एलर्जी होने की कोई एक वजह नहीं, कई कारण हो सकते हैं

Deepak AcharyaDeepak Acharya   12 Dec 2018 12:18 PM GMT

एलर्जी होने की कोई एक वजह नहीं,  कई कारण हो सकते हैं

एलर्जी वास्तव में हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का ऐसा असर है जिसकी वजह से हमारे शरीर के संपर्क में आने वाले कुछ पदार्थों और रसायनों के प्रति संवेदनशीलता बहुत तेजी से दिखती है और कई बार इस संवेदनशीलता का असर काफी लंबे समय तक दिखायी देता है। जिस पदार्थ या रसायन की वजह से शरीर में एलर्जी होती है उसे एलर्जेन कहा जाता है और एलर्जेन्स कहीं भी पाए जा सकते हैं। भोजन, पेय पदार्थों से लेकर पेड़- पौधों और यहां तक कि दवाओं में भी इन्हें देखा जा सकता है। ज्यादातर एलर्जेन हानिकारक नहीं होते या यह कहा जा सकता है कि अधिकांश लोगों को इनका असर नहीं होता है, लेकिन जिनका शरीर एलर्जेन्स के प्रति संवेदनशील होता है, उनके लिए एलर्जी की समस्या बेहद घातक हो सकती है।

यदि आपका शरीर एलर्जेन्स के प्रति संवेदनशील है तो इसका अर्थ यह है कि आपका रोग प्रतिरोधक तंत्र किसी भी सामान्य एलर्जेन के आपके शरीर में प्रवेश के बाद उसे घातक मान बैठता है और उस पर आक्रमण कर देता है, उसे तहस-नहस करना चाहता है। इसी आक्रमण की वजह से शरीर पर लाल धब्बों, सूजन या चकतों का होना दिखायी देता है। दुनिया भर में लोगों में एलर्जी होना एक आम बात है। माना जाता है कि लगभग १५-२० प्रतिशत लोग अपने जीवनकाल में किसी ना किसी तरह की एलर्जी से ग्रस्त होते हैं या उन्हें इस एलर्जी के निवारण के इलाज की जरूर पड़ती है। ऐसे में एलर्जी को और बेहतर समझना जरूरी है। हम इस लेख में आम तौर पर होने वाली कुछ खास एलर्जी की बात करेंगे ताकि हम इसे और बेहतर समझ पाएं।

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वास्तव में हमारा रोग प्रतिरोधक तंत्र एलर्जेन्स को पहचान लेता है और जैसे ही इन एलर्जेन्स से हमारे शरीर को खतरा महसूस होता है, हमारे शरीर में एंटीबॉडीस बनने लगती है ताकि ये एंटीबॉडीस इन एलर्जेन्स पर आक्रमण कर सके, इसे सेंसीटाईजेशन कहा जाता है। ये सेंसीटाईजेशन एक दिन से लेकर कई महीनों और सालों तक चलता है या चल सकता है। इस दौर में नाक का बंद होना, छींक आना, आंखों का लाल होना, खुजली होना, बदन पर चकते बनना, आंखों का सूजना, त्वचा पर दाग बनना, त्वचा का अनायास शुष्क होना, उल्टियां, दस्त से लेकर तमाम कई तरह के लक्षण देखे जा सकते हैं।


ब्लड टेस्ट, स्किन प्रिक टेस्ट और पैच टेस्ट आदि के द्वारा किसी खास व्यक्ति में किसी खास वस्तु से होने वाली एलर्जी का पता लगाया जा सकता है। अपने खान-पान और आस-पास के घटनाक्रम के आधार पर भी कई बार पता चल जाता है कि हमें किस वजह से एलर्जी हो रही है। कई बार हमारे घर के आस-पास लगे पेड़ों पर खास मौसम में फूल आने पर भी एलर्जी हो सकती है। सही तरीकों, खान-पान और रहनसहन में बदलाव और हमारी सूझबूझ और समझ से ही काफी हद तक इस समस्या से निदान मिल सकता है। एलर्जी कई तरह की हो सकती है, इस लेख में हम जानने की कोशिश करते हैं अलग-अलग तरह की एलर्जी के बारे में, उम्मीद है पाठकों को जानकारी रोचक लगेगी।

खाद्य पदार्थों से होने वाली एलर्जी: जीवन के किसी ना किसी मोड़ पर हर किसी को खाद्य पदार्थों से होने वाली एलर्जी का सामना करना पड़ता है। खाद्य पदार्थों को सूंघकर या सेवन करने के तुरंत बाद शरीर में एलर्जी होते अक्सर देखा जाता है। खाद्य पदार्थों के सेवन के बाद शरीर में सूजन, त्वचा का रूखा-पन या दस्त जैसी समस्यांए एलर्जी होने को दर्शाती हैं।

