अब लखनऊ में मिलेगा कैंसर का अत्याधुनिक इलाज, मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा मुंबई

टाटा कैंसर सेंटर, मुम्बई से कैंसर की विश्व स्तरीय एवं अत्याधुनिक चिकित्सा प्रणाली लखनऊ में उपलब्ध कराई जायेगी। टाटा कैंसर संस्थान यहां के विशेषज्ञ डाक्टरों, नर्सों तथा अन्य कर्मचारियों को प्रशक्षिति करने के साथ-साथ तकनीकी एवं अनुभव का भी आदान-प्रदान करेगा।

अब लखनऊ में मिलेगा कैंसर का अत्याधुनिक इलाज, मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा मुंबई

लखनऊ। प्रदेश के लोगों को विश्व स्तरीय एवं अत्याधुनिक कैंसर चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए राजधानी स्थित सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान और टाटा मेमोरियल कैंसर सेन्टर मुम्बई के बीच सोमवार को एमओयू हस्ताक्षरित हुए। इस एमओयू से टाटा कैंसर सेंटर, मुम्बई से कैंसर की विश्व स्तरीय एवं अत्याधुनिक चिकित्सा प्रणाली यहां लखनऊ में उपलब्ध कराई जायेगी। टाटा कैंसर संस्थान यहां के विशेषज्ञ डाक्टरों, नर्सों तथा अन्य कर्मचारियों को प्रशक्षिति करने के साथ-साथ तकनीकी एवं प्रक्रिया जन्य अनुभव का भी आदान-प्रदान करेगा।
प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा एवं प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा," इससे प्रदेश के कैंसर पीड़ितों को बड़ी राहत मिलेगी। यह कैंसर संस्थान राज्य की प्रगति में एक बड़ी उपलब्धि है एवं इसके क्रियाशील होने के उपरान्त रोगियों के उपचार हेतु मुम्बई जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनकों पर्याप्त उपचार यहीं पर उपलब्ध हो जायेगा।" उन्होंने कहा, कैंसर संस्थान के क्रियाशील होने के उपरान्त रोगियों को उपचार हेतु मुम्बई जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इस साल नवम्बर से 60 शैय्या अन्तः रोगी विभाग एवं बाह्य रोगी विभाग सुविधा की शुरूआत हो जायेगी।


यहां पर कैंसर संस्थान की स्थापना प्रदेश में लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है। हम अपनी तरफ से पूर्ण सहयोग, कैंसर चिकित्सा प्रक्रिया, कैंसर चिकित्सा शिक्षा एवं कैंसर शोध में टाटा मेमोरियल सेन्टर के अनुभवी एवं दक्ष संकाय सदस्यों का सम्पूर्ण सहयोग उपलब्ध कराएंगे।
डा. आर बडवे, निदेशक, टाटा कैंसर संस्थान
कैंसर संबंधी आधुनिक उपचार की जानकारी के लिए टाटा कैंसर सेन्टर द्वारा उपचालित मुफ्त ऑनलाइन कैंसर शक्षिण की शुरूआत प्रदेश में की गयी है, जिसका लाभ यूपी में कैंसर इलाज से जुड़े सभी विशेषज्ञों को मिलेगा।
डॅा.रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा
हर एक अंग का कैंसर एक अलग बीमारी
उत्तर प्रदेश में 2017 के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के आंकड़ों के अनुसार 2.5 लाख कैंसर के नए मरीज को पंजीकृत किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के मरीज तेजी से बढ़े हैं। इसका मुख्य कारण लोगों की जीवन शैली में बदलाव भी है। ऐसे में अगर सही समय पर ध्यान दिया जाए तो इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। कैंसर विशेषज्ञ डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया, " कैंसर एक बीमारी नहीं है। हर एक अंग का कैंसर एक अलग बीमारी होती है। सामान्य रूप से जानना चाहें तो कैंसर में शरीर के जो सेल्स होते हैं वो अपने आप से बढ़ने लगते हैं। आसान शब्दों में समझने के लिए जैसे बिजली का सर्किट होता है, जिसका एक मास्टर स्विच होता है। मास्टर स्विच खराब हो जाने कारण घर की बिजली में दिक्कत आएगी। ठीक उसी तरह से किसी भी जीन में खराबी आ जाने से कैंसर हो जाता है। कैंसर के दो कुछ कारण हैं, जैसे रेडिएशन एक्सपोजर, केमिकल एक्सपोजर या कुछ जेनिटिक बीमारियों की वजह से हो सकते हैं।"
ओरल कैंसर भारत में एक बड़ी समस्या
ओरल कैंसर भारत में एक बड़ी समस्या है, देश में शीर्ष तीन प्रकार के कैंसर में इसका स्थान है। इस कैंसर के बारे में पूरी जानकारी दी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ यूएस पाल ने। जर्नल ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंस एंड रिसर्च के अनुसार भारत में हर एक लाख लाख की आबादी में हर बीसवाँ आदमी मुँह के कैन्सर से ग्रस्त है, जिसमें 30 प्रतशित आबादी सब तरह के कैन्सर से पीड़ित है। कैन्सर की वजह से भारत में हर एक घंटे में पांच से ज़्यादा व्यक्ति की मौत हो जाती है। भारत में कहीं कैन्सर पंजीकृत नहीं होता है इसलिए इससे ग्रस्त मामले ओर भी ज़्यादा हो सकते है। 2012 के आँकड़ों के मुताबिक़ भारत में मुँह का कैन्सर से 23161 महिलाएं और 53842 पुरुष ग्रस्त हैं। ऐसा माना जाता है की मुँह का कैन्सर सिर्फ़ बुज़ुर्गों में होता है पर ज़्यादातर कैन्सर 50-70 उम्र में होता है। ये 10 वर्ष के बच्चे को भी हो सकता है। हर तरह की उम्र को देखते हुए ये सबसे ज्यादा आदमियों को प्रभावित करता है। सबसे ज़्यादा कैन्सर दक्षिण भारत की महिलाओं देखा जा सकता है क्योंकि वो तम्बाकू बहुत चबाती हैं।

