Dr SB Misra

Dr SB Misra

Dr Shiva Balak Misra is an Indian geologist, writer, social worker. He is the Editor-in-chief of Gaon Connection.

Dr Misra is credited for his discovery of Fractofusus misrai - a fossil revealing mystery about beginning of life on earth some 560 mn years ago, discovered by him in June 1967 during his MS Thesis work at Mistaken Point, Newfoundland and Labrador, Canada now better knwon as Mistaken Point Ecological Reserve after his discovery.


  • 'सब तो लीडर हैं यहां फॉलोवर कोई नहीं'

    महागठबंधन बनाने का खूब प्रयास चला लेकिन थेाड़ी सी प्रांतीय गुटबन्दी के आगे नहीं बढ़ पाया। विपक्ष के लिए 2014 से भी बदतर हालत बन चुकी है। उत्तर प्रदेश मायावती को प्रधानमंत्री का दावेदार स्वीकार करके अखिलेश यादव ने राहुल गांधी को नेता मानने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस की समझ में नहीं आता कि जो...

  • 'मैंने ऐसा विषाक्त चुनाव प्रचार कभी नहीं देखा'

    पिछले चुनावों में पार्टियों के छुटभैये नेता अमर्यादित भाषा से परहेज नहीं करते थे, लेकिन पार्टियों के मुखिया गालियां नहीं देते थे। अब तो जिन्हें अदालत ने जमानत पर छोड़ा हुआ है उनका व्यवहार भी संयमित नहीं है। पहले सेना के शौर्य और वैज्ञानिकों की उपलब्धियों पर कभी सवाल नहीं उठे, यहां तक कि चीन के...

  • उच्चतम न्यायालय भी नहीं दिला सकेगा जनमत वाली सरकार

    आमचुनाव का शंखनाद हो हो चुका है लेकिन दुनिया के सबसे बडे प्रजातंत्र में परिपक्वता और शालीनता का पूरी तरह अभाव है। जिस तरह प्रधानमंत्री को चोर और आतंकवादियों को सम्मानसूचक शब्दों से अलंकृत करने का चलन चला है वैसा पहले कभी नहीं हुआ। कई लोग मोदी की तुलना इन्दिरा गांधी से करते हैं तो क्या सत्तर के...

  • भारतीय नारी अबला कब और कैसे हो गई ?

    भारत वही देश है जहां देवता रहते थे, क्योंकि यहां नारी की पूजा होती थी। नारी के बिना यज्ञ अधूरा रहता था और भगवान राम को भी यज्ञ करते समय सीता की जगह मूर्ति बिठानी प़ड़ी थी। चाहे सीताराम बोलें या राधेश्याम अथवागौरी शंकर सब जगह नारी का स्थान प्रथम है। इसी देश में गार्गी, अपाला और मैत्रेयी जैसी विदूषी...

  • कश्मीर के लिए लड़ना पड़े तो युद्ध हो निर्णायक

    कश्मीर में सैनिक मर रहे हैं, आतंकवादी ताल ठोंक कर जिम्मेदारी ले रहे हैं लेकिन इमरान खां सबूत मांग रहे हैं । मुम्बई और पठानकोट में सबूत दिए भी गए परन्तु अंजाम क्या हुआ। समाधान केवल युद्ध से नहीं होगा अब निर्णायक युद्ध होना चाहिए। आजादी के बाद चार युद्ध हो चुके हैं, लेकिन वे निर्णायक नहीं हुए।...

  • कांग्रेस ने लम्बे समय तक हिन्दुत्व का लाभ लिया

    साभार: इंटरनेटआरम्भ में कांग्रेस ने बिना उद्घोष किए हिन्दुत्व का रास्ता अपनाया और लाभ उठाया। सोमनाथ मन्दिर का निर्माण, अनेक प्रदेशों में गोवध बन्दी, सरकारी आयोजनों पर हवन पूजन, मुहूर्त देखकर मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण जैसे अनेक कदम उठे। लेकिन जैसे-जैसे संघ परिवार का प्रखर हिन्दुत्व बढ़ता गया, कांग्रेस...

  • अंतरिम बजट विकासोन्मुख है, महंगाई न बढ़ाए

    पीयूष गोयल ने जो अन्तरिम बजट पेश किया, उसका निहितार्थ है, खूब कमाओ और खूब खर्चा करो, जिससे बाजार में खूब पैसा आए और बैंकों में पैसा आए। मध्यम वर्ग और किसान का विशेष ध्यान रखा है। मध्यम वर्ग जो किसी देश समाज की रीढ़ होता है, अनेक वर्षों से उपेक्षित और अप्रसन्न था, किसान की भी नाराजगी भारी पड़ सकती...

  • आरक्षण पर मोदी सरकार का सेकुलर कदम

    संसद के दोनों सदनों में सवर्णों की 31 प्रतिशत आबादी के लिए 10 प्रतिशत का आरक्षण बिल पास हो गया है, जिससे उन्हें आर्थिक आधार पर नौकरियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश में लाभ मिल सकेगा। आखिर सुदामा तो हर वर्ग जाति में पाए जाते हैं। मोदी सरकार ने आजादी के बाद पहली बार सवर्ण आरक्षण के माध्यम से...

  • ग्लोबल वार्मिंग की तपिश में झुलस रहा किसान

    मैं भारतीय ग्रामीण विद्यालय में बैठा था तभी चैकीदार दलीप आ गया तो मैंने उससे पूछा इस साल स्कूल में धूल अधिक है, तब उसने कहा साहब जमीन में नमी नहीं है। दलीप चैकीदार की बात को तब बल मिला जब एक दूसरे किसान ने कहा था ''भइया मघा निकरि गा अब धरती का पेटुं र्को भरी'। सच ही है, धरती प्यासी है और...

  • प्रजातंत्र में सरकार हर जगह मौजूद है लेकिन दिखाई नहीं देती भगवान की तरह

    बात 1976 की है जब इन्दिरा जी ने देश में आपातकाल लगाया हुआ था और सभी लोग दहशत में थे। मैं मध्य प्रदेश के भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग में भूवैज्ञानिक के रूप में काम करता था और मैं रीवा में पोस्टेड था। मेरा एक चपरासी था मुन्नालाल जिसने एक दिन ब़ड़े सरल ढंग से पूछा ''साहब, सरकार कहां रहती हैं' । मैं इस...

  • चुनावी नतीजों पर त्वरित टिप्पणी : भाजपा का घर जला खुद के चिराग से

    जब 2014 में नरेन्द्र मोदी चुनाव लड़े तो नारा दिया ''सब का साथ, सब का विकास '। बहुत ही सार्थक अपील थी अचूक अस्त्र की तरह काम कर गई। लेकिन सत्ता में आने के बाद उनका कुनबा उसी पुराने ढर्रे पर चल पड़ा जिस पर चलते चलते ''हम दो हमारे दो' के पड़ाव पर पहुंचे थे। उसके बाद अडवाणी ने जिस तरह सीमित आबादी को...

  • संस्कार हीन शिक्षा से वही होगा जो हो रहा है

    चुनाव प्रचार में लगे नेता एक दूसरे को गालियां दे रहे हैं, कीचड़ उछालते हैं, स्याही, टमाटर, अंडे, जूते और पत्थर फेंकते हैं, और अब तो मां बाप को गालियां देने पर उतर आए हैं। आचार संहिता भी पर्याप्त अंकुश नहीं लगा पाती। जिन्होंने पचास के दशक का चुनाव प्रचार देखा है उन्हें बेहद पीड़ा ...

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