहते।”

रिपोर्टर - अरविंद शुक्ला/ सुनील तनेजा

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