कैसे होता है ओरल कैंसर
1. स्मोकिंग-सिगरेट, सिगार, हुक्का, इन तीनों चीज़ों के आदी लोगों को एक नॉनस्मोकर के मुकाबले माउथ कैंसर होने का 6 फीसदी ज्यादा खतरा होता है।
2. तंबाकू-माउथ कैंसर होने का खतरा तंबाकू सूंघने, खाने या चबाने वाले लोगों को उनकी तुलना में 50 फीसदी ज्यादा होता है, जो तंबाकू यूज़ नहीं करते। माउथ कैंसर आम तौर पर गाल, गम्स और होंठों में होते हैं।
3. एल्कोहल-शराब पीने वालों को माउथ कैंसर होने का खतरा बाकी लोगों से 6 फीसद ज्यादा होता है।
4. हिस्ट्री-जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को माउथ कैंसर रहा हो, ऐसे लोगों को इस कैंसर का ज्यादा खतरा होता है। ओरल कैंसर के कई कारण जैसे, तम्‍बाकू (तंबाकू, सिगरेट, पान मसाला, पान, गुटखा) व शराब का अधिक तथा ओरल सेक्स व मुंह की साफ-सफाई ठीक से न करना आदि हैं।
भारत में हर साल पांच लाख लोग कैंसर से अकाल मौत का शिकार टाटा कैंसर सेंटर, मुम्बई से कैंसर की विश्व स्तरीय एवं अत्याधुनिक चिकित्सा प्रणाली लखनऊ में उपलब्ध कराई जायेगी। टाटा कैंसर संस्थान यहां के विशेषज्ञ डाक्टरों, नर्सों तथा अन्य कर्मचारियों को प्रशक्षिति करने के साथ-साथ तकनीकी एवं अनुभव का भी आदान-प्रदान करेगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अुनसार, भारत में हर साल पांच लाख लोग कैंसर से अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। कैंसर रोगियों की संख्या इसी रफ्तार से बढ़ती रही, तो 2015 में यह मृत्युदर सात लाख तक पहुंच जाएगी। पॉपुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) के अनुसार, भारत में एक साल में करीब 1,44,000 नए स्तन कैंसर के रोगी सामने आ रहे हैं। गलत जीवनशैली और जागरूकता की कमी के चलते भारत में स्तन कैंसर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दुनिया में अक्टूबर माह स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर स्तन कैंसर रोग विशेषज्ञों ने रोग की स्थिति, कारण, बचाव और उपचार के बारे में बताया है।

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