दूध से एलर्जी: कई लोगों को दूध से एलर्जी होते देखा गया है। दूध सेवन के बाद कुछ लोगों को त्वचा पर लाल-पन या चकते पड़ जाते हैं और ऐसे लोगों को दूध या दूध से बने किसी भी उत्पाद से दूर रहने की सलाह दी जाती है। दूध की एलर्जी से कई बार उल्टियों और छींक का होना भी देखा गया है।

अंडे से एलर्जी: अंडे से सफेद हिस्से के सेवन के बाद बच्चों में एलर्जी होते देखा जाता है, यद्यपि इस तरह की एलर्जी व्यस्कों में कम होती है।

गेहूं की एलर्जी: गेहूं में पाए जाने वाले प्रोटीन की वजह से कई लोगों को एलर्जी होते देखा गया है। ग्लुटेन नामक पदार्थ की उपस्थिती के कारण शरीर में दाद- खाज, पेट दर्द, दस्त लगना, ब्रोंकोस्पास्म (अस्थमा के लक्षण) के अलावा एनाफायलेक्सिस जैसी एलर्जी को भी होते देखा गया है।

मूंगफली की एलर्जी: जिन्हें मूंगफली की एलर्जी हो उन्हें इसके तेल, उत्पादों और दानों से बने उत्पादों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। अक्सर मूंगफली के खाने के बाद शरीर पर लाल, काले निशान बन आना और जी मचलने की शिकायत होना एलर्जी की ही निशानी है।

मछली से एलर्जी: जो लोग भोजन में मछलियों का सेवन करते हैं, उन्हें भी कई बार एलर्जी का सामना कर पड़ सकता है। शरीर पर किसी भी तरह के दानों का अचानक उभरना, दस्त लगना, आंखों में लालपन और पानी का बहाव होना, मछलियों से जु़ड़ी एलर्जी की समस्या के तरफ इशारा करती है।

सल्फाईट एलर्जी: सल्फाईट दर असल सल्फर के समूह रसायन हैं। सल्फाईट को शीर्ष के दस एलर्जी कारकों में से एक माना जाता है। सल्फाईट कई तरह के खाद्य पदार्थों में प्रिसर्वेटिव्ह या परिरक्षक की तरह इस्तमाल किया जाता है और FDA की मानी जाए तो १०० में से १ व्यक्ति को इस रसायन से एलर्जी होने की गुंजाइश होती ही है।

सोय पदार्थों की एलर्जी: सोय पदार्थों से एलर्जी का तात्पर्य सोयाबीन, सेम, चना, काली सेम, दलहन आदि से है। इनके बीजों के सेवन के बाद अचानक दस्त होना, जी मिचलाना और आंखों में लालपन होना एलर्जी की वजह से ही होता है।

केसीन एलर्जी: यदि एक गिलास दूध पीने के बाद या पिज़्ज़ा का एक टुकड़ा चबाने के बाद आपके होंठ सूज जाएं, लाल रंग के हो जाएं, या जलन सी महसूस होने लगे तो आपको यह मान लेना चाहिए कि आप केसीन के प्रति एलर्जी रखते हैं। ऐसा वास्तव में दूध या दूध से बने उत्पादों में केसीन नामक प्रोटीन की उपस्थिती से होता है। कई बार लोगों को चीज़, मख्खन और मलाई से भी यह हो जाती है।

मौसमी एलर्जी: बसंत ऋतु के आते ही कई लोगों को एलर्जी होते देखा जाना आम होता है। इस मौसम में पेड़ों पर नयी पत्तियों और फूलों का लदना शुरु हो जाता है और ऐसे में फूलों के परागकण हवाओं में तैरते रहते हैं और इन परागकणों के सम्पर्क में आकर कई बार लोगों को एलर्जी हो जाती है और अलग अलग तरह की समस्याओं जैसे दमा, खांसी, छींक और आंखों में लालपन से जूझना होता है। बसंत ऋतु में होने वाली एलर्जी के लक्षण कई बार गर्मियों में भी होते दिखायी देती हैं।

पालतु पशुओं से एलर्जी: घरों में पाले जाने वाले पशुओं के सम्पर्क में आने पर भी यदाकदा एलर्जी का सामना कर पड़ सकता है। इन पशुओं के सम्पर्क में आते ही त्वचा पर खुजली या दाद का होना कई बार देखा जाता है। फेल डी वन (Fel d 1) नामक प्रोटीन बिल्लियों की लार में पाया जाता है, कई लोग इसकी गंध मात्र से एलर्जी महसूस करते है। इसी तरह पालतु पशुओं की पेशाब, लार, बालों और मल से भी एलर्जी होने की गुंजाइश रहती है।

