शिक्षा जरूरी या नशे का कारोबार?

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इटवा (सिद्धार्थनगर)।स्कूल के पास नियमों को नजरअंदाज करके अंग्रेजी शराब की दुकान खोल दी गई और शराब की दुकान हटाने के बजाय स्कूल प्रबंधक को दबाव में आकर स्कूल को ही हटाना पड़ा।

सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय से लगभग 48 किमी. दूर इटवा ब्लॉक के इटवा बाजार में वर्ष 2014 में शैलेन्द्र सिंह ने किराए के मकान में सरस्वती ज्ञान मंदिर नाम से पांचवी तक का स्कूल शुरू किया था। दूसरे ही साल उनके बगल के ही मकान में किराए पर अंग्रेजी शराब की दुकान खुल गई जबकि नियमानुसार स्कूल के 100 मीटर के दायरे में शराब की दुकान नहीं होनी चाहिए।

शैलेन्द्र सिंह बताते हैं, “मैं भी किराए के मकान में स्कूल चलाता हूं और बगल के मकान मालिक ने अपने कमरे को शराब की दुकान के लिए किराए पर दे दिया। हमने कई बार कोशिश की ये दुकान हट जाए, लेकिन उन्होंने दुकान नहीं हटाई। इसलिए मजबूरन हमें अपना स्कूल ही हटाना पड़ा।”

गाँव कनेक्शन ने इसके बारे में मुख्य पृष्ठ पर ‘प से पौवा और प से पढ़ाई’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। शैलेन्द्र सिंह आगे कहते हैं, “हम इतने पैसे वाले नहीं है कि उन लोगों से लड़ सकते। कुछ दिनों बाद शराब की दुकान होने के कारण अभिभावकों ने कहना शुरू कर दिया कि हम अपने बच्चों को ऐसी हालत में स्कूल कैसे भेज सकते हैं। इस साल नए सत्र की शुरुआत में शैलेन्द्र सिंह ने अपने स्कूल को वहां करीब एक किमी दूर इटहिया गाँव में शिफ्ट कर लिया।

क्या है शराब की दुकान खोलने के नियम

आबकारी विभाग के नियमों के अनुसार मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर एवं स्कूलों से शराब  की दुकान की दूरी 100 मीटर होना अनिवार्य है। 100 मीटर से कम दूरी होने पर शराब दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। दुकान खोलने के लिए ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र और प्रधान से रिपोर्ट लेने के बाद तहसीलदार, एसडीएम की रिकमंडेशन के बाद जिला अधिकारी द्वारा निर्धारित स्थान पर शराब दुकान खोलने की अनुमति दी जाती है। 

 स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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