जानिए गर्मियों में कैसे फायदेमंद है बेल का शर्बत

जानिए गर्मियों में कैसे फायदेमंद है बेल का शर्बतबेल का शर्बत गर्मियों में फायदेमंद होता है।

सेहत की रसोई कॉलम में हम अपने पाठकों के लिए लेकर आते हैं एक से बढ़कर एक पारंपरिक व्यंजनों से जुड़ी कई नायाब जानकारियां और इन व्यंजनों के औषधीय गुणों की जानकारी देते हैं हमारे “हर्बल आचार्य” डॉ दीपक आचार्य..सेहत और किचन का तड़का हर सप्ताह एक खास व्यंजन के साथ हम परोसते हैं, अपने सभी पाठकों के लिए।

सेहत की रसोई यानि बेहतर सेहत आपके बिल्कुल करीब। हमारे बुजुर्गों का हमेशा मानना रहा है कि सेहत दुरुस्ती के सबसे अच्छे उपाय हमारी रसोई में ही होते हैं। इस कॉलम के जरिये हमारा प्रयास है कि आपको आपकी किचन में ही सेहतमंद बने रहने के व्यंजन से रूबरू करवाया जाए। सेहत की रसोई में इस सप्ताह हमारे मास्टरशेफ भैरव सिंह राजपूत पाठकों के लिए ला रहे हैं चिलचिलाती गर्मी में राहत दिलाने वाले एक खास शर्बत “बेल का शरबत” की रेसिपी।

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बेल का शरबत (एक व्यक्ति के लिए)

आवश्यक सामग्री:

  • बेल का पका हुआ फल- 1
  • मिश्री, ताल मिसरी या ठोस शक्कर- 20 ग्राम
  • पानी - 200 मिली.
  • जीरा पाउडर- चुटकी भर
  • बर्फ के टुकड़े- 4
  • पुदीना की पत्तियां- 5


विधि: बेल के पके हुए फल को लेकर दो हिस्से में काट दें। चम्मच की मदद से इसके गूदे (पल्प) को निकाल लें और अच्छी तरह से मसल दें ताकि ये थोड़ा पतला और लसलसा हो जाए। ऐसा होने के बाद इसमें जीरा का पाउडर, ताल मिसरी और पानी डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें ताकि ताल मिसरी बेल के पल्प में भलिभांति घुल जाए।

अब इस सारे मिश्रण को 20 मिनिट के लिए रेफ्रिजरेटर में रख दें ताकि ये ठंडा हो जाए। बाद में इसे निकालकर कांच की गिलास में डालकर इस पर बर्फ के टुकड़े डाल दें और ऊपर से पुदीना की पत्तियों से गार्निश भी कर दें। इस तरह तैयार हो जाएगा स्वादिष्ट बेल का शरबत। ठंडे ठंडे इस शरबत का मज़ा इन गर्मियों में खूब लें।

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क्या कहते हैं हमारे हर्बल आचार्य: बेल के फलों का शर्बत बड़ा ही गुणकारी होता है। यह शर्बत कुपचन, आंखों की रौशनी में कमी, पेट में कीड़े और लू लगने जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिये उत्तम है। गर्मियों में बेल का फल मानो एक वरदान है जिसके सेवन से धूप की तपिश और लू के थपेड़ों से शरीर को बचाया जा सकता है। बेल के फलों का जूस लू और लू के बाद आए बुखार के नियंत्रण के लिए अतिकारगर माना जाता है।

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की पातालकोट घाटी के भारिया आदिवासी लू से लड़ने के लिए बेल के रस से बना अनोखा पेय तैयार करते हैं। आदिवासियों के अनुसार इस रस को यदि लू से ग्रसित रोगी सुबह या शाम एक गिलास प्रतिदिन पीये तो अतिशीघ्र लू का प्रभाव खत्म हो जाता है। लोग इस शरबत को बेलिया रस के नाम से भी जानते हैं। अब देरी किस बात की, फटाफट बेल के पके हुए फल की व्यवस्था करें, खुद भी बेल का शरबत पियें और परिवार के हर सदस्य को पिलाएं, सवाल आखिर आपकी सेहत और स्वाद का जो है।

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