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समय से पहले गेहूं में बालियां, उत्पादन पर पड़ेगा असर

समय से पहले गेहूं में बालियां, उत्पादन पर पड़ेगा असरगाँव कनेक्शन

लखनऊ। मौसम में हुए बदलाव से गेहूं में समय से पहले बालियां निकलनी शुरू हो गयी हैं, जिससे गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ेगा साथ ही छोटे पौधों की वजह से भूसे की भी किल्लत हो सकती है।

सीतापुर जि़ला मुख्यालय से लगभग 50 किमी सिधौली ब्लॉक के सरसौली गाँव के किसान राम स्वरूप यादव (55 वर्ष) ने साढ़े चार बीघा में अगेती किस्म का लोकमान बीज बोया है। राम स्वरूप की खेत में गेहूं में बालियां तो आ गयी लेकिन पौधों में वृद्वि हुई ही नहीं है। राम स्वरूप बताते हैं, ''दीवाली पर गेहूं की बुवाई की थी इस बार पहले ही गेहूं में बाली आ गयी, जबकि पौधे बढ़े ही नहीं है, हर बार एक पौधे में कई बालियां निकलती थी, इस बार एक दो बालियां ही निकली हैं।" 

आमतौर पर गेहूं की विभिन्न प्रजातियों की लंबाई 80 से 130 सेमी तक होती है और ये प्रजातियां 90 से 145 दिनों में तैयार होती हैं, लेकिन इस बार फसल की लंबाई सिर्फ 30 सेमी से है और गेहूं में बालियां आनी शुरू हो गयी हैं। अगेती किस्म के गेहूं में भी जनवरी के आखिरी सप्ताह से लेकर फरवरी के प्रथम सप्ताह तक बालियां निकलती हैं।

सबसे अच्छा गेहूं बढ़ते समय नम और ठंडा और पकते समय शुष्क और गर्म मौसम में पैदा होता हैै। गर्म मौसम दानों के ठीक से पकने में मदद करता है। बढ़ते समय और बाली निकलने के दौरान जरूरत से ज्यादा उच्च तापमान या सूखे की स्थिति गेहूं के लिए हानिकारक होती है।

सरसौली गाँव से लगभग 280 किमी दूर प्रतापगढ़ जिले के बाबागंज ब्लॉक के चौहान का पुरवा गाँव के किसान विजय सिंह (45 वर्ष) के खेत में भी बालियां आ गयी हैं। विजय सिंह बताते हैं, ''अगेती किस्म के गेहूं में वैसे भी जल्दी समय में बालियां आ जाती हैं लेकिन इस बार कुछ पहले ही बालियां आ गयी हैं। पौधों के छोटे होने के कारण बालियां भी बहुत छोटी लगी हैं। पौधे छोटे हैं तो भूसा भी कम होगा।" 

अगैती किस्म की गेहूं की प्रजातियां 90 दिनों में तैयार होती हैं, लेकिन इस बार सर्दी न पडऩे से गेहूं के पौधे नहीं बढ़ पाये और बालियां निकल आयी हैं, जिससे पैदावार में फर्क तो पड़ेगा ही भूसे की भी किल्लत हो जाएगी। गेहूं की फसल में बालियां आने से किसान चिंतित हैं। यह स्थिति किसी एक गाँव में नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई जि़लों में नजर रही है। 

प्रतापगढ़ जिले के कृषि उपनिदेशक एके विश्रोई बताते हैं, ''इस बार दिसंबर-जनवरी में काफी ज्यादा तापमान रहा, वातावरण शुष्क होने के कारण गेहूं में असमय बालियां आ गयी, जबकि पौधे छोटे ही हैं। इस वजह से इस बार उत्पादन भी कम हो सकता है। वो आगे बताते हैं, ''इस महीने में बारिश और कोहरे से तापमान कम तो हुआ, लेकिन जिन पौधों में बालियां निकल आयी हैं, वो अब नहीं बढ़ेंगे। देरी से बोये गये गेहूं को मौसम से फायदा होगा।" 

सरसौली गाँव के ही किसान हरिश्चंद्र प्रजापति अपने खेत को दिखाते हुए कहते हैं, ''हर बार फसल बर्बाद हो जाती है कभी ज्यादा बारिश से तो काफी सूखे से इस बार ठंड ही नहीं पड़ी, कुछ भी हो नुकसान तो किसानों का ही होता है।" 

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