सहें नहीं, घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं महिलाएं

Deepanshu MishraDeepanshu Mishra   8 March 2018 4:54 PM GMT

सहें नहीं, घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं महिलाएंडॉ नेहा आनंद से गाँव कनेक्शन के संवाददाता ने बात की।

लखनऊ। ज्यादातर महिलाएं घरेलू हिंसा को चुपचाप सहती रहती हैं, यही आगे चलकर उनके लिए बड़ी समस्या बन जाती है। मनोवैज्ञानिक व सलाहकार डॉ. नेहा आनंद गाँव कनेक्शन को बता रहीं हैं कि कैसे महिलाएं अपने हक के लिए आवाज उठा सकती हैं।

सवाल- घरेलू हिंसा को महिलाएं बर्दाश्त क्यों करती हैं?

जवाब- महिलाओं को बचपन से यही बताया जाता है कि आप हमेशा चुप रहना, बोलना नहीं है। जो लड़की चुप रहती है उसी को अच्छा माना जाता है। ये पैरामीटर हमने लड़कियों के लिया बना दिया है। इसी पैरामीटर के अंतर्गत महिलाएं चुप रहती हैं और उनके साथ जो कुछ भी होता रहता है वो सहती रहती हैं। इसी वजह से उन्हें पूरी जिन्दगी सिर्फ सहना पड़ता है।

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सवाल- जब महिलाओं के साथ हिंसा होती है तो उन्हें क्या करना चाहिए?

जवाब- लड़कियों को जिस दिन भाव को व्यक्त करना आ जायेगा उन्हें बोलना आ जायेगा तब ये हिंसा कम हो सकती है। उन्हें समझ आ जायेगा कि हम सहते रहेंगे तो हमे हमेशा सहते ही रहना पड़ेगा। उन्हे अब खुल कार आगे आना पड़ेगा, जो भी अत्याचार उनके खिलाफ हो रहें हैं उनके खिलाफ उन्हें लड़ना आ जायेगा उस दिन ये घरेलू हिंसा कम हो जाएगी।

सवाल- जो पति अपनी पत्नी के साथ हिंसा करते हैं क्या वो मानसिक रूप से बीमार होते हैं?

जवाब- जो इंसान मानसिक रूप से स्वस्थ्य होता है वो किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं पहुंचा सकता है। कोई इंसान अगर खुद असुरक्षित है तो हमेशा से अपने से कमजोर लोगों को हानि पहुंचाने की कोशिश करता है। यहाँ पर महिला उसको कमजोर दिखती हैं जिसको वो हिंसा पहुंचाता है। इसलिए जो भी इंसान मानसिक रूप से बीमार होगा तो वो इस तरह की हरकतें जरूर करेगा।

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सवाल- आखिर एक महिला दूसरी महिला कि दुश्मन क्यों होती जा रही है?

जवाब- एक महिला को हमेशा दूसरी महिला को ऊपर उठाना चाहिए, दबाना नहीं चाहिए। कभी-कभी सास को ऐसा लगता है कि अगर मैंने ये सब झेला है तो मेरी बहू क्यों न झेले। महिलाओं की मानसिकता ऐसी हो गयी है कि कोई हमसे आगे न निकले, एक महिला के साथ अगर ग़लत हुआ है तो वह चाहती है कि दूसरी महिला के साथ भी गलत जरूर हो। इस मानसिकता को बदलने की बहुत जरूरत है।

सवाल- घर में घरेलू हिंसा होती है तो उस घर के बच्चों के ऊपर क्या प्रभाव पड़ता है?

जवाब- बच्चा जिस महौल में जी रहा है उसका प्रभाव बच्चे के ऊपर बहुत पड़ता है। जो बच्चे बचपन से ऐसी चीजें देखते आयें हैं वो वो उसी माहौल में ढल जाते हैं। उनकी मानसिक स्थिति इतनी गड़बड़ हो जाती है कि वो किसी भी चीज को सह नहीं पाते। वे वही करने लगते हैं जो वे देखे रहते हैं।

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सवाल- जिस महिला के साथ हिंसा होती है तो उसे क्या करना चाहिए?

जवाब- किसी महिला के साथ अगर हिंसा होती है तो सहना नहीं चाहिए उसे सरकार द्वारा दिए गए सुविधाओं का प्रयोग करना चाहिए। 1090 में शिकायत करें, महिला सम्मान प्रकोष्ठ का प्रयोग करें लेकिन कोई भी जुर्म सहने की आदत न डालें।

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