हे फीवर (Hay Fever): हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधकता की कमी से यह रोग होता है जो वास्तव में एक तरह की एलर्जी है जो मूलत: परागकणों के संपर्क में आने वाले लोगों को होता है। इसे एलर्जिक रायनायटिस के नाम से भी जाना जाता है। वास्तव में इस तरह की एलर्जी दो तरह की होती है, मौसमी एलर्जी, जो कि साल के किसी एक खास मौसम में ही होती है जब पर्यावरण और आसपास के इलाकों में एलर्जी करने वाले परागकणों की भरमार होती है और दूसरी बहुवर्षी एलर्जी कहा जा सकता है। बहुवर्षी एलर्जी साल भर होते रहती है।

कंजक्टिवायटिस: इसे गुलाबी आंख की एलर्जी भी कहा जाता है, सामान्यत: यह बैक्टिरिया, वायरस जनित होती है। इस एलर्जी के होने पर आंखे लाल हो जाती है और इनमें सूजन भी आ जाती है।

हाईव्स या अर्टिकेरिया एलर्जी: इस एलर्जी के होने पर गालों और शरीर के कई हिस्सों पर लाल लाल गोले से उभर या सूजन आ आते हैं, त्वचा पर जलन या कई बार चकते पड़ जाते हैं। त्वचा पर होने वाली यह एलर्जी शरीर पर अस्थाई तरीके से अलग-अलग हिस्सों बनती और हटती रहती है।

पौधों के तरल द्रव की वजह से एलर्जी: कई पौधों से निकलने वाले तरल पदार्थों के संपर्क में आने से भी एलर्जी होती है। कई पौधों में उरुसिओल जैसे कई ऐसे रसायन पाए जाते है जो मानव त्वचा के संपर्क में आते ही एलर्जी कर देते है और इस एलर्जी का असर काफी दिनों तक रहता है।

कीटों के काटने के बाद की एलर्जी: कई कीट, पतंगे और मधुमख्खियों के काटे जाने के बाद बदन पर एलर्जी होते देखा जाना आम है हलांकि ये एलर्जी बहुत लंबे समय तक शरीर पर नहीं रहती है।

सूर्य की किरणों से एलर्जी: सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणों कें सम्पर्क में काफी देर तक रहने पर हमारी त्वचा पर एलर्जी होने की काफी गुंजाइश होती है।

एस्पीरिन एलर्जी: इसे सेलिसिलेट एलर्जी भी कहा जाता है, सेलिसिलेट वो रसायनिक कंपाउंड है जो कई पेड़ पौधों और एस्परिन और कई दर्द निवारक दवाओं में पाया जाता है। इसके अलावा यह कई सब्जियों और फलों में भी पाया जाता है। कई बार इसके सेवन से एलर्जी होते देखा गया है।

कॉस्मेटिक एलर्जी: कॉस्मेटिक हमारे सौंदर्य को निखारने का दावा जरूर करते हैं लेकिन कई बार इनके उपयोग से लेने के देने भी पड़ जाते हैं। कॉस्मेटिक्स में इस्तमाल होने वाले कई रसायन, सुगंधित पदार्थ, प्रिजर्वेटिव्स एलर्जी के कारक बन जाते हैं।

दवाओं की एलर्जी: कई रसायनिक और हर्बल दवाएं भी एलर्जी कर सकती है, कई बार दवाओं के शरीर में पहुंचते ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इन दवाओं पर ही आक्रमण कर बैठती है और ऐसे में एलर्जी हो जाती है।

धूल से एलर्जी: धूल से एलर्जी होने पर दमा, सांस लेने में तकलीफ और आंखों की जलन पैदा करती है और यह असर काफी लंबे समय तक रहता है।

एलर्जी होने की कोई एक वजह नहीं होती है, इसके कई कारण हो सकते हैं और इसके इलाज या रोकथाम के लिए सबसे पहला कदम हमें स्वयं को उठाना चाहिए। जब भी हमें एलर्जी महसूस हो तुरंत पिछले कुछ दिनों के खान-पान, रहन-सहन में आए बदलाव पर नज़र डालना जरूरी है। हो सकता है जिस नए घर में आप प्रवेश किए हों वहाँ आस-पास ज्यादा मात्रा में एलर्जेन्स की उपस्थिती हो, घर में लगे किसी पौधे के फूल या उसकी गंध से भी एलर्जी संभव है। धूल भरे इलाकों में रहने वाले लोगों को आमतौर पर धूल की एलर्जी से ग्रस्त देखा गया है, ऐसे में ऐसी जगह रहने के बजाए कम धूल भरे इलाकों में रहा जा सकता है। खान-पान से होने वाली एलर्जी के कारणों की खोज भी आप स्वयं कर सकते हैं। अपनी जीवनशैली में सुधार, स्वच्छता और सावधानी से काफी हद तक इस समस्या से निपटा जा सकता है।

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