समय से इलाज न हुआ तो नासूर बन जाएगा

समय से इलाज न हुआ तो नासूर बन जाएगाबुलंदशहर के पास हाइवे पर डेढ़ घंटे तक तांडव चला, पुलिस को फोन किया गया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

पश्चिमी यूपी के शहरों सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ और बुलन्दशहर में जो कानून व्यवस्था की हालत हो रही है, उससे मुख्यमंत्री योगी के अच्छे कार्यों पर कालिख पुत रही है। शासन ने जहां सहारनपुर में कड़ा कदम उठाया, वहीं बुलन्दशहर के पास हाइवे पर कार में बैठे छह लोगों में से एक को मार डाला गया और दो महिलाओं को बेइज्जत किया गया। विकास की ऐसी सड़क को लेकर क्या करेंगे, जिस पर चलने वालों की जान सुरक्षित नहीं। बुलंदशहर के पास हाइवे पर डेढ़ घंटे तक तांडव चला, पुलिस को फोन किया गया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

हमें याद है तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह का जमाना, जब कानून-व्यवस्था बहुत बिगड़ गई थी और मायावती ने करारी चोट करते हुए कहा था अपराधियों को वहीं भेजूंगी, जहां उनकी जगह है और उनकी जगह है जेल में। वह चुनाव जीत गई थीं। आज की समस्या पेशेवर अपराधियों की नहीं, बल्कि भगवा अंगवस्त्र धारण करके अपराध करने वालों की है। डीएम और एसएसपी को सस्पेंड करने या डीआईजी और कमिश्नर को स्थानान्तरित करने से मसला हल नहीं होगा । जेल में उन्हें डालना होगा जो प्रधानमंत्री की नसीहत के बावजूद विनम्रता और शालीनता न दिखाकर उद्दंड को रहे हैं।

क्या कहते हैं लोग

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद बिगड़ी कानून व्यवस्था पर गाँव कनेक्शन से लोगों ने अपनी राय साझा की। लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्रा अनुजा शुक्ला (22 वर्ष) कहती हैं, “कोई सरकार कितने भी कड़े कानून बना ले, लेकिन अपने यूपी में अपराध नहीं कम हो सकता है। आज भी अगर लड़कियां कहीं बाहर निकलती है तो उन्हें अभद्र टिप्पणियां मिलती हैं। अपराध कम करने के लिए लोगों को सोच बदलने की जरूरत है।”

आली संस्था की संस्थापक रेणु मिश्रा कहती हैं, “महिला सुरक्षा के मुद्दे पर यह सरकार आई थी, लेकिन लगातार यह सरकार इस मसले पर विफल हो रही है। जिस रास्ते पर महिलाओं के साथ गलत हुआ है, वहां से मैं बीते सोमवार को ही वापस आई हूँ। रास्ते में कहीं पेट्रोलिंग करते हुए पुलिस नहीं दिखी। योगी सरकार को सोचना होगा कि कानून व्यवस्था को कठोरता से लागू किया जाए।“

गोरखपुर जिला मुख्यालय से 23 किलोमीटर दूर पिपराइच ब्लॉक की उदासी देवी (45 वर्ष) का कहना है, “जो भी घटनाएं होती हैं, इससे यह सामने आता है कि बदमाश बेखौफ हैं। बुलंदशहर की घटना बेहद दर्दनाक है। जरूरी यह है कि पुलिस को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाए। अन्यथा इस तरह की घटनाएं सामने आती रहेंगी।“

वहीं फिल्मकार नकुल सिंह सैनी कहते हैं, “सरकार बदलने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत होगी लेकिन इस सरकार के शासन में कानून व्यवस्था विफल है। प्रदेश में छोटी जातियों को दबाया जा रहा है। दबंग जातियां बेलगाम है। सरकार की शह पर प्रदेश में कानून का मजाक उड़ाया जा रहा है। गौरक्षा के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है तो एंटी रोमियो स्क्वायड के नाम पर लड़कियों को परेशान किया गया।

इसके अलावा लखनऊ के गोमतीनगर में रहने वाली रेनु शर्मा (38 वर्ष) का कहना है, “हर दिन वारदातें इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि अपराधियों पर सजा का कठोर प्रावधान नहीं है, इसलिए अपराधियों को बढ़ावा मिलता है, एक घटना में पकड़े गये अपराधियों को अगर कठोर से कठोर सजा मिले तो इस तरह की वारदातों पर अंकुश लगेगा।”

वहीं, मनोवैज्ञानिक लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर माननी श्रीवास्तव कहती हैं, “इस बढ़ते हुए क्राइम से सामाज में रहने वाले हर व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है। अखबार में अपराध की घटनाओं को पढ़कर बच्चों के मस्तिष्क पर खराब असर पड़ता है। छोटी सी उम्र में इस तरीके के अपराधों को पढ़कर उनमें गलत धारणाएं बनती हैं। योगी सरकार से उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को कठोरता से पालन करेगी।“

नई सरकार बनने के बाद प्रमुख घटनाएं

20 मार्च 2017: बीएसपी नेता की हत्या

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सरकार के गठन के दिन ही इलाहाबाद के मऊआइमा कस्बे में बसपा नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख मोहम्मद समी की हत्या कर दी गई। वारदात के समय समी अपने ऑफिस में बैठे हुए थे। कुछ हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी। सभी की मौके पर ही मौत हो गई।

24 अप्रैल 2017: इलाहाबाद में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या

इलाहाबाद के जूडापुर गाँव में पति-पत्नी और दो बेटियों समेत चार की रात में हत्या कर दी गई।

5 मई 2017: सहारनपुर में एक महीने में तीन बार भड़की हिंसा

सहारनपुर में एक महीने में तीन बार हिंसा भड़क चुकी है। शहर के कई इलाकों से पथराव की खबरें आईं।

22 मई 2017: सपा नेता की हत्या

बलिया में एक सपा नेता सुमेर सिंह की गोली मारकर बदमाशों ने हत्या कर दी गई। मृतक सुमेर सिंह एक कार्यक्रम से घर लौट रहे थे।

9 मई 2017: लखनऊ में फौजी की दो बेटियों की गला काटकर हत्या

लखनऊ के पारा इलाके में रिटायर्ड फौजी की दो बेटियों सोनम और आरती की बेरहमी से गला काटकर हत्या कर दी गई। दिनदहाड़े डबल मर्डर की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। घर पर दोनों बेटियां अकेले थीं।

‘हाईवे पर पुलिस की गश्त बढ़े तब बने कुछ बात’

लखनऊ के सिविल अस्पताल के सीएमओ डॉ. आशुतोष दुबे कहते हैं, “ बुलंदशहर हाईवे पर इस तरह की दूसरी घटना है। ऐसी दोबारा घटना सामने आने के बाद यह बयां करता है कि हाईवे पर क्या सुरक्षा बरती गई है। हाइवे पर पुलिस की गश्त बढ़े तभी कुछ बात बन सकेगी।”

वहीं, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर वेद प्रकाश कहते हैं, “हाइवे पर घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। इनको रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ेंगे और पुलिस को गश्त पर तो रहना ही चाहिए। उसके साथ-साथ थोड़ा कड़ा रूप भी दिखाना चाहिए जिससे लोग पुलिस का सम्मान तो करें, साथ में उनसे भयभीत भी रहे।“

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