किसी बच्चे ने तितलियों में भरा रंग, तो किसी बच्चे ने बनाया पहाड़ और झरना

गांव मेले में लगी कला कार्यशाला में बच्चों और बड़ों को पेंटिंग और स्केचिंग की कई बारीकियां बताई गईं। लोगों को पेपर और कलर देकर उन्हे बनाने का मौका भी दिया गया।

Faraz HusainFaraz Husain   5 Dec 2018 7:06 AM GMT

किसी बच्चे ने तितलियों में भरा रंग, तो किसी बच्चे ने बनाया पहाड़ और झरना

गदेला (लखनऊ)। कोई बच्चा रंगों से मछलियां बना रहा था, तो कोई पेसिंल से पहाड़ और नदी बनाने में व्यस्त था। ये बच्चे गाँव कनेक्शन मेला में आयोजित कला कार्यशाला में भाग ले रहे थे।

लखनऊ जिले के गदेला गाँव में भारतीय ग्रामीण स्कूल में दो दिसंबर को हुए मेले में क्रिकेट, खो-खो, कबड्डी, रंगोली, मेहंदी जैसी कई प्रतियोगिताएं हुई। इनमें से एक पेंटिंग और स्केचिंग भी एक थी। यह एक प्रतियोगिता नहीं थी। कला कार्यशाला में बच्चों और बड़ों को पेंटिंग और स्केचिंग की कई बारीकियां बताई गईं। लोगों को पेपर और कलर देकर उन्हे बनाने का मौका भी दिया गया।


वास्तव में कला भावनाओं और कल्पनाओं को बयां करने का सबसे अच्छा तरीका है। यह व्यक्ति को मानसिक रूप से भी खुश करती है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे पेंटिंग और स्केचिंग को देखने या बनाने का शौक न हो।

मेले में आए कई स्कूलों के छात्र-छात्राओं और भारतीय ग्रामीण स्कूल के विद्यार्थियों ने भी पेटिंग और स्केचिंग बनाना सीखा। तमाम छोटे-छोटे बच्चों ने भी पेंटिंग सीखी। जब उनके द्वारा बनाई गई कलाकृति को कोई सुंदर कहता तो उनके चेहरों पर मुस्कान की एक लहर दौड़ जाती और वह चित्रों को कागज पर उकेरने में और रुचि लेते।


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बच्चों ने कागज़ पर उकेरे सुंदर चित्र

बच्चों को वरली पेंटिंग और मधुबनी कला की बारीकियों, महत्व और उनकी पहचान के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों ने सीनरी और मछली बनाना भी सीखी। बच्चों ने दृश्य में पहाड़ों और पेड़ों से ससज्जित कुटी बनाई जिसके पास से नदी गुजरती है। पहाड़ के पीछे सुर्योदय हो रहा है और पंछी आकाश में उड़ते हुए दर्शाय गये हैं। बच्चों ने जिस दृश्य को पेपर पर दर्शाय था वह सच में सराहनीय है।


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वरली पेंटिंग और मधुबनी कला के बारे में

वरली चित्रकला एक प्राचीन भारतीय कला के रूप में जानी जाती है। इसकी मूल कलाकार महाराष्ट्र की एक जनजाति वरली है। इस कला में उनके जीवन के मूल सिद्धांत पूरी तरह दिखाई पड़ते हैं। इस कला में मुख्य रूप से फसल पैदावार ऋतु, शादी, उत्सव, जन्म और धार्मिकता को दर्शाया जाता है। यह कला वरली जनजाति के सरल जीवन को भी दर्शाती है। शादी वरली कलाओं के प्रमुख विषय के रूप में भी जाना जाता है। शादी के चित्रों में देव, पलघाट, पक्षी, पेड़, पुरुष और महिलायें साथ में नाचते हुए दर्शाए जाते है।


मधुबनी चित्रकला में खासतौर पर कुल देवता का चित्रण होता है। हिंदू देव-देवताओं की तस्वीर, प्राकृतिक नजारे जैसे- सूर्य व चंद्रमा, धार्मिक पेड़-पौधे जैसे- तुलसी और विवाह के दृश्य देखने को मिलेंगे। मधुबनी पेंटिंग दो तरह की होतीं हैं- भित्ति चित्र और अरिपन या अल्पना।


चटख रंगों का इस्तेमाल इस कला में खूब किया जाता है। जैसे गहरा लाल रंग, हरा, नीला और काला। चित्र में निखार लाने के लिए कुछ हल्के रंगों का भी प्रयोग किया जाता है, जैसे- पीला, गुलाबी और नींबू रंग। यह रंग घरेलू चीजों से ही बनाये जाते है, जैसे- हल्दी, केले के पत्ते, लाल रंग के लिऐ पीपल की छाल का प्रयोग किया जाता है। चित्र बनाने के लिए माचिस की तीली व बाँस की कलम को प्रयोग में लाया जाता है। रंग की पकड़ बनाने के लिए बबूल के वृक्ष की गोंद को मिलाया जाता है।



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