राजस्थान के इस सरकारी स्कूल ने कॉन्वेंट स्कूलों को पछाड़ा

राजस्थान के इस सरकारी स्कूल ने कॉन्वेंट स्कूलों को पछाड़ाgaonconnection

लखनऊ। अक्सर सुनने में आता है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई नहीं होती है। स्कूल के शिक्षक लापरवाही करते हैं पर राजस्थान का एक सरकारी स्कूल किसी महंगे कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं है।

इस गाँव में आठवीं तक का कोई भी बच्चा प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ता है यहां तक की निजी स्कूलों से बच्चों को अभिभावक निकाल कर इस सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रवेश दिला रहे हैं। इस स्कूल में सभी सुविधाएं निजी स्कूलों जैसी हैं मगर अभिभावकों के लिए खर्च सरकारी स्कूल का ही है। यहां तक मेधावी बच्चों को इस स्कूल में लैपटॉप जैसे महंगे पुरस्कार तक दिए जाते हैं।

राजस्थान के चुरु जिले के राजगढ़ ब्लॉक से 40 किलोमीटर उत्तर दिशा में ढानी छोटी गाँव हैं। गाँव में कुल 80 घर हैं। एक हजार आबादी वाले इस गाँव के 120 बच्चे राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में ही पढ़ने जाते हैं। इस सरकारी स्कूल की तमाम खासियतों की वजह से कोई भी बच्चा प्राइवेट स्कूल में नहीं जाता है।

इस गाँव में रहने वाले संतकुमार (36 वर्ष) बताते हैं कि हमारी बेटी सन 2000 में एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने जाती थी। जब गाँव के सरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक राधेश्याम मीना ने बताया कि अपनी बेटी को हमारे स्कूल में भेजिए। मैंने साफ मना कर दिया कि सरकारी स्कूल में पढ़ाई नहीं होती है।

उन्होंने जब बहुत कहा कि सिर्फ एक बार हमे मौका दें। उसी वर्ष हमने अपनी बिटिया का एडमिशन सरकारी स्कूल में कराया। आज हमारी बेटी पूरे गाँव में सबसे होशियार है। उसने इस स्कूल से दो लैपटाप जीते हैं। वो आगे कहते हैं कि मेरी चार बेटियां और एक बेटा हैं। सभी इस राजकीय विद्यालय में ही पढ़े हैं। छोटी बेटी को भी इस बार एक लैपटाप मिला है। हमारे सभी बच्चे पढ़ने में बहुत होशियार हैं। 

पूरे गाँव में स्कूल के शिक्षकों ने चार गलियों की दीवारों पर हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विषय पर कविताएं लिखी हैं। बच्चे स्कूल से घर जाने के बाद जब खेलते हैं, वे दीवार पर लिखी कविताओं को खेल-खेल में पढ़ते हैं और याद करते हैं। स्कूल में पढ़ रहे छात्र मुकेश (13 वर्ष) बताता है कि हम पढ़ाई के मामले में प्राइवेट स्कूल के बच्चे को पीछे कर देते हैं। हमें इस बार आठवी कक्षा में टॉप आने पर लैपटाप मिला है। अब हम लैपटाप चलाना भी सीख जाएंगे। स्कूल में खेल-खेल में पढ़ाया जाता है। पढ़ाई के साथ-साथ जब टूर पर जाते हैं तब बहुत मजा आती है। 

मुकेश आगे बताता है कि हम सब दोस्तों के नाम से स्कूल में 70 पौधे लगे हैं| जिसके नाम पौधा होता है वही देखरेख करता है।

स्वयं डेस्क प्रोजेक्ट

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